खाने को नहीं थे पैसे तो 300-400 रुपए में इस कॉमेडियन ने बेची ट्रॉफी, बोला- पुरस्कार खाली पेट नहीं भर सकते

Sudesh Lehri

Sudesh Lehri Struggle Story: कॉमेडी किंग तो बहुत सारे हैं लेकिन आज हम आपको कॉमेडियन सुदेश लहरी के बारे में बताने वाले हैं। जिनको दर्शकों द्वारा कही प्यार मिला और आज के वक्त में वह अपने फैंस के बीच में अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। सुदेश लहरी को अच्छे से पता है कि उनके फैंस के चेहरे पर किस तरीके से मुस्कान आ सकती है।

लेकिन आपको बता दें कि सुदेश लहरी ने अपने जीवन में काफी स्ट्रगल किया है। एक बार खुद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए उन दिनों का किस्सा शेयर किया था जब उनको अपनी ट्रॉफी 300 से 400 रुपए में बेचनी पड़ गई थी। उन्होंने ऐसा भी वक्त देखा है जब उनके पास घर में अपने बच्चों के लिए खाना खरीदने के पैसे से कहीं ज्यादा ट्राफियां थी।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि सुदेश लहरी अपने सेंस ऑफ ह्यूमर के चलते काफी जाने जाते हैं और वह एक मशहूर एक्टर होने के साथ-साथ कॉमेडियन भी रहे हैं। उन्होंने काफी लंबे वक्त पहले एक पोस्ट शेयर किया था और उसमें बताया था कि पुरस्कार जीतना हमेशा आपका खाली पेट नहीं भर सकता है।

इस दौरान सुदेश लहरी ने अपने नए घर में शिफ्ट होते इस वक्त ट्रॉफियों और पुरस्कारों से भरे हुए बैग की एक झलक भी शेयर की थी। साथ ही इसके पीछे की कड़वी सच्चाई का भी खुलासा किया था। उन्होंने कहा कि "यह पुरस्कार जो आप देख रहे हैं, ये सब मेरे पुराने घर से आए हुए हैं और एक वक्त था जब हमारे पास में इन अवॉर्ड्स को रखने के लिए जगह भी नहीं थी।"

सुदेश लहरी ने इस दौरान कहा कि "आज हमारे पास में जगह है और इसीलिए मैं उनके लिए एक अलमारी बनाऊंगा। इन सभी ट्रॉफियों को साफ करने और झाड़ने के बाद वहां पर रखूंगा। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब हमारे पास में पैसे नहीं थे। तब कोई मेरे पास में आता है और उन्होंने मुझे कहा कि वह मुझे ट्रॉफी देकर सम्मानित करना चाहते हैं।"

सुदेश लहरी ने आगे बताया कि "मैं उन्हें कहा कि ट्रॉफी तो नहीं, लेकिन घर पर खाने के लिए पैसे नहीं है तो आप पैसे दो। तो उन्होंने मुझे कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकते और तब मैंने उनसे ट्रॉफी की कीमत पूछी। तो उन्होंने मुझे 300 से 400 रुपए उसकी कीमत बताई।"

सुदेश लहरी ने आगे यह भी बताया कि "जब मैं घर पर ट्रॉफियां लेकर पहुंचता था तो बच्चे रहते थे कि पापा रोज ट्रॉफियां लेकर आ जाते हो। कभी हमारे लिए टॉफीयां भी लाया करो।" सुदेश लहरी के इस पोस्ट से साफ पता चलता है कि गरीबी इंसान से कुछ भी करवा सकती है।

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