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    कहानी की Band: पीके, कम से कम सुशांत की कॉस्ट्यूम तो चेंज कर देते

    By Neeti
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    [नीति सुधा] आपने पीके देखी क्या? आमिर खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'पीके' रिलीज हो गई है। फिल्म को सिर्फ दर्शकों का ही नहीं, बल्कि समीक्षकों का भी प्यार मिल रहा है। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के मामले में थोड़ी पीछे है, लेकिन दर्शकों को लुभाने में सफल रही है। आमिर खान की शानदार अभिनय ने फिल्म में जान डाल दी है। धर्म और जात-पात के नाम पर हम जो मूर्खतापूर्ण भेदभाव करते हैं उन्हें 'पीके' चैलेंज करती है।

    पढ़ें: परेश रावल ने कहा तो नहीं, आमिर ने कहा तो Pk 'सुपरहिट'

    हालांकि, फिल्म अभिनय के मामले में बेहतरीन होते हुए भी कहीं न कहीं एक कमी छोड़ती है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अपनी हर फिल्म में सोशल मैसेज देने वाले राजकुमार हिरानी ने कोशिश अच्छी की है, लेकिन इस बार उनका मैसेज दर्शक के दिलों तक नहीं पहुंच पाया। फिल्म में कई जगह लॉजिक को पीछे छोड़ दिया गया, जिसकी उम्मीद हमें कम से कम आमिर और राजकुमार हिरानी की फिल्मों से नहीं थी। क्या आपने सोचा है कि फिल्म का नाम 'पीके' ही क्यों..जबकि फिल्म का नाम पीके, डीके, राम, श्याम, कुछ भी होता, कोई फर्क नहीं पड़ता।

    बहरहाल, यहां हम आपको बताने जा रहे हैं 'पीके' की 8 ऐसी बातें जो आपको करेगी निराश और जिसने बजाई कहानी की बैंड:

    Pk क्यों था?

    Pk क्यों था?

    फ़िल्म के रिलीज़ से पहले 'पीके' नाम को लेकर इतना एहतियात बरता गया था, जैसे यह कई देश की सपंत्ति हो। लेकिन राजकुमार हिरानी से हमारा सवाल जरूर रहेगा कि उन्होंने 'पीके' नाम पर इतना हाइप क्यों बनाया था। जबकि एलियन का नाम पीके, डीके, राम, श्याम कुछ भी रहता, क्या फर्क पड़ता। आपको बता दें, 'पीके' कोई फिल्म का थीम नहीं है, बल्कि एलियन का किरदार सिर्फ फ़िल्म अपना संदेश देने मात्र के लिए इस्तेमाल करती है। वो फ़िल्म की मुख्य थीम नहीं है। 'पीके' फिल्म, धर्म और जात-पात के नाम पर हम जो मूर्खतापूर्ण भेदभाव करते हैं उन्हें 'पीके' चैलेंज करती है।

    लव-स्टोरी तो खत्म करा दी, बाकी जवाब कहां?

    लव-स्टोरी तो खत्म करा दी, बाकी जवाब कहां?

    जगत जननी उर्फ जग्गू और सरफराज़ की प्रेम कहानी को राजकुमार हिरानी ने काफी संजीदगी से साथ शुरू किया। और थोड़े ड्रामे के साथ खत्म भी कर दिया। लेकिन क्या 'पीके' पृथ्वी पर सिर्फ की लव स्टोरी पूरी करने आया था। खैर, निर्देशक के अनुसार बाकी धर्म, जाति, तपस्वी, बाबाओं को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब आप खुद ही सोच लीजिए। क्योंकि हमें जवाब प्रभावी नहीं लगा।

    राजकुमार हिरानी का सेफ गेम

    राजकुमार हिरानी का सेफ गेम

    राजकुमार हिरानी ने फिल्म में सवाल काफी मजबूती के साथ उठाया है। लेकिन उसका जवाब देने की बजाए, उन्होंने दर्शकों को भावनाओं में उलझा दिया। धर्म की बात उठाकर निर्देशक ने जो सोशल मैसेज देने की कोशिश, अफसोस है कि दर्शक उसे कभी नहीं घर ले जा पाएंगे। साथ ही, जब हमने ओह माई गॉड में इंसान बने परेश रावल से यही बातें सुन चुकी हैं, तो फिर यहां कम से कम निर्देशक को अपनी बात पहुंचाने का कोई और बेहतरीन तरीका ढूंढ़ना था।

    सुशांत की कॉस्ट्यूम तो चेंज कर देते

    सुशांत की कॉस्ट्यूम तो चेंज कर देते

    भई सुशांत सिंह राजपूत को इग्नोर क्यों किया निर्देशक ने? अब इसे राजकुमार हिरानी की अनदेखी कहेंगे या कुछ और। फिल्म की शुरूआत में सरफराज़ बने सुशांत ने जो कॉस्ट्यूम पहने हैं, वैसे ही कपड़े सरफराज़ ने फिल्म के अंत में सालों बाद भी पहने होते हैं। इस गलती को नजरअंदाज करना निर्देशक के लिए सवाल खड़े करता है। सुशांत भले ही फिल्म में कुछ देर के लिए थे, लेकिन अपनी जबरदस्त एक्टिंग से उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया।

    ट्रेन धमाका क्यों कराया

    ट्रेन धमाका क्यों कराया

    भैरोंसिंह को मारने की क्या जरूरत थी भैया? फिल्म में ट्रेन धमाके का सीन कुछ ऐसा था, जैसे डाइरेक्टर को समझ नहीं आ पाया कि अब क्या करना है। ट्रेन धमाका न भी होता, भैरोंसिंह को नहीं मारा जाता तो भी फिल्म की कहानी आगे बढ़ सकती थी। सॉरी राजकुमार हिरानी, लेकिन यह सीन डालकर आपने सिर्फ दर्शकों को इमोशनल करने की कोशिश की।

    क्या अब इंसान के बस में नहीं दुनिया

    क्या अब इंसान के बस में नहीं दुनिया

    धर्म के नाम पर जो रीति-रिवाज चल रहे हैं, कथित संत, महात्मा जो लोगों को बेवक़ूफ़ बना रहे हैं उनके बारे में बात करती है पीके। पीके है एक एलियन, जो सारे सवाल खड़े करता है। वैसे है तो यह इंटेलिंजेंट एलियन। लेकिन इस फिल्म से क्या यह मानना पड़ेगा कि अब दुनिया में चल रहे गोरखधंधे से इंसान खुद नहीं निकल सकता। जो बात करोड़ों की जनसंख्या नहीं समझ पा रही, उसे एलियन उठा रहा है। जबकि, आपको याद दिला दें, ऐसे ही सवाल दो साल पहले ओह माई गॉड में परेश रावल ने भी उठाए थे। लेकिन शायद लोगों ने नहीं सुनी, तो निर्देशक ने एलियन का कॉन्सेप्ट बना डाला।

    क्लाईमेक्स मेलोड्रामाटिक नहीं थी क्या?

    क्लाईमेक्स मेलोड्रामाटिक नहीं थी क्या?

    फिल्म का अंत थोड़ा ज्यादा ड्रामाटिक नहीं हो गया था क्या? मतलब किस ऑनएयर डिबेट शो में एंकर की पर्सनल लाइफ डिस्कस होती है। इतना ही नहीं, बल्कि उसकी प्रेम कहानी का किस्सा पूरा देश सुनता है, पाकिस्तान एंबेसी तक में फोन ऑनएयर लगा दिया जाता है। और पूरी एंबेसी एक लव-स्टोरी को पूरा करने का काम करती है। मतलब....कहानी में लॉजिक की तो बैंड ही बजा दी निर्देशक ने।

    3 इडियट्स टच से नहीं निकले बाहर

    3 इडियट्स टच से नहीं निकले बाहर

    फिल्म की म्यूजिक अच्छी है। बहुत अच्छी नहीं। कहीं न कहीं गानों में आपको 3 इडियट्स के म्यूजिक की याद आ जाएगी। और आपको पता भी चलेगा कि कब आप पीके के गानों से निकलकर 3 इडियट्स के गाने गुनगुनाने लगे। शान, श्रेया घोषाल और सोनू निगम हमेशा की तरह कर्णप्रिय लगे हैं, लेकिन अलग नहीं।

    English summary
    Aamir Khan's film Pk is realeased and the film is considering as superhit. But, despite all is well in the film, it raises many questions.
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