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    Round Up - 2017 को इन्होंने बनाया खास..असली सुपरस्टार

    By Shweta
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    ऐसा लगता है अभी की ही बात थी। बात कर रहे हैं नया साल जब शुरू हुआ था। और अब एक साल कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। 2017 में बहुत कुछ अच्छा भी हुआ और बहुत कुछ बुरा भी। बात की जाए बॉलीवुड की तो यहां भी एक से बढ़कर एक धमाके पिछले एक साल में देखने को मिले।

    इस साल हमने कई एक से बढ़कर एक फिल्में देखीं। 2017 से लेकर अब तक कई तरह की फिल्में आई। बाहुबली 2 जैसी फिल्म इतिहास बनाने में कामयाब हुई तो वहीं टॉयलेट एक प्रेम कथा और शुभ मंगल सावधान जैसी फिल्मों ने समाज का आखें खोलने का काम किया।

    जाहिर है इन फिल्मों में वो सबकुछ था जो दर्शकों को पसंद आए और फिल्म भी स्पेशल बने।इसका असल क्रेडिट फिल्म के स्टार्स नहीं बल्कि डायरेक्टर्स को जाता है। ये डायरेक्टर के ऊपर निर्भर करता है कि वो कैसे अपनी सोच को फिल्म के जरिए उतार पाते हैं। इस साल कई डायरेक्टर्स ऐसे आए जिन्होंने सबका दिल जीत लिया।

    आगे की स्लाइड पर देखिए उन डायरेक्टर्स की लिस्ट जो इस साल सबसे प्रॉमिसिंग डायरेक्टर्स साबित हुए।

    अद्वैत चंदन-सीक्रेट सुपरस्टार

    अद्वैत चंदन-सीक्रेट सुपरस्टार

    सीक्रेट सुपरस्टार एक टीन एज लड़की के सपनों की कहानी ती जो सिंगर बनना चाहती है। अद्वैत चंदन इस कहानी को बखूबी दर्शकों तक पहुंचाने में कामयाब हुए। इसमें इमोशन, सपने, संघर्ष सबकुछ बहुत ही शानदार तरीके से दिखाया गया।

    अश्विनी अय्यर तिवारी - बरेली की बर्फी

    अश्विनी अय्यर तिवारी - बरेली की बर्फी

    बरेली की बर्फी एक टिपिकल मिडिल क्लास परिवार के इच्छाओं की कहानी है। एक मां जो अपनी बेटी की शादी एक अच्छे लड़के से करना चाहती है। इसके बाद फिल्म को जिस तरह से अश्विनी अय्यर तिवारी ने दिखाने में कामयाब हुई वो कोई और नहीं कर सकता। उन्होंने बखूबी फिल्म को दर्शकों से कनेक्ट करवाया ।

    आर प्रसन्ना - शुभ मंगल सावधान

    आर प्रसन्ना - शुभ मंगल सावधान

    सिल्वर स्क्रीन पर जिस तरह सेइरेक्टाइल डिसफंक्शन को उन्होंने दिखाया है वो काबिल ए तारीफ है। उन्होंने पूरी समस्या को मजाकिया अंदाज में दिखाया। शादी से लेकर सुहागरात औरइरेक्टाइल डिसफंक्शन के बारे में बताना सबकुछ उन्होंने इस तरह से दिखाया जो हर किसी के बस की बात नहीं है।

    रवि उद्यावर - मॉम

    रवि उद्यावर - मॉम

    मॉम जैसी थ्रिलर फिल्म अनुभवी डायरेक्टर ही बना सकते हैं और ये काम रवि उद्यावर से बेहतक और कोई नहीं कर सकता है। उन्होंने पूरे स्क्रीनप्ले को बहुत ही अच्छे से मिलाया और स्टोरी लाइन और सीन एक दूसरे इस तरह कनेक्ट हुए कि दर्शकों को भी फिल्म भा गई।

    एस एस राजामौली - बाहुबली 2

    एस एस राजामौली - बाहुबली 2

    लार्जर देन लाइफ फिल्म बाहुबली 2 को सिर्फ और सिर्फ एस एस राजामौली ही बना सकते हैं।चाहे एक्शन, शॉट्स, कहानी, डायरेक्श, म्यूजिक फिल्म में कुछ भी ऐसा नहीं था जिसके बारे में एक निगेटिव शब्द बोला जाए। एस एस राजामौली के डायरेक्शन को पूरे देश ने सलाम किया।

    साकेत चौधरी - हिंदी मीडियम

    साकेत चौधरी - हिंदी मीडियम

    RTE (Right to Education) जैसा विषय दर्शकों को आसानी से बोर कर सकता है लेकिन साकेत चौधरी ने जिस तरह से हिंदी मीडियम जैसी फिल्म बनाई उसकी जितनी तारीफ की जाए कम होगी। शिक्षक-छात्र का रिश्ता और पैरेंट्स की संघर्ष फिल्म में बखूबी दिखाया गया।

    श्री नारायण सिंह -टॉयलेट एक प्रेम कथा

    श्री नारायण सिंह -टॉयलेट एक प्रेम कथा

    खुले मे शौच हमारे देश की कितनी बड़ी समस्या है इससे हम सभी वाकिफ हैं। श्री नारायण सिंह ने इसे पर्दे पर बखूबी मजाकिया अंदाज में दिखाया जिसके बारे में कोई बात भी नहीं करना चाहता ।उनका डायरेक्शन वाकई लाजवाब था।

    शशांक खेतान - बद्रीनाथ की दुल्हनिया

    शशांक खेतान - बद्रीनाथ की दुल्हनिया

    शशांक खेतान छोटे शहरों की प्रेम कहानी को जिस तरह से दिखाते हैं ये कोई और नहीं कर सकता। वो बिल्कुल यंग डायरेक्टर हैं लेकिन उन्होंने इसमें महारथ हासिल कर ली है।बद्रीनाथ की दुल्हनिया में भी ये दिखा।

    सुरेश त्रिवेणी - तुम्हारी सुलू

    सुरेश त्रिवेणी - तुम्हारी सुलू

    फोन लव को परदे पर दिखाना आसान नहीं होता है। सुरेश त्रिवेणी ने इसे बहुत ही उम्दा तरह से दिखाया। पूरी फिल्म फनी तरीके से दिखाया गया कि कोई भी बस हंसता ही रह जाए।

    English summary
    Promising directors of 2017 have a look.
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