#Superhit: ये हैं 2016 के सबसे दमदार डायलॉग्स
अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी और एंड्रिया तारियांग स्टारर पिंक को रिलीज़ हुए एक हफ्ता हो चुका है और हर किसी ने कहा कि फिल्म सबको देखनी ज़रूरी है। लड़का या लड़की, दिल्ली वाला या मुंबई वाला, मम्मी पापा या पति पत्नी कोई फर्क नहीं पड़ता। फिल्म हर किसी के लिए ज़रूरी है।
अब फिल्म एक बेहद सशक्त उदाहरण है कि आज हमारे समाज में क्या गलत है। हर लड़की को एक ही नज़र से देखा जाता है और हर लड़की का कैरेक्टर, वो नहीं लोग तय करते हैं।

पिंक तीन लड़कियों की कहानी थी जो रॉक शो में तीन लड़कों से मिलती हैं, उनके साथ रात का खाना खाती हैं और फिर कुछ ऐसा होता है कि तीनों लड़कियों को सेक्स वर्कर करार दे दिया जाता है। क्यों, कैसे उसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
तीनों लड़कियां अपनी बेगुनाही के लिए केस लड़ती हैं, जहां अमिताभ बच्चन उनके वकील होते हैं जो ये साबित करते हैं कि सोसाइटी कैसे लड़कियों का कैरेक्टर तय करती है -
फिल्म में एक किरदार दूसरे पक्ष के वकील से कहती है कि हम जिस राज्य से आते हैं, हम पर ये तोहमत लगाना आसान हो जाता है कि हम सेक्स वर्कर हैं।
और अमिताभ बच्चन साफ साफ एंड्रिया का पक्ष रखते हैं -
मुकेश कुमार से नहीं पूछा क्या वो राजस्थान से हैं, सरला प्रेमचंद से नहीं पूछा कि वो हरियाणा से क्यों हैं...एंड्रिया से ये पूछा जा रहा है कि वो नॉर्थ ईस्ट से हैं तो उसके कोई मायने तो होंगे!
किसी भी लड़की को किसी भी लड़के के साथ हंस हंस कर बात नहीं करना चाहिए और उसे छूना नहीं चाहिए क्योंकि लड़का उसे इशारा 'HINT' समझता है। उसकी हंसी को हां समझता है। लड़की का हंसने बोलने वाला स्वभाव
उसके चालू होने का सुबूत बन जाता है।
हां मैं मान लेती हूं हमने पैसे लिए। लेकिन पैसे लेने के बाद मन बदल गया, उसे नहीं करना था सेक्स। उसके बाद भी ये आदमी छूता रहा। क्या कानून की नज़र में ये सही था?
लड़कियों को अकेले नहीं रहना चाहिए। Independent लड़कियां कन्फ्यूज़ कर देती हैं। लड़कियों को हंसकर बात नहीं करनी चाहिए हमेशा सीरियस रहना चाहिए।
किसी भी लड़की को किसी भी लड़के के साथ कहीं भी अकेले नहीं जाना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने पर लोग ये मान लेते हैं कि लड़की 'चाहती' थी आना और उसे छूने का लाइसेंस लड़के को मिल जाता है।
हमारे यहां घड़ी की सुई कैरेक्टर तय करती है। रात को जब लड़कियां सड़क पर अकेले जाती हैं तो गाड़ियां रूक जाती हैं और उनके शीशे नीचे उतरने लगते हैं। दिन में ये महान आईडिया किसी को नहीं सूझता।
जो लड़कियां पार्टी में जाती हैं और खासकर जो शराब पीती हैं उन पर पुश्तैनी हक बन जाता है लड़कों का। आपके घर की लड़कियां नहीं पीतीं वो अच्छी हैं, ये लड़कियां पीती हैं तो खराब हैं। चूंकि ये खराब हैं इनके साथ कुछ भी किया जा सकता है।
जीन्स, टी शर्ट, स्कर्ट लड़कियों को नहीं पहनना चाहिे क्योंकि लड़कों को खतरा हो जाता है। बेचारे उत्तेजित हो जाते हैं और बिना किसी गलती के गलती कर देते हैं। हमें लड़कों को बचाना है, लड़कियों को नहीं।
किसी भी लड़की को किसी भी लड़के के साथ बैठकर शराब नहीं पीनी चाहिए क्योंकि लड़के को लगता है कि शराब पी सकती है तो सोने में भी नहीं कतराएगी। शराब लड़की का खराब कैरेक्टर तय करता है। लड़कों का नहीं, लड़कों के लिए बस ये खराब आदत है।
जब लड़कियां किसी के साथ रात में खाना खाने या शराब पीने जाती हैं तो उनका मन है, इसलिए नहीं कि वो आपके लिए AVAILABLE का साइन बोर्ड नहीं हैं। लेकिन ऐसे पढ़े लिखे अमीर लड़के ये तय कर लेते हैं कि ये अच्छी लड़की नहीं है और इसके साथ कुछ भी करने का हक है।
ना कहा था मैंने सर, लेकिन फिर भी ये मुझे छुए जा रहा था। गुस्सा आ गया मुझे, करना नहीं चाहती थी पर ये छोड़ ही नहीं रहा था। बोतल मारनी पड़ी। दोबारा करेगा ना तो सर पर मारूंगी इसके मैं।
उन्हें लगा कि आप एक लाइसेंस वाली महिला हैं। आपने पहले सेक्स किया है इसलिए एक बार और हो जाएगा तो क्या फर्क पड़ेगा। ये शायद इतना समझदार नहीं है कि समझ पाए कि पहले हुआ, आपकी मर्ज़ी से, बिना किसी दबाव के,
बिना पैसे लिए।
ना सिर्फ एक शब्द नहीं, अपने आप में पूरा वाकया है। इसे किसी तर्क की, किसी स्पष्टीकरण की ज़रूरत नहीं। ना का मतलब ना होता है और मेरी क्लाइंट ने ना कहा था। और लड़कों को समझना चाहिए कि NO means NO, उसे कहने वाली लड़की परिचित हो, गर्लफ्रेंड हो, सेक्स वर्कर हो या आपकी बीवी अगर कोई ना कह रहा है तो आपको रूकना पड़ेगा।


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