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    हासिल के 17 साल: बेमिसाल फिल्म,इरफान खान के किराए के मकान पर फाइनल किया था टाइटल, निर्देशक का खुलासा

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    राजस्थान के टोंक जिले के रहने वाले इरफान खान ने कुछ दिन पहले हम सबको अलविदा कह दिया। आज इरफान खान को स्पॉटलाइट में आने वाली फिल्म 'हासिल' को 17 साल पूरे हो चुके हैं। 2003 में तिग्मांशु धुलिया की फिल्म 'हासिल' में रणविजय का किरदार इरफान ने निभाया। गोली, खून खराबा, नेतागिरी और चुनावों जैसे विषयों को समेटे इस फिल्म में इरफान खान नेगेटिव रोल में नजर आए।

    फिल्म 'हासिल' एक मूवी के तौर पर और इरफान खान के करियर दोनों के लिए ही मायने रखती हैं। याद है, इरफान खान की पत्नी सुतापा ने किस तरह कहा था, मैंने कुछ खोया नहीं बल्कि 'हासिल' किया है। ठीक ऐसे ही इरफान खान ने इस फिल्म से बहुत कुछ 'हासिल' किया था। इरफान खान विरासत में ऐसी तमाम फिल्में छोड़कर गए हैं। 'हासिल' के बाद 'मकबूल' जैसी फिल्मों के बाद इरफान खान ने अपनी जगह इंडस्ट्री में मजबूत कर ली थी।

    बॉलीवुड के तीनों 'खान' पर हमेशा भारी रहेगी इरफान खान की पारीबॉलीवुड के तीनों 'खान' पर हमेशा भारी रहेगी इरफान खान की पारी

    इससे पहले एनएसडी से निकले इरफान खान ने कई नाटकों व थिएटर के लिए परफॉर्म किया। बॉलीवुड छोड़िए, हॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया। हासिल से पहले इरफान टीवी जगत में अपनी जगह पक्की कर चुके थे। साल 1988 में आई नेशनल और कई इंटरनेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म 'सलाम बॉम्बे' से इरफान खान ने डेब्यू किया।

    लेकिन उनपर ज्यादा लोगों की नजरें गई नहीं, जाती भी कैसे 1.5 मिनट का ही उनका रोल था। लेकिन फिल्म 'हासिल' करीब 14 साल बाद पर्दे पर तमाम पापड़ बेलने के बाद रिलीज हुई जिसने इरफान खान को पहचान दिला दी।

    20 साल बाद इरफान खान के निर्देशक का खुलासा

    20 साल बाद इरफान खान के निर्देशक का खुलासा

    तिग्मांशु धुलिया ने ट्वीट कर एक बार फिर इरफान खान को याद किया। उन्होंने बताया कि 'हासिल' फिल्म का टाइटल उनकी टीम ने इरफान खान के किराए के मकान पर डिसाइड किया था। इरफान और उनकी दोस्ती 34 साल पुरानी है। वह लिखते हैं कि ये दोस्ती कभी खत्म नहीं होगी। ऐसे ही चलती रहेगी।

    हासिल तक पहुंचने के लिए इरफान की मेहनत

    हासिल तक पहुंचने के लिए इरफान की मेहनत

    बॉलीवुड जैसी चकाचौंध दुनिया में जगह बनाने के लिए तमाम पापड़ बेलने पड़ते हैं। वो भी तब ज्यादा, जब आपका कोई गॉडफादर न हो। इरफान खान छोटे से गांव से निकल कर करियर की राहे तलाश रहे थे। लेकिन कहते हैं न प्रतिभा किसी की मोहताज होती।

    'सलाम बॉम्बे' फिल्म के बाद 'कमला की मौत' जैसी कई फिल्मों में इरफान ने काम किया लेकिन इंडस्ट्री में पहचान डेढ़ दशक के लंबे इंतजार के बाद 'हासिल' से मिली। फिल्मी दुनिया में रूप, रंग और दमदार पर्सनैलिटी के लिए पहले जगह होती है। इरफान खान जिनके पास प्रतिभा, रूचि और काम करने ललक थी। उन्हें पर्दे पर आने के लिए स्ट्रगल करना पड़ा।

    हासिल टेढ़ी खीर थी

    हासिल टेढ़ी खीर थी

    साल 2003 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति पर बनी फिल्म 'हासिल' के लिए यूपी का टोन और इलाहाबाद की बोली पर पकड़ बनाने के लिए वह करीब 23-24 दिन इलाहाबाद में ठहरे। खूब घूमें ठेठ इलाहाबादी भाषा पर पकड़ बनाई और फिल्म में खास छाप छोड़ दी।

    मनोज बाजपेयी ने ठुकरा दी थी हासिल

    मनोज बाजपेयी ने ठुकरा दी थी हासिल

    तिग्मांशु धुलिया ने 'हासिल' के रणविजय का रोल पहले मनोज बायपेजी को ऑफर किया था। लेकिन उन्होंने नेगेटिव रोल करने से मना कर दिया। इसके बाद तिग्मांशु धुलिया ने इरफान खान को ये रोल दिया।

    1 साल तक हासिल को कोई हासिल नहीं करना चाहता था

    1 साल तक हासिल को कोई हासिल नहीं करना चाहता था

    बताया जाता है कि फिल्म 'हासिल' को एक साल तक कोई डिस्टिब्यूटर नहीं मिला। 12 महीने खूब धक्के खाए लेकिन फिल्म डिस्टिब्यूटर के चलते लटकी रही। लोग इस सो कोल्ड नए लड़के पर पैसा लगाने को तैयार नहीं थे। वाक्य में बाद में जब फिल्म रिलीज हुई तो कमर्शियली तौर पर सक्सेसफुल नहीं थी। लेकिन इरफान खान की काफी प्रशंसा हुई।

    बॉक्स ऑफिस पर हासिल और अरमान फिल्म की टक्कर

    बॉक्स ऑफिस पर हासिल और अरमान फिल्म की टक्कर

    राइटर और निर्देशक तिग्मांशु धुलिया ने बतौर डायरेक्टर फिल्म 'हासिल' से ही डेब्यू किया था। 'हासिल' फिल्म के साथ बॉक्स ऑफिस पर 16 मई 2003 को अनिल कपूर की फिल्म 'अरमान' रिलीज हुई। दर्शकों ने 'हासिल' के बजाय 'अरमान' को ज्यादा तवज्जो दी।

    हासिल के बाद तमाम अवॉर्ड्स की लाइन लग गई

    हासिल के बाद तमाम अवॉर्ड्स की लाइन लग गई

    इरफान खान जैसे दिग्गज को सिर्फ एक मौके की तलाश थी। तभी तो विशाल भारद्वाज ने पहली बार देखते ही 'मकबूल' के लिए इरफान खान को साइन कर लिया था। बॉलीवुड से हॉलीवुड तक इसके बाद उनका सफर रहा और तमाम अवॉर्डों की फेहरिस्त में उनका नाम।

    हासिल फिल्म मे इरफान खान का डॉयलाग

    हासिल फिल्म मे इरफान खान का डॉयलाग

    "एक बात सुन लेओ पण्डित, तुमसे गोली वोली न चल्लई. मंतर फूंक के मार देओ साले..."

    "छात्र नेता हैं, मारे साला सीटी दस हज़ार लौंडा इकठ्ठा हो जायेगा"

    "वो साले गुंडे हैं, सरकारी गुंडे हैं. हम क्रांतिकारी हैं, गुरिल्ला वार किया जाएगा"

    English summary
    Irrfan Khan haasil film complete 17 years read interesting facts and actor struggle story
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