इस परिवार को पहचानते हैं क्या, बावर्ची ने बदल दी थी इनकी जिंदगी, घर में क्लेश मिटाकर ला दी थी सुख-शांति

ऋषिकेश मुखर्जी की साल 1970 तो मे रिलीज हुई फिल्म बावर्ची को रिलीज़ हुए 50 साल पूरे हो चुके हैं. इतना ही नहीं इस फिल्म में जॉइंट फैमिली के खट्टे मीठे रिश्तो को दर्शाया गया है. यह एक बांग्ला फिल्म गोल्पो होलेओ शोत्यि की हिंदी रीमेक बताई जाती है. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था. यहां तक कि आपको बता दें कि इस फिल्म में राजेश खन्ना के साथ-साथ असरानी, ए के हंगल और जया भादुरी नजर आए थे. बता दें कि इस फिल्म को काफी ज्यादा दर्शकों द्वारा प्यार मिला और इसे सदाबहार फिल्मों में शामिल कर दिया गया.
राजेश खन्ना ने फिल्म में मांजे थे बर्तन और बनाई थी रोटी
जानकारी के लिए आपको बता दें कि ऋषिकेश मुखर्जी की राजेश खन्ना के साथ में काफी ज्यादा अच्छी बॉन्डिंग देखी जाती थी. उस समय पर एक इकलौती निर्देशक हुआ करते थे जो राजेश खन्ना को सेट पर डांट लगा दिया करते थे. बता देंगे साल 1970 में सुपरस्टार राजेश खन्ना ने जब स्क्रीन पर सहज अवतार में गुदगुदाने की कोशिश की तो देखने वाला तालियां बजाने से बाज नहीं आ पाया. इस फिल्म के अंदर राजेश खन्ना को बर्तन मांजते और रोटी बनाते हुए भी देखा जा चुका है. इस फिल्म में एक ऐसी रियलिटी दिखाई गई है जो कि दर्शकों के दिलों में बस गई.
एक बावर्ची ने पूरे परिवार की बदल दी जिंदगी
फिल्म बावर्ची के अंदर एक जॉइंट फैमिली की कहानी दर्शाई जाती है. जिसमें घर के मुखिया यानी कि दादूजी पुराने जमाने की बुजुर्गों को अच्छे से रिप्रेजेंट करते हुए नजर आते हैं. यहां तक कि वह अपनी कमाई से बनाए हुए जेवर संदूक में ताला लगा कर रखा करते थे. जिसे बिस्तर के नीचे छुपा कर रख दिया जाता था. उनकी दो बहुएं थी जो कि घर में काम करने से दूर भागती थी. फिल्म के दौरान दादू जी की एक अनाथ पोती भी थी और उसके माता-पिता बचपन में ही उसको छोड़ कर चले गए थे. घर में हर कोई एक दूसरे से ईर्ष्या करता हुआ नजर आता. इन सबके बीच ही एक बाबर की आता और हर काम में वह माहिर होता है. जो कि परिवार के क्लेश को मतकर हंसी-खुशी का माहौल बनाकर जाता है.


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