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    कहानी की Band: न सलमान होते.. न होती 'प्रेम रतन धन पायो'!

    By Neeti
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    [कहानी की बैंड] सलमान खान की ताजा रिलीज फिल्म 'प्रेम रतन धन पायो' ब्लॉकबस्टर साबित हो चुकी है। सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनी इस फिल्म को समीक्षकों का तो नहीं, लेकिन दर्शकों का खूब प्यार मिला। बॉक्स ऑफिस पर तो फिल्म ने धमाल ही कर दिया।

    लेकिन क्या आपको पता है कि सलमान- सोनम कपूर की शानदार जोड़ी वाली इस फिल्म के लिए सोनम कपूर पहली च्वॉइस नहीं थीं। जी हां, सोनम कपूर से पहले सूरज बड़जात्या ने दीपिका पादुकोण से भी इस किरदार के लिए संपर्क किया था। खैर, ब्लॉकबस्टर फिल्म आखिरकार सोनम के हाथों में आई।

    वहीं, इस फिल्म के लिए सूरज बड़जात्या ने सालों सलमान खान का इंतजार किया। सूरज बिना 'प्रेम' के यह फिल्म नहीं बनाना चाहते थे। लेकिन सोचिए यदि इस फिल्म सलमान खान की जगह कोई और एक्टर होता तो.. तो शायद फिल्म फ्लॉप हो जाती.. पहले दिन ही।

    बहरहाल, क्या आपने सोचा है यदि प्रेम रतन धन पायो भी टिपिकल सूरज बड़जात्या फिल्म होती तो कैसी होती.. नहीं न..तो फिर यहां पढ़िए कि ऐसा होता तो कैसी होती 'प्रेम रतन धन पायो'?

    तो बेहतर होती फिल्म

    तो बेहतर होती फिल्म

    सबसे पहली बात.. जैसा कि हमने आपको बताया कि फिल्म के लिए पहले दीपिका से संपर्क किया गया था। कोई शक नहीं कि यदि फिल्म में सोनम की जगह राजकुमारी मैथिली दीपिका होतीं तो फिल्म कई गुणा ज्यादा बेहतर होती।

    राजकुमारी- प्रेम की हो जाती मुलाकात

    राजकुमारी- प्रेम की हो जाती मुलाकात

    फिल्म में प्रेम दिलवाले राजकुमारी से मिलने के लिए परेशान रहता है,लेकिन कभी मिल नहीं पाता। तब तक इधर युवराज विजय सिंह (प्रेम का हमशक्ल) की एक्सीडेंट हो जाती है और दिवान साहब (अनुपम खेर) प्रेम को विजय बनाकर महल ले आते हैं। लेकिन सोचिए यदि राजकुमारी मैथिली और प्रेम की पहले ही मुलाकात हो जाती तो.. तो मैथिली एक मिनट में सारा गड़बड़ घोटाला समझ जाती।

    मर जाते विजय सिंह

    मर जाते विजय सिंह

    युवराज विजय सिंह एक बहुत ऊंची घाटी से नीचे गिर जाते हैं.. लेकिन फिर भी उनकी जान बच जाती है और फिल्म के क्लाईमैक्स में विजय सिंह वापस आते हैं। लेकिन सोचिए जैसा कि आम तौर पर आम इंसानों के साथ होता है.. यदि ऊंची घाटी से गिरने के बाद विजय मर जाते तो.. तो बज जाती फिल्म के कहानी की बैंड।

    टिपिकल सूरज बड़जात्या..

    टिपिकल सूरज बड़जात्या..

    सोचिए यदि यह फिल्म सूरज बड़जात्या के बाकी फिल्मों की तरह होती तो.. तो यहां होता एक हंसता खेलता परिवार.. हंसते खेलते नौकर.. कोई एक जानवर.. परिवार में एक ड्रामा सीक्वेंस.. छोटी सी लव- स्टोरी.. और 'प्रेम'.. जी हां, इस फिल्म में हमने प्रेम के होते हुए भी पुराने प्रेम को मिस किया।

    भागने की कोशिश क्यों नहीं!

    भागने की कोशिश क्यों नहीं!

    विजय सिंह को उनके सौतेले भाई 4 दिनों से बंदी बनाकर शीश महल में रखते हैं। लेकिन जिस दिन प्रेम शीश महल में पहुंचता है उसी दिन विजय सिंह पैर पटक- पटककर अपना गुस्सा निकालते हैं और शीश महल टूट टूट कर गिरने लगता है। हमारा कहना है कि यदि 4 दिनों से विजय सिंह इतनी मेहनत कर रहे होते तो कब का भाग चुके होते। पता नहीं उन्होंने इतना इंतजार क्यों किया?

     बदल जाता प्रेम का मन!

    बदल जाता प्रेम का मन!

    प्रेम.. जो कल तक एक आम इंसान था। अचानक उसे उठाकर राजगद्दी पर बैठा दिया जाता है। यहां तक की प्रेम के पास इतना अधिकार भी होता है कि वह महल और प्रॉपर्टी बहनों के नाम करने लगता है। लेकिन सोचिए यदि कहानी में ट्विस्ट आता.. और प्रेम का मन बदल जाता तो.. अरबों की जायदाद और प्यार में फंसी राजकुमारी..

    शीशमहल क्यों ?

    शीशमहल क्यों ?

    पता नहीं, सूरज बड़जात्या ने शीश महल पर इतने पैसे क्यों लगाए। क्योंकि शीश महल ने कहीं भी फिल्म को न ही खूबसूरती दी.. न ही वह कहानी की मांग थी। यदि शीशमहल की जगह निर्देशक क्लाईमैक्स सीन कहीं भी फिल्माते, तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता।

    प्रेम रतन धन पायो

    प्रेम रतन धन पायो

    यहां पढ़ें-

    ALERT: 'प्रेम रतन धन पायो' ब्लॉकबस्टर.. उड़ गई इन सितारों की नींद!

    English summary
    Salman Khan's film Prem Ratan Dhan Payo is realeased and became superhit. Read here Kahani ki Band of the film.
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