फिल्में बंद हुईं तो एक्ट्रेस बनी वैश्या, एड्स ने किया शरीर को खोखला पड़ गए थे कीड़े, परिवार ने भी छोड़ा साथ

फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध बाहर से जितनी खूबसूरत दिखती है, अंदर से उतनी ही खोखली भी हो सकती है। आज हम साउथ सिनेमा की ऐक ऐसी जानी-मानी एक्ट्रेस के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसकी जिंदगी में कभी लाइमलाइट तो थी लेकिन जैसे ही इस लाइमलाइट का साथ छूटा, वो हसीना वैश्या बनने पर भी मजबूर हो गई।
चमक-दमक वाली शुरुआत
साल 1980 में निशा नूर ने फिल्म 'मंगला नायगी' से एंट्री की थी। उनकी खूबसूरती और एक्टिंग देखकर लोगों ने कहा- 'ये लड़की तो बहुत आगे जाएगी।' और ऐसा हुआ भी। कमल हासन और रजनीकांत जैसे बड़े सितारों के साथ उन्होंने स्क्रीन शेयर किया। 80 और 90 के दशक में उनका नाम खूब चला। करीब 17 फिल्मों में काम किया और हर जगह उनकी मौजूदगी नोटिस की गई।
लेकिन किस्मत पलट गई
इंडस्ट्री में कामयाबी मिल रही थी, लेकिन अचानक किस्मत ने ऐसा पलटी मारी कि फिल्में मिलनी बंद हो गईं। चकाचौंध की जिंदगी की आदत पड़ चुकी थी, लेकिन पैसों की तंगी ने उन्हें तोड़ दिया। सारी जमा-पूंजी खत्म हो गई और धीरे-धीरे करियर अंधेरे में डूबने लगा।
मजबूरी ने धकेला गलत राह पर
कहा जाता है कि एक प्रोड्यूसर ने उन्हें सलाह दी- 'फिल्में नहीं मिल रहीं तो इस काम में आ जाओ, पैसा ढेर मिलेगा।' मजबूरी में निशा ने ये रास्ता अपना लिया। और फिर वह वेश्यावृत्ति की दुनिया में फंसती चली गईं। एक बार जब उन्होंने इस दलदल में कदम रखा, तो फिल्म इंडस्ट्री से उनका नाता हमेशा के लिए टूट गया।
परिवार भी बना अजनबी
निशा के पिता के अनुसार, फिल्मों में आने के बाद उन्होंने परिवार से दूरी बना ली थी। बाद में जब वह जिस्मफरोशी के धंधे में गईं, तो घरवालों ने भी उनसे मुंह मोड़ लिया। नतीजा ये हुआ कि एक स्टार एक्ट्रेस धीरे-धीरे गुमनामी के अंधेरे में खो गई।
साल 2007 का चौंकाने वाला मंजर
करीब 12 साल बाद, नागूर (तमिलनाडु) की एक दरगाह के बाहर लोग सन्न रह गए जब उन्होंने एक महिला को बेहद खराब हालत में देखा। कपड़े फटे-पुराने, शरीर कंकाल जैसा और उस पर चींटियां और कीड़े रेंग रहे थे। यह और कोई नहीं, बल्कि वही साउथ की ग्लैमरस एक्ट्रेस निशा नूर थीं।
आखिरी दिनों की दर्दनाक दास्तान
एक NGO ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। वहां निशा ने खुद बताया कि फिल्मों से दूर होने के बाद उन्होंने देह व्यापार किया और इस दौरान उन्हें एड्स जैसी खतरनाक बीमारी हो गई। उनका शरीर इतना कमजोर हो चुका था कि इलाज भी काम नहीं आया और महज कुछ दिनों में ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
सबसे दुखद बात यह रही कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य अंतिम संस्कार के लिए आगे नहीं आया। आखिरकार NGO ने ही उन्हें दफनाया।


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