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कहानी की band: अगर नहीं छूटती गीत की ट्रेन तो कैसी होती जब वी मेट!

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[Trisha Gaur] हर कहानी में कुछ ट्विस्ट ऐसे होते हैं जो आपको बिल्कुल बांध लेते हैं। कभी कभी आप कहानी से जुड़ जाते हैं तो कभी उसमें खो जाते हैं पर अगर ये ट्विस्ट को ही ट्विस्ट कर दिया जाए तो कैसी होती ये कहानी। इम्तियाज़ अली ने जब वी मेट की कहानी लिखते समय केवल करीना के बारे में सोचा और सोचा भी तो ऐसा कि करीना ने रिकॉर्ड बना लिया। लेकिन कभी आपने सोचा है कि अगर गीत की ट्रेन छूटती ही नहीं तो...ज़रा सोचिए ऐसा कि यूं होता तो क्या होता?

पहले ही सीन में छूट जाती गीत की ट्रेन

पहले ही सीन में छूट जाती गीत की ट्रेन

अब भागती हुई गीत को देखकर एक लड़के ने उसे ट्रेन के अंदर खींच लिया। पर मान लीजिए कि वहां कोई लड़की होती तो ऐसा कोई स्टंट नहीं करती। न गीत ट्रेन में चढ़ती, न आदी से मिलती, न होता कोई झमेला। मतलब कहानी की बैंड!

TT ने नहीं काटा होता शाहिद का टिकट

TT ने नहीं काटा होता शाहिद का टिकट

बिना टिकट सफर करना कानूनन अपराध है पर फिर भी हमारे हीरो विद आउट टिकट सफर कर रहे थे। अब मान लीजिए कोई बहुत ईमानदार टीटी होता और करीनी की बकबक इग्नोर करके कन्विंस नहीं होता तो शाहिद अगले स्टेशन पर उतर कर वापस घर का ऑटो पकड़ते। मतलब कहानी की बैंड!

 पानी वाला होता ईमानदार

पानी वाला होता ईमानदार

पानी वाले के पास चिल्लर होते और ईमानदारी से वापस कर देता, तो न गीत लड़ती, न ट्रेन छूटती, न ही सामान जाता और गीत पहुंचती। न होता रतला$$$म की खूबसूरत गलियां और न ही होती गीत और आदित्य कश्यप की मुलाकात। मतलब कहानी की बैंड!

 होटल decent की रेड में पकड़ी जाती गीत

होटल decent की रेड में पकड़ी जाती गीत

गीत और आदित्य होटल डीसेंट में रूकते हैं और वहां पुलिस की रेड पड़ जाती हैं। हालांकि दोनों भाग निकलते हैं पर अगर वो रेड में पकड़े जाते तो थोड़ा फैमिली स्यापा होता। या तो गीत के हाथ पांव तोड़ कर घर बैठाया जाता या दोनों की शादी कर दी जाती। इस केस में तो कहानी का दी एंड।

 अंशुमान नहीं ठुकराता गीत का प्यार

अंशुमान नहीं ठुकराता गीत का प्यार

अगर अंशुमान गीत का प्यार नहीं ठुकराता तो दोनों शादी करके पहाड़ियों पर गीत के सपनों का घर बनाकर कुमार गौरव विजेयता पंडित की तरह देखो मैंने देखा है ये इक सपना गा रहे होते। और ये तो पक्का कहानी की बैंड!

मंजीत कर देता गीत को माफ

मंजीत कर देता गीत को माफ

अगर मंजीत गीत को माफ कर देता तो दोनों की शादी में शाहिद नगाड़ा बजाकर मौजा हूी मौजा नाचते। हां डायरेक्टर का मन करता तो शाहिद को लॉलीपॉप पकड़ा देते गीत की बहन के रूप में। और ऐसे में तो fultooo कहानी की बैंड!

 
English summary
If Kareena Kapoor would not have missed the train how would Jab we Met turn into. The story could have been a disaster woth a disciplined Kareena. Moreover there would have been no Shahid to endorse the rail romance!
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