Rekha इस बोल्ड सीन में भूल गई थीं सारी मर्यादा, कुर्सी तोड़कर भी नहीं रुकीं, को-एक्टर को करती रहीं प्यार

Rekha Om Puri intimate scene: बॉलीवुड का इतिहास जितना चमकदार है, उतना ही दिलचस्प भी। वक्त के साथ फिल्मों की सोच, कहानियों और किरदारों में काफी बदलाव आया है। एक दौर था जब रोमांटिक सीन के लिए सिर्फ दो फूलों को एक-दूसरे से टकराते हुए दिखा दिया जाता था। लेकिन कुछ फिल्में उस दौर में भी ऐसी थीं, जो अपने समय से बहुत आगे थीं और उन्हीं में से एक फिल्म थी 'आस्था: इन द प्रिजन ऑफ स्प्रिंग'।
इस फिल्म ने ना सिर्फ दर्शकों को चौंकाया, बल्कि इसके एक बोल्ड सीन ने इतना शोर मचाया कि रेखा फिर एक बार सुर्खियों के बीच आ गईं। रेखा... एक ऐसा नाम जो अपनी खूबसूरती, अदाकारी और ग्रेस के लिए जाना जाता है। उनके एक्सप्रेशन हों या डायलॉग डिलीवरी- उनमें आज भी लोगों को एक अलग ही जादू नजर आता है। वो जितनी शानदार एक्ट्रेस हैं, उतनी ही बेबाक इंसान भी हैं।
अपने लंबे करियर में उन्होंने कई शानदार रोल किए। लेकिन जब बात आती है चैलेंजिंग रोल्स की, तो 1997 में आई उनकी फिल्म 'आस्था' को जरूर याद कि जाता है।
जब रेखा ने परंपरा को तोड़ा
रेखा ने इस फिल्म में मानसी नाम की महिला का किरदार निभाया था। एक ऐसी मिडिल क्लास पत्नी जो हालात के चलते एक वेश्या बनने का फैसला लेती है। फिल्म की कहानी बहुत ही सेंसिटिव थी और डायरेक्टर बासु भट्टाचार्य ने इसे बेहद रियलिस्टिक टोन में दिखाया है। इस फिल्म में रेखा के साथ ओम पुरी, नवीन निश्चल और डेजी ईरानी जैसे दिग्गज एक्टर्स भी थे।
वो सीन जिसने सबका ध्यान खींचा
फिल्म के एक सीन में रेखा और ओम पुरी एक-दूसरे के बेहद करीब नजर आते हैं- एक कुर्सी पर किया गया वो इंटीमेट सीन उस वक्त लोगों के लिए बहुत ही चौंकाने वाला था। कहा जाता है कि दोनों कलाकार अपने किरदार में इतने घुल गए थे कि वो सीन हद से ज्यादा रियल लगने लगा। यहां तक कि अफवाहें तो ये भी थीं कि शूटिंग के दौरान उनके वजन से कुर्सी तक टूट गई। हालांकि, इस बात की कभी पुष्टि नहीं हुई - लेकिन चर्चा जरूर बनी।
रेखा को किया गया ट्रोल
'आस्था' को लेकर रेखा पर काफी सवाल उठे। कई लोगों ने कहा कि एक सशक्त अभिनेत्री को इस तरह का किरदार नहीं करना चाहिए था। लेकिन रेखा ने इसका बिना झिझक जवाब दिया कि "इस फिल्म के बाद कई लोगों ने मुझसे कहा कि मैंने एक वेश्या का किरदार क्यों निभाया। लेकिन मैं किसी भी भूमिका से नहीं डरती। मैं आज उस मुकाम पर हूं जहां मैं हर तरह का रोल निभा सकती हूं- चाहे वो मां का हो, भाभी का, या फिर कोई भी किरदार जो कुछ कहने लायक हो।"
रेखा सिर्फ एक एक्ट्रेस नहीं हैं, वो एक सोच हैं। उन्होंने जिस तरह से 'आस्था' में अपने कैरेक्टर को निभाया, वो सिर्फ एक्टिंग नहीं थी- वो एक सामाजिक सच्चाई को दर्शाने की कोशिश थी। आज जब फिल्मों में बोल्डनेस आम हो गई है, तब हमें याद आता है कि रेखा ने उस दौर में भी जोखिम उठाया था जब लोग सिर्फ सुंदर दिखने को ही काफी मानते थे।


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