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2017 के सुपर 'एक्टर', बैक टू बैक हिट्स - राष्ट्रीय पुरस्कार किया अपने नाम!

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बीते साल जब दिये इंटरव्यू में अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने साफ तौर पर मुझे कहा था- हां, मैं अंडर रेटेड एक्टरों की सूची में शामिल हूं। लेकिन मुझे मलाल नहीं, अंडर रेटेड होना अच्छी बात है.. ओवर रेटेड नहीं होना चाहिए। लोग आज भी मुझे मेरी फिल्मों की वजह से जानते हैं, नाम की वजह से नहीं। बहरहाल, कहना गलत नहीं होगा कि 2017 से 2018 तक का सफर इस दमदार अभिनेता के लिए काफी बदल चुका है। 

पंकज त्रिपाठी को बेहतरीन अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार 2018 में स्पेशल अवार्ड से नवाजा गया है। उन्हें फिल्म 'न्यूटन' के लिए यह अवार्ड दिया गया। इस उपलब्धि उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि बतौर एक्टर अब मेरी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। 

Pankaj Tripathi

बॉलीवुड के कुछ कलाकार ऐसे हैं, जिनकी पहचान उनके किरदार होते हैं। पंकज त्रिपाठी उन्हीं कलाकारों में शुमार हैं। गैंग्स ऑफ वसेपुर के सुल्तान हों या नील बट्टे सन्नाटा के प्रिसिंपल श्रीवास्तव.. मसान के सत्या जी या न्यूटन के आत्मा सिंह। पंकज त्रिपाठी ने बॉलीवुड को अब तक कई यादगार किरदार दिये हैं।

बरेली की बर्फी

बरेली की बर्फी

आयुष्मान, राजकुमार राव के बीच बरेली की बर्फी में पंकज त्रिपाठी ने नरोत्तम मिश्रा बनकर जो कमाल दिखाया था, वह काफी कम अभिनेता दिखा पाते हैं। सालों बाद किसी फिल्म में बेटी के पिता को इतने लगाव के साथ दिखाया गया था।

न्यूटन

न्यूटन

आत्मा सिंह के किरदार में पंकज त्रिपाठी बेस्ट रहे। थोड़ी हीरोगिरी, थोड़े विलेन बनने के बीच आत्मा सिंह ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली।

गुड़गांव

गुड़गांव

शायद काफी लोगों ने यह फिल्म नहीं देखी होगी। इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी ने केहरी सिंह के किरदार में गजब की एक्टिंग की है। वह परिवार के मुखिया हैं और सच कहा जाए तो फिल्म में कई जगह उन्हें देखकर भय लगता है।

अनारकली ऑफ आरा

अनारकली ऑफ आरा

स्वरा भास्कर के साथ इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी का अलग ही अंदाज दर्शकों के सामने आया था। अठरंगी किरदार रंगीला बनकर उन्होंने फिल्म में जान डाल दी थी।

धीरे धीरे बनाया रास्ता

धीरे धीरे बनाया रास्ता

पंकज त्रिपाठी ने साल 2004 में बॉलीवुड में अपनी शुरुआत की फिल्म रन से। लेकिन उन्हें अपना नाम बनाने में 6, 7 साल का लंबा वक्त लगा। गैंग्स ऑफ वसेपुर में सुल्तान के किरदार से उन्हें बड़ी पहचान मिली।

सर्पोटिंग कास्ट ही अहम है

सर्पोटिंग कास्ट ही अहम है

सर्पोटिंग किरदार निभाने की बात पर पंकज त्रिपाठी कहते हैं-

पहले की फिल्में हो या आजकल की.. हमेशा हीरो- हीरोइन केंद्रीत होती है। लेकिन अब उनके साथ साथ फिल्म की सर्पोटिंग कास्ट को भी काफी अहमियत दी जाती है। सर्पोटिंग कास्ट का मजबूत होना, जरूरी है। कहा जाता है कि शुक्रवार, शनिवार, रविवार.. स्टार की ताकत होती है। लेकिन उसके बाद फिल्म की ताकत होती है.. और फिल्म को ताकतवर बनाने के लिए सर्पोटिंग कास्ट का अच्छा होना बेहद जरूरी है।

नई ऊंचाई पर पहुंचे

नई ऊंचाई पर पहुंचे

नील बट्टे सन्नाटा के बाद पंकज त्रिपाठी के लिए फिल्मों में अहम किरदारों के दरवाजे खुलने लगे.. और उन्होंने बड़ी ही कुशलता से इन किरदारों को यादगार बनाया। यही वजह है कि 2018 और आने वाले दो तीन सालों में हम उन्होंने और भी कई बेहतरीन फिल्मों में देखने वाले हैं।

फिल्मों के चुनाव पर अभिनेता कहते हैं- फिल्म की कहानी पर तो ध्यान देता ही हूं, लेकिन यह भी मायने रखता है कि मेरा किरदार कैसा है। कुछ सालों पहले तक जो फिल्में मिलती थी, मैं साइन कर लेता था। अब मैं चुनाव करने की स्थिति में हूं। मैं वैसी फिल्में कभी नहीं करूंगा, जो मुझे बतौर कलाकार संतुष्ट ना करे। 

English summary
Actor Pankaj Tripathi won a Special Mention for his performance in Newton, at the 65th National Film Awards on Friday. Know his popular performances till date.

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