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    कहानी की Band: तो 13 साल बाद Idiot शाहरूख को काजोल करतीं Kiss

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    [नीति सुधा] साल 2009 में आई फिल्म 3 इडियट्स को किसी इंट्रो की जरूरत नहीं है। सुपरहिट, ब्लॉकबस्टर जैसे शब्द भी इस फिल्म के लिए कम पड़ गए थे। आमिर खान, माधवन, शरमन जोशी, बोमन ईरानी और करीना कपूर ने इस फिल्म में जो यादगार किरदार निभाए हैं, उसके लिए आज भी उन्हें सहारा जाता है।

    लेकिन 40 से भी ज्यादा एवार्ड्स जीतने वाली इस फिल्म में भी कई सीन वास्तविकता से थोड़ी ऊपर थे। हालांकि दर्शकों ने उसे नजरअंदाज कर दिया, क्योंकि उनके सामने थी एक आकर्षक, दिलचस्प कहानी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि यदि वायरस कोई अजीबोगरीब प्रोफेसर की बजाए आम प्रोफेसर होता तो....तो रैंचो- पिया की प्रेमकहानी कैसी होती? नहीं न, तो फिर यहां पढ़िए, ऐसा होता तो कैसी होती '3 इडियट्स'

    शाहरूख होते रणचोड़दास शामलदास चांचड़

    शाहरूख होते रणचोड़दास शामलदास चांचड़

    रैंचो के किरदार में आमिर खान ने जो जादू किया था, वह शायद ही कोई कर पाता। लेकिन क्या आपको पता है कि निर्देशक राजू हिरानी की पहली पसंद आमिर नहीं बल्कि शाहरूख थे। जी हां, अगर सब कुछ सही होता तो शाहरूख के खाते में होती बॉलीवुड की एक और सुपरहिट फिल्म। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि शाहरूख तोहफू कबूल करते कैसे लगते या वायरस को परेशान करते शाहरूख।Naa.... शायद इस रोल के लिए आमिर बेस्ट थे। Smile

    पिया होती काजोल

    पिया होती काजोल

    जी हां..तो बॉलीवुड की एक और सुपरहिट फिल्म होती शाहरूख-काजोल के नाम। 3 इडियट्स के लिए राजू हिरानी की पहली पसंद थी, काजोल। लेकिन काजोल ने इस रोल को मना कर दिया। जिसके बाद यह करीना कपूर की झोली में गया। लेकिन सोचिए यदि, पिया का किरदार काजोल ही निभाती तो.... तो शायद काजोल आमिर से कहती कि Kiss करने में नाक बीच में नहीं आती।

    अगर वायरस होता आम प्रोफेसर

    अगर वायरस होता आम प्रोफेसर

    3 इडियट्स याद करते ही सबसे पहले 'वायरस' की शक्ल आंखों के सामने आ जाती है। शायद यह एक ऐसा प्रोफेसर होगा, जिससे हर छात्र कन्नी काटे। लेकिन सोचिए यदि वायरस बने बोमन कोई आम प्रोफेसर की तरह ही होते तो.. तो सबसे पहले जॉय लोबो की जान नहीं जाती। जॉय की जान नहीं जाती तो रैंचो को वायरस ने नफरत नहीं होती। शायद दोनों के बीच अच्छा रिश्ता होता। जो कि रैंचो और पिया की प्रेम कहानी का आसान बनाने का काम करता। लेकिन भई.. ऐसे में तो निर्देशक के कहानी की बज जाती बैंड।

     रैंचो नहीं करता पिया को फोन

    रैंचो नहीं करता पिया को फोन

    दिक्कत वहां से शुरू होती है, जब पेपर चोरी करने की रात रैंचो पिया को फोन कर देता है। जिससे वायरस रैंचो को आसानी से पकड़ लेता है। और सब कुछ गड़बड़ हो जाती है। लेकिन सोचिए यदि रैंचो उस रात पिया को फोन नहीं करता तो,, तो वे लोग आराम से question पेपर लेकर निकल जाते और किसी को पता भी नहीं चलता। और न ही वायरस, रैंचो पर अपना गुस्सा निकालता। और राजू भी आराम से इग्जाम भी पास कर लेता।

    राजू को इंटरव्यू से निकालते बाहर

    राजू को इंटरव्यू से निकालते बाहर

    राजू रस्तोगी जिस तरह का इंटरव्यू देता है असल जीवन में शायद ही ऐसे लड़के को जॉब दी जाएगी। लेकिन भई फिल्म है, हीरो को नौकरी तो देनी है। लेकिन सोचिए, यदि राजू को इंटरव्यू में नौकरी नहीं मिलती तो..तो वायरस जीत जाता और शायद राजू का डिप्रेशन लेवल और भी बढ़ जाता। फिर राजू की बूढ़ी मां, बहन और अपाहिज पिता की सेवा कौन करता..मतलब कुल मिलाकर बजती कहानी की बैंड.

    फरहान के पापा पहले मान लेते

    फरहान के पापा पहले मान लेते

    फरहान हमेशा से फोटोग्राफर बनना चाहता था, लेकिन डर की वजह से घर में नहीं बताया था। वहीं रैंचो के समझाने पर वह अपने सपनों को चुनता है और अपने पापा के सामने अपने मन की बात कहता है, जिसके बाद वे मान जाते हैं। लेकिन सोचिए यदि फरहान इतने डॉयलोग्स और इतनी मेहनत पहले ही कि होती तो... तो शायग इंजीनियरिंग में 4 साल बिताने की बजाए, वह उसी वक्त फोटोग्राफर बनने चला गया होता। लेकिन फिर कॉलेज में होते सिर्फ रैंचो और राजू....तो शायद कहानी में मजा नहीं आती।

    मोना की होती नॉर्मल डिलेवरी

    मोना की होती नॉर्मल डिलेवरी

    रैंचो का किरदार काफी इंटेलिजेंट बनाया गया था, जो इग्जाम टॉप करने से लेकर मोना की डिलेवरी तक कर लेता है। लेकिन सोचिए मोना की डिलेवरी के दिन मूसलाधार बारिश नहीं हो रही होती और सब कुछ नॉर्मल हो रहा होता। तो शायद रैंचो कॉलेज के बाहर होता और पिया अपनी बहन के बेटे के साथ खेल रही होती। लेकिन यह कहानी कुछ बेहतरीन नहीं लगती..और बज जाती कहानी की बैंड। ऐसे भी बॉलीवुड फिल्मों में हीरो- हीरोइन को मिलना ही है, चाहे कुछ भी हो जाए।

    पिया की शादी हो चुकी होती

    पिया की शादी हो चुकी होती

    इतने साल बाद फरहान, राजू की शादी तो हो चुकी होती है, लेकिन पिया की नहीं। खैर, अब ये तो निर्देशक की मर्जी। लेकिन सोचिए यदि पिया की शादी हो चुकी होती तो..तो फरहान और राजू काफी निराश हो जाते। उनका इतनी दूर वापस आना बेकार चला जाता। और फिर रैंचो भी काफी दुखी होता। लेकिन पिया को यह जानकर कितना अफसोस होता कि रैंचो की अभी तक बिना शादी किए गुमनाम जिंदगी गुजार रहा है। ऐसे में कहानी के साथ साथ पिया की जिंदगी की भी बैंड बज जाती..

    हो गई होती रैंचो की शादी

    हो गई होती रैंचो की शादी

    चलो ठीक है पिया की शादी उसी दिन हो रही होती है, जब फरहान और राजू उसे भगा ले आते हैं। लेकिन सोचिए यदि रैंचो की शादी ही चुकी होती तो..तो वह लद्दाख में अपनी पत्नी, बच्चों समेत सुख की जिंदगी गुजार रहा होता। और पिया के पहुंचने पर हो जाता सब गड़बड़। वैसे पिया तो ऐसा होने पर बहुत ही निराश हो जाती। और फिर फिल्म का मोस्ट फेमस kiss भी दर्शक मिस कर देते। Tongue out

    चतुर के पास कहां से आया फरहान का नंबर

    चतुर के पास कहां से आया फरहान का नंबर

    6 सालों बाद भी चतुर ने फरहान का नंबर सेव रखा है। यह काफी आश्चर्य वाली बात है। और वह भी जबकि चतुर कॉलेज के बाद तुरंत नौकरी के लिए विदेश चला गया था। खैर, सोचिए यदि चतुर को फरहान का नंबर नहीं मिल पाता तो.... तो फरहान होता प्लेन में, राजू पत्नी के साथ घर में और फूंसूक वांगडूं लद्दाख में। और पिया की होती शादी....लेकिन यह काफी बोरिंग होती..और बजती कहानी की बैंड....लिहाजा, निर्देशक ने कहानी को पूरी तरह ट्विट्स कर दिया और बन गई 3 इडियट्स।

    English summary
    First preference for the role of Rancho in movie 3 Idiots was none other than Shahrukh Khan. So, now could you even think of how it would be.
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