जब कपूर खानदान का ये बेटा बना एक हसीना के प्यार में 'देवदास', बाथटब में बैठकर बहाता रहता था आंसू

Raj Kapoor Childhood Photo: फिल्म 'देवदास' काफी हिट गई थी और इसमें ऐसे प्रेमी की कहानी दिखाई गई थी, जिसके लिए प्यार ही सब कुछ हुआ करता था। लेकिन जब उसके प्यार ने उसका साथ छोड़ दिया तो वह दिन-रात शराब के नशे में डूबा रहता था। लेकिन कुछ ऐसा ही कपूर खानदान के एक बेटे के साथ में देखने को मिला। पहले तो उसका 9 साल पुराना रिश्ता टूट गया और वह भी बुरी तरीके से टूट चुका था। दरअसल हम बात कर रहे हैं पृथ्वीराज कपूर के बेटे राज कपूर की।
राज कपूर ने करियर में कमाया खूब नाम
राज कपूर का जन्म पेशावर में 14 दिसंबर साल 1929 में हुआ। इतना ही नहीं जब राज कपूर का जन्म हुआ तो उनका नाम सृष्टि नाथ कपूर रखा गया। उन्होंने अपनी पढ़ाई देहरादून से लेकर कोलकाता और फिर मुंबई में पूरी की। फिल्म इंडस्ट्री में तो राज कपूर को पृथ्वीराज का सबसे कामयाब बेटा भी माना जाता है। उन्होंने 24 साल की उम्र में फिल्म मेकिंग की दुनिया में कदम रखा और पहली फिल्म 'आग' को निर्देशित किया।
नरगिस और राज कपूर करने लगे थे एक दूसरे से प्यार
साल 1948 में रिलीज हुई फिल्म आग में राज कपूर के साथ में नरगिस लीड किरदार में थी। राज कपूर को नरगिस की खूबसूरती और उनका स्वभाव काफी पसंद आने लगा। बाद में उन्होंने नरगिस के साथ में फिल्म 'बरसात' भी बनाई। फिल्म के दौरान दोनों की नजदीकियां बढ़ने लगी। दोनों की दोस्ती कब प्यार में तब्दील हो गई किसी को पता नहीं चला। हालांकि इस साल 1946 में ही राज कपूर की शादी कृष्णा राज कपूर के साथ हो गई थी।
9 साल पुराना टूटा रिश्ता
एक तरफ तो राज कपूर, नरगिस के प्यार में डूब चुके थे। दूसरी तरफ उनके ऊपर बच्चों और पत्नी की जिम्मेदारी थी। इसके बावजूद राज कपूर तो नरगिस को हमसफ़र बनना चाहते थे। लेकिन पत्नी और बच्चों के चलते उन्हें अपने प्यार को कुर्बान करना पड़ा और 9 साल लंबा रिश्ता उन्हें तोड़ना पड़ा। नरगिस भी समझ चुकी थी कि राज कपूर के साथ उनका कोई भविष्य नहीं है।
राज कपूर को लगा सदमा
नरगिस ने सुनील दत्त के साथ 11 मार्च 1958 में शादी रचा ली। नरगिस की शादी होते ही मानो राज कपूर सदमे में चले गए। वह पूरी तरीके से टूट गए थे और काफी परेशान रहने लगे। राज कपूर की पत्नी कृष्णा राज कपूर भी अपने पति की मानसिक हालत को बहुत ही अच्छे से समझ पा रही थी। खबरों के अनुसार राज कपूर रोग नाश करके घर पहुंचते थे। कई बार तो वह इतना ज्यादा उदास रहते थे कि बाथटब में बैठकर रोते रहते थे।


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