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Oopss.. क्या होता.. अगर ऐसी होती गोविंदा की यह सुपरहिट फिल्म!

Posted By: shivani verma
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बॉलीवुड में टैलेंट की कमी नहीं हैं, इसमें तो कोई दो राय नहीं हैं। एक से बढ़कर एक धुरंधर एक्टर इंडस्ट्री में अपनी टैलेंट दिखाने में पीछे नहीं हैं। यही नहीं, जो एक्टर अपनी नई नई फिल्में लेकर आ रहे हैं उनमें भी गज़ब का टैलेंट भरा हुआ है। लेकिन गोविंदा ऐसे एक्टर हैं जिनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता।

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उन्होंने बॉलीवुड को इतनी बेहतरीन फिल्में दी हैं जो जितनी भी पुरानी हो जाए वो हमेशा ही याद रहेंगी। इन्हीं में से एक है हीरो नंबर 1। इस फिल्म को रिलीज़ हुए 20 साल पूरे हो गए हैं।

डेविड धवन और गोविंदा की जोड़ी ने 90 के दशक में जो धमाल मचाया था, वैसा धमाल शायद ही सिल्वर स्क्रीन पर फिर से किया जा सकता है। गोविंदा ने डेविड धवन की 17 फिल्मों में काम किया है। जिनमें से ज्यादातर कॉमेडी फिल्में थीं। लेकिन इनकी नंबर वन की लिस्ट वाली फिल्मों ने लोगों का काफी मनोरंजन किया है, जिसमें सबसे टॉप पर है हीरो नंबर 1।

अक्षय कुमार और इनकी जोड़ी थी लाजवाब.. लुक्स का जबरदस्त कॉम्बिनेशन

साल 1997 में आई फिल्म हीरो नंबर 1 ने लोगों को जीभर कर हंसाया। हालांकि, यह ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म बावर्ची जैसी थी, लेकिन फिर भी गोविंदा और करिश्मा की जोड़ी ने लोगों का दिल जीत लिया और यह फिल्म हुई थी हिट। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यदि फिल्म में नौकर बना राजेश यानि की गोविंदा सर्वगुण (गाना, डांस करना, खाना बनाना, इंटेलिजेंट, ख्याल रखने और धीरज वाला) नौकर की बजाए कोई नॉर्मल लड़का होता तो....तो कैसी होती राजेश-मीना की लवस्टोरी? नहीं न, तो फिर यहां पढ़िए कि ऐसा होता तो कैसी होती हीरो नंबर 1.

राजेश सर्वगुण संपन्न नौकर नहीं होता

राजेश सर्वगुण संपन्न नौकर नहीं होता

फिल्म हीरो नंबर वन में सब कुछ तो सही है, लेकिन कोई यह बताए कि ऐसा सर्वगुण संपन्न नौकर कहां मिलता है? या नौकर भी छोड़ो ऐसे लड़के कहां मिलते हैं, जिन्हें खाना बनाना(खास व्यंजन), डांस करना, म्यूजिक, गाने लिखना, गुंडों से लड़ना, इंटेलिजेंट होने के साथ साथ लड़की का ख्याल भी रखना आता हो। प्लस लड़की को पाने के लिए जिसमें इतना धीरज भी हो। बाप रे..मतलब ये नौकर नहीं, सुपरनौकर थे। लेकिन सोचिए यदि राजेश सुपरनौकर की बजाए, आम लड़का होता तो,, तो शायद आज वह घर में बैठकर ऑफिस में काम कर रहा होता और मीना की शादी हो चुकी होती। लेकिन यहां बज जाती कहानी की बैंड :P

अगर कादर खान सख्त पिता नहीं होते

अगर कादर खान सख्त पिता नहीं होते

ऐसा पिता कहां होता है जो सुबह सुबह एक बाल्टी पानी डालकर बेटे को जगाए। खैर, सोचिए अगर कादर खान यानि की सेठ धनराज मल्होत्रा कोई खरूस पिता होने की बजाए आम पिता जैसे होते तो.. तो न ही राजेश अपनी जिंदगी से ऊबता। न ही यूरोप भाग कर जाता। और न ही उसे मीना मिलती। मतलब सब कुछ शुरू सेठ धनराज ने ही कराया था। लेकिन अच्छा है, कम से कम इससे कहानी में ट्विस्ट तो आया।

मीना का सामान एयरपोर्ट पर नहीं खोता

मीना का सामान एयरपोर्ट पर नहीं खोता

अपना सारा सामान टैक्सी में रखकर इस तरह कैसे कोई भूल सकता है? लेकिन खैर, ठीक है फिल्मों में तो कुछ भी संभव है। लेकिन सोचिए, यदि ऐसा नहीं हुआ होता तो.. तो राजेश जाता अपने रास्ते, हां टैक्सी लेते समय हुई मीना से मुलाकात उसे याद तो जरूर रहती, लेकिन वह मुलाकात प्यार नहीं बनती। वहीं, मीना तो खैर शायद फिर कभी राजेश के सामने नहीं आती। मतलब, न होती उनकी फिर एयरपोर्ट पर मुलाकात, न बढ़ता प्यार, न होता करार।... लेकिन डेविड धवन के कहानी की बज जाती बैंड।

एक ही वक्त पर हीरो- हिरोइन यूरोप

एक ही वक्त पर हीरो- हिरोइन यूरोप

मानना पड़ेगा..क्या टाइमिंग थी हीरो- हिरोइन की। राजेश को उसी दिन घर छोड़कर भागना होता है, जिस दिन मीना की फ्लाइट होती है। और तो और उसी फ्लाइट से भी जाना है, जिससे मीना जाती है। इसे कहते हैं, हाइट ऑफ coincidences. लेकिन सोचिए, यदि ऐसा न हुआ होता तो..राजेश को एक दिन पहले या बाद में भी तो अहसास हो सकता था कि वह अब इस घर में नहीं रह सकता। अगर ऐसा होता.. तब तो इनकी जोड़ी बनना असंभव था। लेकिन फिर हीरो-हिरोइन की यूरोपियन लवस्टोरी की बजती बैंड।

किस कॉलेज में टॉप होने पर यूरोप टूर का टिकट मिलता है

किस कॉलेज में टॉप होने पर यूरोप टूर का टिकट मिलता है

मीना के दादाजी यानि की दीनानाथ(परेश रावल) से यदि मीना को परमिशन ही नही मिलती तो मीना चाहकर भी यूरोप यात्रा नहीं कर पाती। और शायद कॉलेज खत्म होने पर उसकी दोनों चाची शादी भी करवा चुकी होती। खैर, मीना किस कॉलेज में पढ़ाई करती थी, जहां क्लास टॉप होने पर उसे यूरोप टूर का टिकट गिफ्ट किया गया। खैर, बॉलीवुड फिल्मों में तो सब जायज है।

कादर खान को राजेश का पता नहीं चलता

कादर खान को राजेश का पता नहीं चलता

राजेश यूरोप में क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करता है और इंडिया में उसके पिता सेठ धनराज को पता चल जाता है उसका बेटा यूरोप में है। और फिर वह जाकर अपने बेटे को लेकर आ जाता है और उसकी शादी मीना के साथ कराने की कोशिश करता है। लेकिन सोचिए, यदि सेठ धनराज को राजेश का पता ही नहीं चल पाता तो.... तो राजेश और मीना यूरोप की सड़कों पर 'मैं तुझको भगा लाया हूं, तेरे घर से' गाते होते। और शायद वहीं कहीं शादी कर घर बसा लेते। क्योंकि राजेश तो मुंबई आता नहीं।

नौकर बना राजेश हो जाता irritate

नौकर बना राजेश हो जाता irritate

जिस घर के लोग चाय भी उठकर खुद नहीं ले सकते और घर का दरवाजा खोलने के लिए भी उन्हें नौकर चाहिए, वैसे घर में शायद ही कोई नौकर टिक सकता है। लेकिन राजेश तो भई थे सुपरनौकर..हर काम में माहिर। साथ ही धीरज के मामले में सोना। उनका तो मन भी सोने का था वैसे.... खैर, सोचिए यदि राजेश कुछ ही दिनों में ऊब जाता तो..तो या तो वह मीना को राम सलाम कर निकल जाता वापस अपने घर, या तो राजेश-मीना हो जाते नौ दो ग्यारह।

राजेश-मीना को नाचते गाते देख लेते दादाजी

राजेश-मीना को नाचते गाते देख लेते दादाजी

राजेश-मीना पूरे घर में घूम घूमकर गाते हैं ''तुम हम पे मरते हो, हम तुम पे मरते हैं'', साथ ही इनकी जबरदस्त डांस। लेकिन मजाल है कि कोई घर में समझ ले कि नौकर के साथ मीना नाच क्यों रही है? और तो और दादाजी भी दोनों के साथ सुर ताल मिलाकर नाचते हैं। खैर, सोचिए यदि दादाजी ने थोड़ा दिमाग लगाया होता तो.. तो राजेश होता घर के बाहर, मीना होता कमरे में बंद। और कुछ ही दिनों में बजती मीना की शादी की शहनाई, किसी और के साथ। लेकिन भई..बज जाती कहानी की बैंड।

शन्नो बुआ खोल देती पोल

शन्नो बुआ खोल देती पोल

राजेश- मीना की कहानी में मसीहा का रोल अगर किसी का था, तो वह थी शन्नो बुआ। लेकिन सोचिए, यदि शन्नो बुआ का मन बदल जाता और वह घर में राजेश का पोल खोल देती तो.. तो राजेश का सपना रह अधूरा, मीना के प्यार में लग जाती ग्रहण। और एक प्यारी सी लव स्टोरी में घिर आते दुख के बादल..so sad .. खैर, ये ट्विस्ट तो कहानी में कुछ नया एंगल भी ला सकती थी, लेकिन निर्देशक महोदय के कहानी की जब जाती बैंड।

मीना की हो जाती कहीं और शादी

मीना की हो जाती कहीं और शादी

सोचिए, यदि मीना को देखने आया वह लड़का तुरंत मीना को पसंद कर लेता तो.. तो दादाजी तुरंत ही करते तारीख पक्की, और कहानी के साथ साथ बजती मीना की बैंड। खैर बॉलीवुड फिल्मों में ऐसे सीन विरले ही होते हैं, जहां हीरो- हिरोइन साथ नहीं हो पाते। बहरहाल, जहां गोविंदा जैसा सुपर नौकर हो तो हीरोइन कैसे किसी और की हो सकती है। है न..

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    English summary
    Govinda and Karisma Kapoor starrer Movie Hero No 1 clocks 20 years

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