3 सालों तक लगातार दिए ऑडिशन, बेचना पड़ा घर और बीवी के गहने, फिर पल्टी ऐसी किस्मत कि आज...

यशराज बैनर तले बनी फिल्म जब तक है जान से अपना एक्टिंग करियर शुरू करने वाले शारिब हाशमी इन दिनों बॉलीवुड में काफी ज्यादा सुर्खियों में बने हुए हैं. ओटीटी से लेकर फिल्मों तक में अपनी दमदार एक्टिंग की वजह से उन्होंने हर किसी का दिल जीता और आपको बता दें कि आज के वक्त में वह टॉप एक्टर्स की लिस्ट में शुमार हो चुके हैं.
अपनी एक्टिंग से हर किसी को बनाया दीवाना
इसी के साथ आपको बता दें कि हाल ही में उनकी फिल्म जरा हटके जरा बचके में वह काफी कम नजर आए. लेकिन इसके बावजूद भी वह दर्शकों की आंखों से बच नहीं पाए. बता दें कि शारिब ने इस फिल्म में दरोगा का किरदार निभा कर हर किसी का ध्यान खींचा. इतना ही नहीं आपको बता दें कि हाल ही में हुमा कुरैशी के साथ में बेहतर ला फिल्म में भी नजर आए. इस फिल्म में उन्होंने हुमा कुरैशी के पति का किरदार निभाया.
हुमा कुरैशी के पति के किरदार में नजर आए एक्टर
शारिब ने अपने इस प्रोजेक्ट पर बात करते हुए बताया कि "मैं इससे पहले सबसे ज्यादा एक्साइटेड फिल्मिस्तान के समय पर हुआ था. आज मुझे वैसे ही खुशी हो रही है. काफी लंबे समय के बाद में मुझे कोई लीड रोल मिला है. इस फिल्म में मुझे हुमा कुरैशी के ऑपोजिट देखा गया. इस फिल्म की कहानी मेरे निजी जीवन से थोड़ी सी प्रभावित है. मैं तरह के किरदार से खुद को रिलेट कर पा रहा हूं और एक उम्र के बाद तरला जी को अपने करियर को लेकर दिशा नहीं मिल रही रही. जिसके बाद उन्होंने अपनी कुकिंग की ही स्किल को आगे बढ़ाया. ठीक ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ और जब मैं 33 साल का हो गया था तो जाकर लगा कि मेरे अंदर एक एक्टर छुपा हुआ है. जिसके बाद में मैंने एक्टिंग में ही अपना सबकुछ तलाशना शुरू कर दिया."
जॉब छोड़ एक्टिंग की तरफ किया रुख
इस पर आगे बात करते हुए शारिब ने बताया कि "मैं एक अच्छा खासा प्रोडक्शन में जॉब किया करता था. मुझ पर मेरी पत्नी और एक बेटे की जिम्मेदारी भी थी. लेकिन उस समय मेरा काम में मन नहीं लगता था. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं करना क्या चाहता हूं. फिर मुझे एहसास हुआ कि मुझे एक्टिंग में हाथ आजमाना चाहिए क्योंकि मैं कॉलेज और स्कूल में भी एक्टिंग ग्रुप में काफी एक्टिव हुआ करता था. मैं बहुत ही कंफ्यूज था क्योंकि एक्टिंग करियर एक जुए की तरह होता है. वही ऊपर से मुझ पर परिवार की जिम्मेदारियां की. लेकिन इसके बावजूद मेरी पत्नी ने मुझे सपोर्ट किया. उन्होंने मुझको कहा कि अगर आप दिल की नहीं सुनोगे तो जिंदगी भर कभी भी खुश नहीं रह पाओगे."
33 साल की उम्र में शुरू किया ऑडिशन देना
शारिब ने इसी पर आगे यह भी कहा कि "मैंने अपना काम छोड़ दिया और ऑडिशन देने लगा. मैं 33 साल की उम्र से ऑडिशन के लिए जाने लगा और कॉलेज के दिनों में एक्टिंग की बिल्कुल भी नहीं सोची थी क्योंकि मैं अपनी कद काठी को लेकर बिल्कुल भी कॉन्फिडेंट नहीं था. ऐसा इसीलिए क्योंकि इंडस्ट्री में एक्टर और एक्ट्रेस इसके लिए जो भी ढांचा बनाया गया है मैं उस में खुद को फिट नहीं समझता था. जिस वजह से इस सपने को मैंने पीछे छोड़ा और बाकी चीजों में खुद को उलझा लिया."
पत्नी के पेशेंस का निकला फल
ऑडिशन के समय को याद करते हुए शारिब ने बताया कि "वह दौर आज भी मुझे बहुत अच्छे से याद है और मैं रोजाना ऑडिशन के लिए जाया करता था. कॉल पर रिजेक्शन का मैसेज देख कर सो जाया करता था. यही सब 3 सालों तक चलता रहा. इन 3 सालों में मैंने हजारों ऑडिशन दिए होंगे और रिजेक्शन भी उतने ही झेले. मेरी जितनी भी सेविंग कि वह खत्म हो गई. उस वक्त मेरी पत्नी ने काम करना शुरू किया वह घर चलाने लगी. समय ऐसा आया कि पत्नी के जेवर बेचने पड़े. घर भी बेच दिया. दोस्तों से कर्ज लेना पड़ा. इसके बावजूद भी मेरी पत्नी ने कभी शिकायत नहीं की. लेकिन उसके पेशेंस का नतीजा आज मैं यहां पहुंचा. मैंने खुद का घर खरीद लिया और दोस्तों के भी सारे पैसे वापस कर दिए. मैं ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करता हूं जिसने मुझे इतनी अंडरस्टैंडिंग पत्नी दी. मैंने पिछले जन्म में जरूर कुछ अच्छे कर्म किए होंगे."


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