अलोक नाथ के प्यार में पागल होकर ये हसीना पहुंची मुंबई, बाद में बनी बिन ब्याही मां, दर-दर भटक कर बेटी को पाला!
Neena Gupta love life: नीना गुप्ता का नाम आते ही एक ऐसी एक्ट्रेस की तस्वीर सामने आती है जो बेबाक है, ग्लैमरस है और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीती है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से पढ़ाई करने वाली नीना ने तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने अपनी ऐसी पहचान बनाई कि आज उन्हें बच्चा-बच्चा जानता है।

लेकिन नीना गुप्ता का प्रोफेशनल सफर जितना चर्चित रहा, उनकी पर्सनल लाइफ भी उतनी ही सुर्खियों में रही।
मुंबई आने की वजह बना पहला प्यार
कम ही लोग जानते हैं कि नीना गुप्ता के मुंबई आने के पीछे एक खास वजह थी- उनका पहला सीरियस रिश्ता। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह अपने पहले बॉयफ्रेंड, एक्टर आलोक नाथ, की वजह से मुंबई आई थीं।
आलोक नाथ भी उस समय NSD में पढ़ रहे थे। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें 1982 की ऑस्कर विजेता फिल्म 'Gandhi' में काम करने का मौका मिला। यही वह दौर था जब दोनों एक-दूसरे के करीब आए। बाद में दोनों ने मशहूर टीवी धारावाहिक 'बुनियाद' में साथ काम किया, जिसे रमेश सिप्पी और ज्योति स्वरूप ने डायरेक्ट किया था। शो में आलोक नाथ 'मास्टर हवेलीराम' बने थे, जबकि नीना गुप्ता उनकी बहू 'रज्जो' के किरदार में नजर आई थीं।
क्यों नहीं पहुंचा रिश्ता शादी तक?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों अपने शुरुआती करियर के दौरान रिश्ते में थे। हालांकि यह रिश्ता शादी तक नहीं पहुंच पाया। अलग-अलग इंटरव्यू में इशारा किया गया है कि पारिवारिक की असहमति इसकी एक वजह रही। बाद में आलोक नाथ ने 1987 में आशु सिंह से शादी कर ली।
नीना गुप्ता ने भी जिंदगी में आगे बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने कभी अपने अतीत को छुपाने की कोशिश नहीं की, बल्कि खुले तौर पर स्वीकार किया कि जिंदगी में फैसले लेना आसान नहीं होता।
फिर जुड़ा विवियन रिचर्ड्स के साथ नाम
आलोक नाथ से अलग होने के बाद नीना गुप्ता की जिंदगी में एक नया अध्याय शुरू हुआ। उनका नाम वेस्ट इंडीज के दिग्गज क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स के साथ जुड़ा। यह रिश्ता उस दौर में काफी चर्चा में रहा। इस रिश्ते से उनकी बेटी मसाबा गुप्ता का जन्म हुआ। हालांकि नीना और विवियन की शादी नहीं हुई, लेकिन नीना ने सिंगल मदर बनने का फैसला लिया, वह भी ऐसे समय में जब फिल्म इंडस्ट्री में यह कदम नॉर्मल नहीं माना जाता था।
सिंगल मदर बनकर तोड़ीं रूढ़ियां
90 के दशक में एक अविवाहित मां के रूप में बेटी की परवरिश करना आसान नहीं था। समाज की बातें, इंडस्ट्री का दबाव और करियर की चुनौतियां- इन सबके बीच नीना गुप्ता ने मजबूती से अपनी जिम्मेदारी निभाई। आज मसाबा गुप्ता एक सफल फैशन डिजाइनर हैं और अपनी अलग पहचान रखती हैं।
नीना अक्सर कहती हैं कि उन्होंने अपनी जिंदगी में जो भी फैसले लिए, उनकी जिम्मेदारी भी खुद ही उठाई। यही बात उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।
करियर में दूसरा सुनहरा दौर
निजी जिंदगी की चर्चाओं के बीच नीना गुप्ता ने अपने करियर को भी नई ऊंचाई दी। 1994 में 'वो छोकरी' के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला। 1999 में उन्होंने टीवी शो 'सांस' लिखा, डायरेक्ट किया और उसमें काम भी किया।
साल 2018 में आई फिल्म 'बधाई हो' ने उनके करियर को नया मोड़ दिया। एक मध्यमवर्गीय महिला की भूमिका में, जो अधेड़ उम्र में प्रेग्नेंट होती है, उन्होंने समाज की सोच को चुनौती दी। इस भूमिका के लिए उन्हें फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड भी मिला।
नीना गुप्ता की कहानी सिर्फ अफेयर या रिश्तों की नहीं है, बल्कि उन फैसलों की है जिन्होंने उन्हें मजबूत बनाया। चाहे मुंबई आने का फैसला हो, रिश्ते टूटने के बाद आगे बढ़ना हो या सिंगल मदर बनकर बेटी को पालना- उन्होंने हर मोड़ पर अपनी राह खुद चुनी।


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