राजीव कपूर - सलमान खान में हुई थी इस पाकिस्तानी हीरोइन की वजह से लड़ाई, पढ़िए अनसुने किस्से
राज कपूर के सबसे छोटे बेटे और रणधीर कपूर - ऋषि कपूर के छोटे भाई राजीव नंदा, 9 फरवरी को 58 साल की उम्र में दुनिया से अलविदा कह गए। अब उनकी पीछे बची हैं तो उनकी यादें, उनके किस्से और उनसे जुड़ी कहानियां। ऐसे ही कुछ किस्से हम आपके लिए लेकर आए हैं जो या तो आपने सुने नहीं होंगे और सुने होंगे तो आपके ज़ेहन में नहीं होंगे।
इन किस्सों में शामिल है राजीव कपूर का सलमान खान से झगड़ा तो अनिल कपूर और सनी देओल के साथ कुछ मनमुटाव। कुछ का कारण राजीव खुद थे और कुछ किस्सों का कारण थीं परिस्थितियां।

हिना एक्ट्रेस ज़ेबा बख्तियार ने उन्हें याद करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया से एक बातचीत में कहा - मैं सोच भी नहीं सकती कि डबू (रणधीर कपूर) पर क्या बीत रही होगी। एक ही साल के अंदर अपने दो भाईयों को खोना। मैं चिंपू (राजीव कपूर) के ज़्यादा टच में नहीं थी लेकिन डबू से जब बात होती तो वो बताते कि चिंपू ठीक है।
राजीव कपूर के बारे में बात करते हुए ज़ेबा ने आगे कहा - मुझे चिंपू हमेशा एक खुशमिज़ाज़ इंसान के तौर पर याद रहेगा। जब हम हिना की शूटिंग कर रहे थे तो हमने ढेर सारा वक्त साथ बिताया और वो वक्त बेहद अच्छा था। केवल हंसी के ठहाके लगते थे।
इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान राजीव कपूर और सलमान खान के बीच हुआ था एक बड़ा झगड़ा।

सनम बेवफा और हिना की शूटिंग
सलमान खान की फिल्म सनम बेवफा और ऋषि कपूर की फिल्म हिना की शूटिंग एक ही जगह चल रही थी। दोनों फिल्मों की टीम एक ही होटल में रूकी थी। राज कपूर के निधन के बाद रणधीर - ऋषि - राजीव मिलकर हिना पूरा कर रहे थे। फिल्म की हीरोइन थीं पाकिस्तानी एक्ट्रेस ज़ेबा बख्तियार और सलमान ने उन्हें एक रात डिनर पर ले जाने के लिए अप्रोच किया।

गुस्से में आ गए राजीव
राजीव कपूर नहीं चाहते थे कि RK बैनर की किसी भी हीरोइन का नाम कहीं और जोड़ा जाए। सलमान, दूसरी तरफ, ज़ेबा को फूल भेजते रहते थे। जब ज़ेबा और सलमान डिनर पर पहुंचे तो राजीव भी वहीं पहुंच गए और उसी टेबल पर जाकर बैठ गए। खबरों की मानें तो दोनों के बीच हाथापाई तक हुई। बाद में सलमान ने कहा कि राजीव ये कहानी सस्ती पब्लिसिटी के लिए कर रहे और राजीव ने कहा कि सलमान की इतनी हिम्मत नहीं है कि उन्हें हाथ लगा सके।

प्रेम ग्रंथ की स्क्रीनिंग
राजीव के निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी प्रेम ग्रंथ। प्रेम ग्रंथ का प्रीमियर शानदार तरीके से रखा गया था। जब प्रीमियर पर राजीव पहुंचे तो लोगों का शोर सुनकर बहुत ही ज़्यादा खुश हुए। उन्हें लगा कि लोग बहुत ज़्यादा उत्साहित हैं

अनिल कपूर के लिए थी भीड़
असल में सारा शोर, सारा उत्साह अनिल कपूर के लिए था जो प्रेम ग्रंथ की स्क्रीनिंग पर पहुंचे थे। अनिल कपूर की फिल्म वो सात दिन, कुछ दिन पहले ही रिलीज़ हुई थी और इस फिल्म के साथ अनिल कपूर रातों रात सुपरस्टार बन चुके थे। लोगों का सारा उत्साह अनिल कपूर के लिए था।

साथियों से मिला धोखा
राजीव कपूर ने 1995 में ज़बरदस्त नाम की एक फिल्म की। फिल्म में राजीव का दोहरा किरदार था। हर किसी ने उन्हें ये फिल्म करने से मना किया लेकिन राजीव को काम करने की ललक थी। उन्होंने फिल्म पूरी की। राजीव खुद को फिल्म के वीडियो में देखकर खुश हुए। उन्होंने ये फिल्म केवल नासिर हुसैन के साथ काम करने के लिए की थी।

पोस्टर पर थे सनी देओल
जब फिल्म का प्रमोशन शुरू हुआ तो पोस्टर पर सनी देओल की बड़ी बड़ी तस्वीरें थीं और इसे सनी देओल की फिल्म कहा जाने लगा। सनी की पिछली फिल्म अर्जुन सुपरहिट हो चुकी थी जिसका फायदा, फिल्म के लिए लिया जा रहा था। ये बात राजीव को नागवार गुज़री और उन्होंने खुद को फिल्म की पब्लिसिटी से दूर कर लिया।

राज कपूर के बेटे को नहीं पहचानते
राजीव कपूर जब अपना डेब्यू करने जा रहे थे तो वो निर्देशक राजीव मेहरा के साथ पोर्ट ब्लेयर में शूट कर रहे थे। कोई भी नहीं जानता था कि वो राज कपूर के बेटे हैं। उनकी शक्ल शम्मी कपूर से मिलती थी तो लोगों को लगता था कि वो शम्मी कपूर के दूर के रिश्तेदार हो सकते हैं। पर कोई भी उन्हें तवज्जो नहीं देता था।

बन गए राजकुमार
जब राजीव ने लोगों को बताया कि वो राज कपूर के बेटे और ऋषि कपूर - रणधीर कपूर के भाई हैं, उसी पल लोगों का रवैया उनके प्रति बदल गया। लोग उन्हें मुफ्त में खाना खिलाते और हर कोई उन्हें फोन पर मुफ्त बात करने की सुविधा प्रदान करता था।

भाईयों के साथ संबंध
सिमी ग्रेवाल के शो पर अपने भाईयों के साथ अपनी बॉन्डिंग पर बात करते हुए राजीव ने बताया - मैं सबसे छोटा था इसलिए सबका प्यार पाता था। लेकिन मैं फुटबॉल था। आपको केवल सबकी बात सुननी पड़ती है और सबका गुस्सा अंत में आपके ऊपर ही उतरता है।

सारे नखरे उठाए हैं
राजीव ने अपने भाईयों के बारे में बात करते हुए कहा कि मुझे कभी किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं होने दी गई है। उन्होंने हमेशा मेरा मज़बूती से साथ दिया है। हमारी परवरिश ऐसी की गई है कि कभी हमारे बीच कोई मनमुटाव नहीं हुआ, कोई लड़ाई झगड़ा नहीं हुआ। मेरे भाई मेरा सबसे बड़ा सहारा रहे हैं।


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