5 मिनट 28 सेकंड का वो गाना... हरे लहंगे में माधुरी के ठुमके हिट, लेकिन लिरिक्स ने किया रेप को ग्लोरिफाई?
Bollywood controversial song: 90 का दौर बॉलीवुड के लिए बेहद खास माना जाता है। उस समय के गाने आज भी शादियों और पार्टियों की जान हैं। लेकिन जैसे-जैसे समाज की सोच बदली है, वैसे-वैसे पुराने गानों के बोलों को लेकर नई बहस भी शुरू हुई है। जो बातें उस समय नॉर्मल बात मानी जाती थीं, आज उन्हें अलग नजर से देखा जा रहा है।

'चने के खेत में' सुनकर ठनका लोगों का दिमाग
फिल्म अंजाम (1994) का गाना 'जोरा-जोरी चने के खेत में' अपने समय का बड़ा हिट था। माधुरी दीक्षित का डांस, हरे रंग का लहंगा और सरोज खान की कोरियोग्राफी ने इसे आइकॉनिक बना दिया। गाना आज भी 90s की प्लेलिस्ट में शामिल रहता है।
बोलों पर उठते सवाल
हालांकि, अब इस गाने के कुछ बोलों पर सवाल उठाए जाते हैं। गाने में ऐसी लाइनें हैं जहां लड़की खुद को घिरा हुआ और अनकंफर्टेबल बताती है, जैसे 'पहले तो जुल्मी ने पकड़ी कलाई' और 'मेरे आगे पीछे शिकारियों के घेरे।' लेकिन इन शब्दों को जिस अंदाज में फिल्माया गया, वह मस्ती और एक्साइटमेंट से भरा हुआ लगा। लेकिन सालों बाद इस गाने के लिरिक्स आज के दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
आइए एक नजर इस गाने के विवादित लिरिक्स पर डालते हैं-
'पहले तो जुल्मी ने पकड़ी कलाई...'
'मेरे आगे पीछे शिकारियों के घेरे...'
'जवानी के लुटेरे...'
'क्या-क्या हुआ मेरे साथ रे...'
'जोरा-जोरी चने के खेत में...'
अब सोचिए... लड़की कह रही है कि वो घिरी हुई है, असहाय है, लेकिन स्क्रीन पर सब कुछ मस्ती, डांस और जोश में दिखाया जा रहा है। यही चीज आज लोगों को खटकती है। इसलिए इस गाने को माना गया कि ये रेप की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है और इस गाने में रेप को ग्लोरिफाई करके दिखाया गया है।
उस समय क्यों नहीं हुआ विरोध?
90 के दशक में फिल्मों में छेड़छाड़ या जोरा-जोरी को अक्सर रोमांटिक अंदाज में दिखाया जाता था। 'ना' को नखरा समझना और पीछा करने को प्यार जताने का तरीका मानना आम सिनेमाई फॉर्मूला था। दर्शक इसे मनोरंजन के तौर पर एक्सेप्ट कर लेते थे और बोलों पर ज्यादा चर्चा नहीं होती थी।
माधुरी दीक्षित का रिएक्शन
माधुरी दीक्षित ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआत में उन्हें यह गाना खास पसंद नहीं आया था। लेकिन बाद में जब इसका फाइनल रूप सामने आया, तो उन्हें लगा कि इस पर अच्छा काम किया जा सकता है। रिलीज के बाद यह गाना जबरदस्त हिट साबित हुआ।
बदलते समय के साथ नई बहस
आज सोशल मीडिया के दौर में पुराने गाने फिर से वायरल होते हैं और उनके बोलों पर खुलकर चर्चा होती है। दर्शकों की सेंसिटिविटी बढ़ी है और अब कंटेंट को ज्यादा सीरियस होकर परखा जाता है। 'चने के खेत में' जैसे गाने 90 के दशक की यादों का हिस्सा हैं, लेकिन बदलती सोच के साथ उन्हें नए नजरिए से देखा जाना भी अब नॉर्मल है।


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