Mukesh Birth Anniversary: क्लर्क से मशहूर सिंगर बनने तक का सफर नहीं था आसान, एक फैसले ने बदल दी जिंदगी !

mukesh birth anniversary

Mukesh Birth Anniversary: हिंदी सिनेमा जगत के जाने माने सिंगर मुकेश अपने जमाने के एक ऐसे कलाकार थे जिनके दीवाने दुनिया भर में मिल जाते थे। आज मुकेश की 100वीं बर्थ एनिवर्सरी है, ऐसे में हम आपको सिंगर के बारें में बताएंगे कुछ दिलचस्प किस्से।

मशहूर सिंगर मुकेश-

मुकेश अपने जमाने के मशहूर सिंगर हुआ करते थे। किशोर कुमार और मोहम्मद रफी के बाद एक मुकेश ही थे, जो 40 से 70 दशक के बीच टॉप 3 सिंगर्स में से एक थे। जिस अंदाज में वो गाते थे, उनकी एक-एक धुन में लोग खो जाते थे।

22 जुलाई 1923 को जन्मे मुकेश का पूरा नाम मुकेश चंद्र माथुर था। उनके पिता लाला जोरावर चंद्र माथुर एक इंजीनियर थे और मां का नाम चांद रानी था। 10 भाई-बहनों में मुकेश छठे नंबर पर थे। मुकेश को बचपन से ही गाने का शौक था। उनके घर पर एक म्यूजिक टीचर आया करते थे, जो उनकी बहन सुंदर प्यारी को संगीत सिखाते थे।

उस वक्त मुकेश छुप-छुपकर टीचर की बातें सुना करते थे और इस तरह उन्होंने संगीत से जुड़ी तालीम हासिल कर ली। जैसे-जैसे मुकेश बड़े हुए, वह केएल सहगल के गानों में खो गए। वह सहगल के गानों को दिनभर गुनगुनाते रहते थे।

मुकेश की किस्मत-

पर कहते हैं ना कि कभी कभी किस्मत में कुछ और ही लिखा होता है वहीं मुकेश के साथ हुआ, 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुकेश ने दिल्ली के लोक निर्माण विभाग में काम करना भी शुरू कर दिया था। हालांकि, इस बीच वह समय निकालकर संगीत की प्रैक्टिस करते थे और बारीकियों पर काम करते थे।

एक बार मुकेश अपनी बहन की शादी में रंग जमाने के लिए अपने फेवरेट सिंगर सहगल जी का गाना गा रहे थे। तभी उनके दूर के रिश्तेदार मोतीलाल की नजर मुकेश पर पड़ी और वह तुरंत उनके गाने के दीवाने हो गए। अगले दिन वह उनके घर पहुंच गए और उनके पिता से मुकेश को मुंबई ले जाने की बात कहने लगे।

मुकेश ने एक बार बताया था कि जब मोतीलाल उनके घर पर आए तो पहली बार में तो उनके पिता नहीं माने, क्योंकि वह उन्हें क्लर्क बनाना चाहते थे। हालांकि, जब दोबारा एक फिल्म के लिए बातचीत हुई तो उन्होंने सोचा कि उनके बेटे में कुछ तो बात होगी, तभी बार-बार उन्हें बुलाया जा रहा है और फिर उन्होंने अपने बेटे को फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाने की इजाजत दे दी।

इसके बाद क्या मुकेश की पहली फिल्म 'निर्दोष' थी, जिसमें एक्टर ने एक्टिंग के साथ-साथ गाना भी गाया था, परंतु फिल्म फ्लॉप हो गई। बतौर एक्टर जब उनका करियर नहीं चला तो उन्होंने गुजारा करने के लिए छोटा-मोटा काम करना शुरू कर दिया था। कभी शेयर ब्रोकर बन गए तो कभी ड्राई फ्रूट्स बेचने लगे।

इंडस्ट्री के महान सिंगर मुकेश-

'निर्दोष' के फ्लॉप होने के बाद मुकेश ने सालों मेहनत की और फिर 1945 में आई फिल्म 'पहली नजर' से उनकी किस्मत चमकी। उन्होंने इसी फिल्म से बतौर प्लेबैक सिंगर हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया। इस फिल्म में उनका गाना 'दिल जलता है तो जलने दो' सदाबहार गाना बन गया।

बड़े-बड़े सिंगर्स मुकेश के गानों की तारीफ करते नहीं थक रहे थे। मुकेश की आवाज में एक दर्द था, जो सुनने वालों को उस गाने की एक-एक लाइन में गुम कर देता था। मुकेश को सैड सॉन्ग गाने का शौक था और इसी ने उन्हें पहचान भी दिलाई।

और एक वक्त पर मुकेश सिनेमा जगत के बड़े और बेहतरीन सिंगर बन गए कि आज भी उनको याद किया जाता है। गौरतलब है कि मुकेश तो आज दुनियां में नहीं रहे हैं परुंतु उनके गाने आज भी लोगों के दिलों में खास जगत रखते हैं। बता दे मुकेश के बेटे नितिन मुकेश हमेशा अपने पिता को याद करते हैं। मुकेश के बेटे नितिन मुकेश हैं और पोते बॉलीवुड एक्टर नील नितिन मुकेश हैं।

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