वो फ़िल्म जिसने 48 साल पहले रचा बॉक्स ऑफिस पर इतिहास, बिकी थी 25 करोड़ टिकट, 1 सीन शूट करने में लगे 3 साल

बॉलीवुड इंडस्ट्री में ऐसी बहुत सारी फिल्में बनी है जिन्होंने पर्दे पर इतिहास रच दिया था। इतना ही नहीं सालों तक उन्हें कोई फिल्म टक्कर नहीं दे पाई। लेकिन आज हम आपको अमिताभ बच्चन की एक ऐसी फिल्म के बारे में बताने वाले हैं जिसने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था। इस फिल्म को लेकर डायरेक्शन का परफेक्शन इतना ज्यादा था कि एक सीन को फिल्माने के लिए तकरीबन 3 साल लगे।
मल्टीस्टारर फ़िल्म के एक सीन को लगा 3 साल का समय
बता दे कि यह फिल्म मल्टीस्टारर थी और बॉक्स ऑफिस पर इसने सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले थे। यहां तक की कई सारे सीन पर तो बहुत ही बारीकी से काम किया गया। कुछ ऐसे सीन भी थे जो की देखने में काफी ज्यादा आसान लग रहे थे लेकिन उनको फिल्माने के लिए कई साल लगे। डायरेक्टर ने इस फिल्म के सीन को परफेक्ट बनाने में काफी मेहनत की। एक तो ऐसा सीन था जिसको पूरा करने में 3 साल लग गए थे। इस फिल्म में कई सारे बड़े दिग्गज सितारे नजर आए और हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं उसका नाम है शोले।
फ़िल्म ने बनाए कई रिकॉर्ड
शोले फिल्म ने कई सारे रिकॉर्ड बनाकर पूरे बॉक्स ऑफिस को हिला कर रख दिया था। जिसको रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनाया गया था और साल 1975 में रिलीज किया गया था। इस फिल्म को दर्शकों द्वारा काफी पसंद भी किया गया और कमाई के मामले में बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म में तहलका मचा दिया था। फिल्म में धर्मेंद्र, अमिताभ, हेमा मालिनी, संजीव कपूर, जया बच्चन और अमजद खान जैसे बड़े सितारे नजर आए थे।
दर्शकों ने फ़िल्म को किया बेहद पसंद
इस फिल्म को बड़े चाव से लोगों ने देखा था। फिल्म एक-एक सीन को बहुत ही बारीकी से फिल्माया गया और डायलॉग के अलावा गाने भी आज तक लोगों की जुबान पर हैं। इस फिल्म में हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की नोकझोंक भी देखने को मिली और अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की सादगी बड़ी कहानी भी घर-घर तक पहुंची। इसी फिल्म के एक सीन को फिल्माने के लिए पूरे 3 साल लग गए थे।
एक सीन को पूरा होने में लगे 3 साल
दरअसल रमेश सिप्पी जिस सीन के इंतजार में थे उसका परफेक्ट शॉट नहीं हो पा रहा था। एक इंटरव्यू के दौरान अमिताभ बच्चन ने खुद इस बात का जिक्र किया था और बताया था कि डायरेक्टर साहब सूर्यास्त के वक्त इस सीन को शूट करना चाहते थे। 35 एमएस का फॉर्मेट फिल्म को बड़ा बनाने के लिए काफी ज्यादा छोटा था। इसके बाद में उन्होंने यह कहा कि 70 एमएस और स्टीरियोफोनिक साउंड में बनाया जाए। लेकिन विदेश से कैमरा मंगवाने की वजह से फिल्म का बजट काफी ज्यादा बढ़ रहा था। इसी वजह से शूटिंग को 35 एमएस में करके 70 एमएस में ब्लोअप कर दिया गया। इस सीन को पूरा होने में 3 साल लगे।


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