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राज कपूर ने लिया था खय्याम साहब का टेस्ट, देखिए 10 बेस्ट गाने

By Staff
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मशहूर संगीतकार, खय्याम साहब का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। खय्याम साहब फेफड़ों की बीमारी से लड़ रहे थे और हृदय गति रूकने से उनका निधन हो गया। उनके जाने से पूरा बॉलीवुड और संगीत जगत स्तब्ध है। लेकिन खय्याम साहब के फैन्स उन्हें आज भी उनके गीतों के ज़रिए याद कर रहे हैं। उनके गीतों में वो जादू था कि वो हमेशा के लिए सबके ज़ेहन में अपने गीतों के ज़रिए ही सही अपनी जगह पुख्ता कर चुके हैं।

खय्याम साहब का बॉलीवुड में आना इतना आसान नहीं था। उन्होंने शर्माजी के नाम से वर्माजी के साथ जोड़ी बनाकर संगीत देना शुरू किया था। उनकी पहली फिल्म थी फुटपाथ जो 1948 में आई लेकिन उन्हें पहचान मिली राजकपूर की फिल्म से। राजकपूर ने खय्याम साहब को फिल्म का संगीत सौंपने से पहले उनका टेस्ट लिया और अपने सामने तानपूरा के तार मिलाने को कहा। तब जाकर खय्याम को ये फिल्म मिली थी। देखिए उनके बेस्ट गाने -

राज कपूर से शुरूआत

राज कपूर से शुरूआत

खय्याम साहब की सफलता की शुरूआत हुई राजकपूर की फिल्म फिर सुबह होगी के साथ । 1958 में आई इस फिल्म के लिए राजकपूर को खय्याम साहब का नाम सुझाया था साहिर लुधियानवी ने। फिल्म का गाना वो सुबह कभी तो आएगी, फैन्स को आज तक याद है।

शगुन

शगुन

इसके बाद 1965 में आई कमलजीत और वहीदा रहमान स्टारर शगुन। इस फिल्म का गाना पर्वतों के पेड़ों पर काफी फेमस हुआ था।

कभी किसी को मुकम्मल

कभी किसी को मुकम्मल

कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता - निदा फाज़ली की इस खूबसूरत शायरी को संगीत में ढाला गया था 1981 की फिल्म आहिस्ता आहिस्ता में।

कभी कभी

कभी कभी

यश चोपड़ा के साथ खय्याम साहब को कॉमर्शियल सफलता मिली। कभी कभी के लिए यश चोपड़ा ने उन्हें लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के ऊपर वरीयता दी, साहिर लुधियानवी के कहने पर। फिल्म का गाना कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है अच्छा खासा फेमस हुआ।

अवार्ड्स की बौछार

अवार्ड्स की बौछार

यश चोपड़ा ने इस फिल्म के एलबम की सफलता के लिए खय्याम साहब से प्रार्थना करने को कहा और फिल्म ब्लॉकबस्टर हो गई। इसका गाना मैं पल दो पल का शायर हूं भी चार्टबस्टर था।

चलती रही सफलता

चलती रही सफलता

इसके बाद खय्याम साहब को यश चोपड़ा ने अपनी अगली फिल्म त्रिशूल में भी मौका दिया। फिल्म का गाना मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है, सुपरहिट था।

ऊंचाई

ऊंचाई

खय्याम साहब के करियर की ऊंचाई आई उमराव जान के साथ। रेखा की अदाएं, खय्याम का संगीत और मुज़फ्फर अली का डायरेक्शन इस फिल्म को सुपरहिट बनाने के लिए काफी था। ऊपर से आशा भोंसले की आवाज़ का जादू इन आंखों की मस्ती में लोगों के सर चढ़कर बोला।

दिल चीज़ क्या है

दिल चीज़ क्या है

फिल्म का एक और गाना, दिल चीज़ क्या है, चार्टबस्टर हुआ। हालांकि इस फिल्म के लिए पहली पसंद थे जयदेव लेकिन वो फिल्म की बारीकी को पकड़ ही नहीं पा रहे थे और ये मौका खय्याम साहब को मिला।

बाज़ार

बाज़ार

खय्याम साहब के साथ हर भारी शायर काम करना चाहता था। उनके संगीत में वो जादू था। बाज़ार का गाना दिखाई दिए या बेखुद किया आज भी लोगों के दिल के तार छेड़ देता है।

फिर छिड़ी रात

फिर छिड़ी रात

इस फिल्म से खय्याम साहब ने लता मंगेशकर का एक अलग ही रूप लोगों के सामने पेश करने की कोशिश की थी। फिर छिड़ी बात, आज भी संगीत प्रेमियों के गुनगुनाने में सुनाई दे जाता है।

खय्याम साहब की साथी और असिस्टेंट थीं उनकी पत्नी जगजीत कौर, जिन्होंने खय्याम साहब से साथ एक गाना भी गाया। शगुन नाम की फिल्म में इस गाने का नाम था - तुम अपना रंजो गम। 1964 की इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी कमलजीत और वहीदा रहमान ने।

खय्याम साहब के पास अवार्ड्स का ढेर था। उन्हें अपनी फिल्म उमराव जान के लिए 1982 में बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्टर का अवार्ड मिला था। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी नवाज़ा है।

English summary
Music director Khayyam passes away at 92, Best songs of the legend.
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