सेक्स एजूकेशन पर ये क्या बोल गई कंडोम टेस्टर हसीना, छतरीवाली एक्ट्रेस ने कही ऐसी बात कि...

इंडियन सोसाइटी में सेक्स एजुकेशन एक बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है. जिसको लेकर फिल्मों में भी कई बार आवाज उठाई जाती है. लेकिन अब हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ओ माय गॉड 2 में खासतौर पर स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में सेक्स एजुकेशन को जोड़े जाने की वकालत दिखाई गई है. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफलतापूर्वक कमाई करके ले गई है.लेकिन इसमें सिर्फ बात स्कूलों की नहीं बल्कि वयस्कों में भी इस मुद्दे पर कई भ्रम हैं. जिनको दूर करने की जरूरत महसूस होती है. पिछले कुछ सालों में जारी, हेलमेट और डॉक्टर जी के साथ-साथ छतरी वाली जैसी फिल्मों में वयस्कों के ही मामलों को पर्दे पर दिखाया गया. अब फिल्म छतरीवाली की एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह सेक्स एजुकेशन को लेकर कुछ बहुत ही जरूरी बातें कही है.
यौन शिक्षा को लेकर रकुल प्रीत सिंह ने खुलकर की बात
दरअसल आपको बता दें कि हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उनसे जब पूछा गया कि बीते कुछ वक्त में रिलीज हुई फिल्म ओएमजी 2, डॉक्टर जी और छतरी वाली जैसी फिल्मों में सेक्स एजुकेशन पर जो भी बात की गई है उनके बारे में आप क्या विचार रखती हैं? जिस पर रकुल प्रीत सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि "मेरा मानना है की फिल्में बड़ी संख्या में लोगों को सीखने में सक्षम है. हमारे समाज के अंदर हर कुछ किलोमीटर पर लोगों के सोचने समझने का ढंग बदल जाता है. दुनिया को लेकर हर किसी का एक्सपोजर अलग-अलग होता है. इसीलिए सेक्स एजुकेशन हर किसी के लिए बहुत जरूरी है."
ओमजी 2 मे भी यौन शिक्षा का किया गया है जिक्र
रकुल प्रीत सिंह ने आगे यह भी कहा कि मेरा मानना तो यह भी है कि लोगों को अच्छी बातें सीखने के लिए फिल्में बहुत कारगर है. ओमजी 2 में भी यही दिखाया गया और अपनी फिल्म का जिक्र करते हुए रकुल प्रीत सिंह ने यह भी कहा कि हमने फिल्म छतरीवाली में भी यौन शिक्षा का जिक्र किया.
रकुल प्रीत सिंह ने बातचीत को सहज करने के लिए दिया सुझाव
छतरीवाली फिल्म में रकुल प्रीत सिंह ने एक कंडोम कंपनी कंडोम टेस्टर की भूमिका निभाई. अभिनेत्री ने इस फिल्म के दौरान उन्होंने कुछ ऐसे कारण बताए, जिसकी वजह से इस मुद्दे पर बात करना बहुत जरूरी हो जाता है. उन्होंने बताया कि देश में बलात्कार बढ़ते जा रहे हैं. हमने चंद्रमा पर तो कदम रख दिया है लेकिन हम ऐसी सभ्यता में रह रहे हैं जहां पर बच्चों, किशोरियों और महिलाओं और यहां तक की बुद्धि महिलाओं का भी बलात्कार हो जाता है. शिक्षा लोगों को जागरूक करने का सबसे अच्छा माध्यम है. उन्होंने बताया कि लोगों को बताने की जरूरत है कि स्त्री और पुरुष के शरीर अलग-अलग होते हैं. इसीलिए रकुल प्रीत सिंह ने यह भी कहा कि मेरा मानना है कि जितना अधिक हम इस बारे में बात को सामान्य बनाएंगे लोग उतना ही यौन शिक्षा के मुद्दे को सहज बना पाएंगे.


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