पापा ने बर्बाद की जिंदगी, काजोल का पहला हीरो जिसका पिता ने उजाड़ा घर, मां-बहन को मारी गोली और...

90 के दशक के बहुत से सितारे आज भी पर्दे पर छाए हुए हैं, लेकिन बहुत से ऐसे सितारे हैं जो कहीं गुम हो गए हैं. उनकी पहली फिल्म से लेकर अब तक की फिल्मों के गाने और किरदारों के फैंस आज भी कायम है. लेकिन नब्बे के दशक का एक ऐसा सितारा जिन्होंने बिल्कुल नई अभिनेत्री के साथ फिल्म में डेब्यू किया और वह अभिनेत्री तो सुपर-डुपर स्टार बन गई, लेकिन अभिनेता कुछ ही फिल्मों के बाद गायब हो गए. कौन है यह फिल्मी सितारा जिसका चमकता सितारा उसके अपने ही पिता की वजह से डूब गया था.
1992 में रिलीज हुई फिल्म 'बेखुदी' याद है, जिस फ़िल्म से काजोल ने फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री ली थी. इस फिल्म का हीरो आपको याद है. जी हां हम बात कर रहे हैं कमल सदाना की. कमल की भी यह पहली फिल्म थी. फिल्म पर्दे पर फ्लॉप रहीं, लेकिन दोनों कलाकारों को इससे अलग जिंदगी मिली. एक तरफ काजोल को इंडस्ट्री में हाथों-हाथ लिया गया तो दूसरी ओर कमल पीछे रह गए. उन्होंने 'बेखुदी' के अलावा 'रंग' और 'प्यार ही प्यार' जैसी फिल्में की, लेकिन वह हिट हीरो नहीं बन पाए.
21 अक्टूबर 1970 को जन्मे कमल सदाना अपने जन्मदिन को शायद हंसी-खुशी जीवन में अब नहीं मना पाते होंगे. उनके जीवन का 20 वां जन्मदिन इतना खौफनाक था जिसको भूल पाना शायद उनके लिए मुश्किल होगा. 21 अक्टूबर 1990 के दिन अभिनेता जन्मदिन की तैयारी में थे, लेकिन तभी गोलियों की आवाजों ने हैरान कर दिया.
कमल दौड़कर उस कमरे की तरफ गए तो देखा कि पापा ब्रिज सदाना उनकी मां सईदा खान और बहन नम्रता पर ताबड़तोड़ गोलियां चला रहे हैं, बंदूक से निकली गोली ने उनकी मां और बहन की जान ले ली थी. पिता ने कमल को देखा तो उन्हे भी मौत के घाट उतारना चाहा, लेकिन कहते हैं ना जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई, पिता ने उन पर भी गोली चलाई, लेकिन गोली उनकी गर्दन को छूकर निकल गई और वह बाल-बाल बच गए. सब पर गोली चलाने के बाद पिता ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी.
कमल के पिता ब्रिज बॉलीवुड के जाने-माने डायरेक्टर और प्रोड्यूसर थे. उन्होंने 'दो भाई', 'यह रात फिर ना आयेगी', 'उस्तादों के उस्ताद', 'विक्टोरिया नंबर 203', 'प्रोफेसर प्यारेलाल' जैसी फिल्मों ने काम किया था.
परिवार के जाने के बाद कमल ने किसी तरह खुद को संभाला और बॉलीवुड में कदम रखा. पिता क्योंकि डायरेक्टर और प्रोड्यूसर थे, इसलिए फिल्म भी मिल गई. पहली फिल्म बेखुदी से डेब्यू किया, जो पर्दे पर कमाल नहीं कर पाई. लेकिन इस फिल्म से काजोल नोटिस हो गई. फिर साल 1993 में दिव्या भारती के साथ उनकी फिल्म रंगा आई. जिसको जबरदस्त सक्सेस मिली, लेकिन इस फिल्म के बाद कमल का बॉलीवुड करियर उस मुकाम तक नहीं पहुंचा जिसकी उम्मीद थी. परेशान होकर कमल ने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया.
फिल्मों से किनारा कर कमल सदाना ने टीवी की तरफ रुख किया और सीरियल 'कसम से' में काम किया. उन्होंने डायरेक्शन में भी हाथ आजमाया साल 2007 में उन्होंने एक फिल्म 'कर्कश' बनाई, इसके अलावा उन्होंने साल 2014 में रोर्स: द टाइगर ऑफ सुंदरबस लिखी और उसका डायरेक्शन भी किया लेकिन ये भी फ्लॉप साबित हुई.


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