रणदीप हुड्डा से आदर्श गौरव तक: इन एक्टर्स ने किरदार के लिए खुद को इतना बदला, पहचानना भी हुआ मुश्किल
Bollywood Actor's Best Transformation: एक ऐसी इंडस्ट्री में जहाँ अक्सर स्टार इमेज को महत्व दिया जाता है, कुछ ही कलाकार ऐसे होते हैं जो अपने असली व्यक्तित्व को पूरी तरह पीछे छोड़कर किरदार में पूरी तरह ढल जाते हैं। ये कलाकार सिर्फ अभिनय नहीं करते, बल्कि किरदार बन जाते हैं।

शारीरिक बदलाव, अलग बोलचाल, बॉडी लैंग्वेज और गहराई से किरदार को समझना - ये सब उनकी पहचान है। ये सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि सिनेमा के "गिरगिट" हैं, और दर्शक हमेशा उत्साहित रहते हैं कि अगली बार ये किस रूप में नज़र आएंगे।
यहाँ ऐसे ही कुछ कलाकारों का जिक्र है जो हर बार दर्शकों को हैरान कर देते हैं।
रणदीप हुड्डा
रणदीप हुड्डा अपने बेखौफ बदलाव के लिए जाने जाते हैं। सरबजीत में उनका शारीरिक बदलाव बेहद भावुक और चौंकाने वाला था। स्वतंत्र्य वीर सावरकर में उन्होंने एक क्रांतिकारी का किरदार गहराई से निभाया। मैं और चार्ल्स और सुल्तान में भी उन्होंने अपने किरदार के अनुसार खुद को बदला। हॉलीवुड फिल्म एक्सट्रैक्शन में उन्होंने एक कातिल की भूमिका निभाई। अपने हर किरदार के लिए वे वज़न कम या ज़्यादा करते हैं, मांसपेशियां बनाते हैं, चलने-बोलने का तरीका बदलते हैं और लहजे को अपनाते हैं। वे सिर्फ एक्टिंग नहीं करते, बल्कि किरदार को जीते हैं।
आदर्श गौरव
आदर्श गौरव ने चुपचाप खुद को अपनी पीढ़ी के सबसे समर्पित कलाकारों में शामिल कर लिया है। द व्हाइट टाइगर से लेकर गन्स एंड गुलाब्स, खो गए हम कहां और सुपरबॉयज़ ऑफ मालेगांव तक उन्होंने हर तरह के किरदार निभाए हैं। अपनी नई फिल्म तू या मैं में वे नालासोपारा के एक लोकल रैपर बने हैं। इसके लिए उन्होंने मुंबई की स्ट्रीट भाषा सीखी और खुद रैप परफॉर्म किया। अपने किरदार को सच्चा दिखाने के लिए उन्होंने शरीर में बदलाव किया, चेहरे पर पियर्सिंग करवाई और लहजा बदला। उनकी अंतरराष्ट्रीय फिल्म एलियन: अर्थ यह साबित करती है कि उनकी प्रतिभा सीमाओं से परे है।
आर. माधवन
आर. माधवन अपने करियर के कई सालों बाद भी दर्शकों को चौंकाते रहते हैं। धुरंधर में उनका रफ अंदाज, शैतान में गहरी भूमिका, रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट में सटीक अभिनय और केसरी चैप्टर 2 व द रेलवे मेन में प्रभावशाली किरदार - हर बार उन्होंने खुद को बदला है। अपनी आने वाली तमिल सिरीज़ लेगेसी के साथ वे फिर साबित कर रहे हैं कि उम्र प्रयोग करने में बाधा नहीं है। वज़न बढ़ाना, घटाना या आवाज़ और हाव-भाव में बदलाव - माधवन हर बार खुद को नया रूप देते हैं।
रणवीर सिंह
रणवीर सिंह शायद बॉलीवुड के सबसे रंगीन और बदलते रहने वाले कलाकार हैं। धुरंधर और पद्मावत में उनका अलग अंदाज़, बाजीराव मस्तानी के लिए सिर मुंडवाना, गली बॉय।में स्ट्रीट रैपर की बॉडी लैंग्वेज अपनाना और 83 में कपिल देव की चाल-ढाल और ऊर्जा को हूबहू दिखाना - हर बार वे खुद को पूरी तरह बदल लेते हैं। उनकी आवाज़, लहजा, हाव-भाव और ऊर्जा हर फिल्म में अलग होती है।
आमिर खान
आमिर खान को बॉलीवुड का "मिस्टर परफेक्शनिस्ट" कहा जाता है। शारीरिक बदलाव का ट्रेंड शुरू होने से पहले ही आमिर ने इसकी मिसाल पेश कर दी थी। दंगल के लिए उन्होंने पहले पहलवान जैसा शरीर बनाया और फिर वज़न बढ़ाया। सितारे ज़मीन पर में उन्होंने अपने लुक और उम्र के साथ प्रयोग किया। लाल सिंह चड्ढा में उन्होंने लंबी दाढ़ी रखी और एक सिख व्यक्ति का किरदार पूरी सच्चाई से निभाया। मंगल पांडे: द राइजिंग के लिए उन्होंने लंबे बाल और घनी मूंछ रखी।
गुलशन देवैया
गुलशन देवैया समकालीन सिनेमा के सबसे बहुमुखी कलाकारों में से एक हैं। वे नए प्रयोग करने से नहीं डरते। घोस्ट स्टोरीज में उन्होंने भारी प्रोस्थेटिक्स और बॉडी सूट पहनकर एक डरावने किरदार को निभाया। मर्द को दर्द नहीं होता में उन्होंने दो अलग-अलग तरह के किरदार निभाए - एक अजीब बॉडी लैंग्वेज वाला कॉन्ट्रैक्ट किलर "चार कट आत्माराम" और एक शारीरिक रूप से कमज़ोर कराटे मास्टर। यह सब उन्होंने घुटने की सर्जरी से उबरते हुए किया।


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