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    अमिताभ बच्चन को सर जी नहीं बुलाया तो कादर खान हो गए थे फिल्मों से आउट, सुनाया था किस्सा

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    कादर खान अगर आज हमारे बीच होते तो 22 अक्टूबर 2020 को अपना 83वां जन्मदिन मना रहे होते। कादर खान को हिंदी सिनेमा से बहुत प्यार था और उन्होंने यहां जमकर काम किया। लेकिन कुछ लोग उनके दिल में कुछ ऐसी यादें छोड़ गए जो उनके मन में हमेशा टीस जगाती थीं। ऐसे एक शख्स थे अमिताभ बच्चन जिनसे दोस्ती टूटने का ज़िक्र कादर खान ने कई इंटरव्यू में किया।

    कादर खान ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब अमिताभ बच्चन सुपरस्टार बन गए तो लोग उन्हें सर जी बुलाने लगे। कादर खान को भी ऐसा करने को कहा गया। लेकिन कादर खान ऐसा नहीं कर पाए। जिस इंसान को वो भाई और दोस्त बोलते हैं, उसे वो सर जी कैसे बुलाते?

    लेकिन शायद ये बात अमिताभ बच्चन को पसंद नहीं आई क्योंकि उस दौरान कादर खान के हाथ से कई फिल्में छीन ली गईं। दिलचस्प है कि अमिताभ बच्चन की एंग्री यंग मैन कादर खान के लिखे डायलॉग्स की वजह से बनी थी। मनमोहन देसाई की अमर अकबर एंथनी से लेकर प्रकाश मेहरा की ज़ंजीर तक, कादर खान ने अमिताभ बच्चन के लिए लगातार डायलॉग्स लिखे थे।

    लेकिन सर जी वाले किस्से के बाद उन्हें खुदा गवाह से निकाल दिया गया। गंगा जमुना सरस्वती भी उन्होंने आधी लिखी, आधी छोड़ दी। एक और इंटरव्यू में कादर खान बताते हैं कि कुली के सेट पर अमिताभ बच्चन कादर खान की फिल्म अनाउंस करने वाले थे जिसके हीरो अमिताभ बच्चन थे। लेकिन फिर कुली के सेट पर अमिताभ बच्चन का एक्सीडेंट हुआ और उन्हें ठीक होते एक अरसा निकल गया।

    इसके बाद अमिताभ बच्चन ने राजीव गांधी की सरकार के दौरान, राजनीति में हाथ आज़माया। लेकिन यही अमिताभ बच्चन से जब कादर खान ने राजनीति के बारे में सलाह ली थी तो अमिताभ बच्चन ने कादर खान को साफ शब्दों में राजनीति से दूर रहने की सलाह दी थी। इसके बाद दोनों के रिश्तों में खटास आ गई। जानिए कादर खान के बारे में कुछ और दिलचस्प बातें -

    भाईयों की मौत

    भाईयों की मौत

    कादर खान के तीन बड़े भाई थे लेकिन तीनों की ही मौत हो गई। उस समय उनका पूरा परिवार काबुल में रहता था। उनकी मां ने पिता से कहा कि काबुल हमें रास नहीं आ रहा है। और मां के ज़बरदस्ती करने पर कादर खान, अपने माता पिता के साथ मुंबई आ गए।

    बेहद गरीबी के दिन

    बेहद गरीबी के दिन

    कादर खान का बचपन काफी गरीबी में बीता। उनके पास पहनने को चप्पल तक नहीं होती थी। जब भी उनकी मां उनके गंदे पैर देखती थीं, समझ जाती थीं कि वो मस्जिद नहीं गए हैं। उनके माता पिता का तलाक हो गया और उनकी मां की दूसरी शादी भी कर दी गई। उनके सौतेले पिता बिल्कुल हिंदी फिल्मों में दिखाए जाने वाले सौतेले मां बाप की तरह ही थे।

    खूब की पढ़ाई

    खूब की पढ़ाई

    मां के कहने पर कादर खान ने खूब पढ़ाई की। कादर खान ने बीटेक की पढ़ाई की और इंजीनियर बने। इसके बाद वो मुंबई के एम एच साबू सिद्दीकी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में बच्चों को सिविल इंजीनियरिंग पढ़ाने लगे।

    मिलते थे ढेरों ईनाम

    मिलते थे ढेरों ईनाम

    कादर खान अपने कॉलेज में थियेटर में काफी एक्टिव रहते थे। एक बार किसी ने उनका नाटक देखकर उन्हें 100 रूपये का ईनाम दिया था जिसे उन्होंने काफी समय तक संभाल कर रखा था लेकिन फिर खर्च कर दिया था। एक प्ले में पुरस्कार जीतने के बाद उन्हें लिखने का ऑफर मिला, 1500 रूपये में।

    पहली फिल्म की साईन

    पहली फिल्म की साईन

    कादर खान को एक प्ले के दौरान दिलीप कुमार ने देखा और फिर दिलीप कुमार ने कादर खान को अपनी फिल्म बैरागी के लिए साइन किया। यहीं से उनका झुकाव फिल्मों की तरफ हुआ।

    यूं हुआ डेब्यू

    यूं हुआ डेब्यू

    कादर खान ने अपना डेब्यू, राजेश खन्ना की फिल्म दाग से किया था। इस फिल्म में वो एक मामूली से वकील की भूमिका में नज़र आए थे। इसके बाद वो मनमोहन देसाई की फिल्म रोटी में नज़र आए।

    पहली कमाई

    पहली कमाई

    रोटी के लिए कादर खान ने मनमोहन देसाई को कुछ डायलॉग्स लिख के दिए जो उन्हें बहुत पसंद आए। फिर कादर खान को डायलॉग्स लिखने का काम मिलने लगा। अपनी पहली फिल्म के लिए उन्हें 1 लाख रूपया मिला था।

    बनाया अमिताभ बच्चन का करियर

    बनाया अमिताभ बच्चन का करियर

    कादर खान के पास काम की कमी कभी नहीं रही। उन्होंने 300 से ऊपर फिल्मों में अभिनय किया और 1000 से ऊपर फिल्मों के लिए डायलॉग्स लिखे। इन फिल्मों में अमिताभ बच्चन की 22 फिल्में शामिल हैं।

    डेविड धवन के चहीते

    डेविड धवन के चहीते

    एक समय आया जब डेविड धवन, गोविंदा और कादर खान की तिकड़ी ने जमकर बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई। इनमें दूल्हे राजा से लेकर नंबर वन सीरीज़ तक की सारी फिल्में शामिल हैं।

    मौत के बाद मिला अवार्ड

    मौत के बाद मिला अवार्ड

    हिंदी सिनेमा को इतने योगदान के बावजूद भारत सरकार ने कादर खान को जीवित रहते किसी सम्मान से नहीं नवाज़ा था। अपने आखिरी वक्त में कादर खान का हालचाल, बॉलीवुड की किसी हस्ती ने नहीं लिया। मरणोपरांत उन्हें पद्मश्री की उपाधि दी गई।

    English summary
    Amitabh Bachchan was called Sir Ji and Kadar Khan refused to address him as Sir. He was thrown out of films. While it was dialogues written by Kader Khan which made Amitabh Bachchan superstar.
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