बॉलीवुड के इस एक्टर की फैमिली स्टोरी है सबसे अनोखी, 3 मां और 3 पिता की अनोखी कहानी, नाम है...
बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे हैं जिनकी निजी जिंदगी उनकी फिल्मों जितनी ही दिलचस्प रही है। बदलते रिश्ते, अलग-अलग शादियां और सौतेले भाई-बहनों के साथ बड़ा होता परिवार- ये सब मिलकर एक ऐसी फैमिली स्टोरी बनाते हैं, जो अक्सर सुर्खियों में रहती है। खासकर तब, जब किसी स्टार के माता-पिता ने अपनी जिंदगी में कई नए रिश्ते जोड़े हों और लंबा-चौड़ा फैमिली ट्री बना हो।

हम यहां जिस एक्टर की बात कर रहे हैं, वह हैं Shahid Kapoor। उनके फैमिली बैकग्राउंड को लेकर अक्सर मीडिया और फैंस के बीच चर्चा होती रही है। यहां तक कि मजाक-मजाक में कहा जाता है कि उनके 'तीन पिता और तीन मां' हैं। दरअसल, यह बात उनके माता-पिता के अलग-अलग विवाह और रिश्तों की वजह से कही जाती है।
शाहिद कपूर के असली माता-पिता
शाहिद के असली पिता मशहूर अभिनेता Pankaj Kapur हैं और उनकी मां एक्ट्रेस Neelima Azeem हैं। दोनों ने 1979 में शादी की, लेकिन कुछ साल बाद अलग हो गए। उस समय शाहिद बहुत छोटे थे और वे अपनी मां के साथ पले-बढ़े।
क्यों कहा जाता है 'तीन पिता'?
शाहिद की जिंदगी में तीन पिता समान शख्सियतों का जिक्र किया जाता है। पहले, उनके असली पिता पंकज कपूर। दूसरे, Rajesh Khattar, जो नीलिमा अजीम के दूसरे पति रहे। शाहिद ने अपने बचपन का एक अहम हिस्सा उनके साथ बिताया। राजेश खट्टर और नीलिमा अजीम के बेटे हैं Ishaan Khatter, जो शाहिद के सौतेले भाई हैं। तीसरे, Ustad Raza Ali Khan, जिनसे नीलिमा अजीम ने बाद में शादी की। इन्हीं रिश्तों की वजह से कहा जाता है कि शाहिद के जीवन में तीन अलग-अलग पिता हैं।
'तीन मां' की चर्चा कैसे शुरू हुई?
मां के मामले में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है। पहली, उनकी असली मां नीलिमा अजीम, जिन्होंने शाहिद को जन्म दिया। दूसरी, Supriya Pathak, जो पंकज कपूर की दूसरी पत्नी हैं और शाहिद की सौतेली मां हैं। तीसरी, Vandana Sajnani, जो राजेश खट्टर की दूसरी पत्नी हैं। चूंकि शाहिद राजेश खट्टर को पिता समान मानते रहे हैं, इसलिए वंदना सजनानी का नाम भी उनकी मां की लिस्ट में जोड़ा जाता है।
बड़ा लेकिन जुड़ा हुआ परिवार
पंकज कपूर और सुप्रिया पाठक के दो बच्चे- सना और रुहान कपूर भी शाहिद के सौतेले भाई-बहन हैं। वहीं, ईशान खट्टर के साथ उनकी बॉन्डिंग अक्सर सुर्खियों में रहती है। शाहिद कपूर का परिवार भले ही एक अलग सा परिवार दिखता हो, लेकिन रिश्तों में सम्मान और अपनापन साफ नजर आता है। यह कहानी बताती है कि परिवार सिर्फ खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि एक्सेप्टेंस और समझ से भी बनता है।


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