पाकिस्तान में है 104 साल पुरानी भव्य 'कपूर हवेली'- जिसे 1947 के बंटवारे के बाद छोड़ गए थे राज कपूर, PHOTOS

Raj Kapoor's 104 years old ancestral haveli in Pakistan: पाकिस्तान के पेशावर में राज कपूर की पुश्तैनी हवेली को लेकर पिछले कुछ समय से काफी खबरें चल रही हैं। बता दें, हवेली को गिराने के लिए कुछ समय पहले याचिका दर्ज की गई थी, जिसे पेशावर कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
हवेली इतनी जर्जर हो चुकी है कि किसी भी समय खुद धराशायी हो सकती है। पाकिस्तान सरकार का इरादा इसे म्यूजियम बनाने का है लेकिन हवेली के मालिक से सौदा नहीं हो पाया। हवेली के मौजूदा मालिक हाजी मुहम्मद इसरार उसे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में तब्दील करना चाहते हैं। बता दें, कपूर हवेली के नाम से प्रसिद्ध राज कपूर के इस घर को साल 2016 में प्रांतीय सराकर ने राष्ट्रीय विरासत घोषित कर दिया था।
5 करोड़ की हवेली
हवेली की अनुमानित कीमत 5 करोड़ रुपये से अधिक है। इसरार पहले भी हवेली को ध्वस्त करने की कई कोशिशें कर चुके हैं, मगर सरकारी हस्तक्षेप के चलते अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सके। 2018 में ऋषि कपूर ने पाकिस्तान सरकार ने निवेदन किया था कि वो कपूर हवेली को म्यूजियम में बदल दें। सरकार ने अनुरोध स्वीकार कर लिया था, लेकिन फिलहाल ऐसा हो नहीं पाया है। देखरेख नहीं होने के चलते यह हवेली बेहद जर्जर हालत में है।
ऋषि कपूर का था खास जुड़ाव
ऋषि कपूर इस हवेली से काफी जुड़ाव महसूस करते थे। साल 2017 में उन्होंने एक ट्वीट में लिखा था कि, 'मैं 65 साल का हूं और मरने से पहले पेशावर देखना चाहता हूं, मैं चाहता हूं मेरे बच्चे अपनी जड़ें देखें।' पेशावर के किस्सा ख्वानी बाजार में ऋषि कपूर का पुश्तैनी घर है जिसको 'कपूर हवेली' कहा जाता है। बंटवारे से पहले बनी यह हवेली पृथ्वीराज कपूर के पिता और ऋषि कपूर के परदादा दीवान बशेश्वरनाथ कपूर ने 1918-1922 के बीच बनवाई थी।
इसी हवेली में हुआ था राज कपूर का जन्म
इसी हवेली में पृथ्वीराज कपूर के छोटे भाई त्रिलोकी कपूर और बेटे राजकपूर का जन्म हुआ था। साल 1918 में इसे बनाना शुरू किया गया था और 1921 में यह तैयार हो गई। इस हवेली में 40 कमरे हैं और अंदर से भी यह काफी भव्य है। पहले यह हवेली पांच मंजिल की थी। भूकंप के कारण पैदा हुईं दरारों की वजह से इसके ऊपरी तीन मंजिलों को ध्वस्त कर दिया गया।
1947 बंटवारे के बाद हवेली छोड़ आए थे कपूर परिवार
फिलहाल हवेली के मालिक हाजी इसरार शाह हैं। वह कहते हैं कि उनके पिता ने 80 के दशक में यह हवेली खरीदी थी। हालांकि हवेली खाली ही पड़ी रहती है, यहां कोई आता जाता नहीं है। 1947 में बंटवारे के बाद कपूर खानदान हवेली छोड़कर चले आए थे। रणधीर कपूर और ऋषि कपूर को 1990 में अपने पुश्तैनी घर जाने का मौका मिला था। लौटते वक्त वह आंगन की मिट्टी साथ ले गए थे, ताकि अपनी विरासत को याद रख सकें।


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