बॉलीवुड के खूंखार विलेन की मासूम मोहब्बत, मोहल्ले की लड़की से किया प्यार, फिर आखिरी सांस तक...

Amjad Khan Love Story: अगर बॉलीवुड के सबसे यादगार विलेन की बात हो, तो 'गब्बर सिंह' का नाम सबसे पहले ज़ुबान पर आता है। 1975 की सुपरहिट फिल्म शोले में अमजद खान द्वारा निभाया गया गब्बर का किरदार आज भी उतना ही मशहूर है, जितना उस दौर में था। उनका डायलॉग 'कितने आदमी थे?' आज भी लोगों के दिलों में गूंजता है।
पर्दे पर खलनायक का किरदार निभाने वाले अमजद, असल जिंदगी में एक सच्चे और रोमांटिक इंसान थे। उनकी पत्नी शेहला के साथ उनकी प्रेम कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं थी।
मोहल्ले से शुरू हुआ प्यार
मुंबई के बांद्रा इलाके में अमजद और शेहला एक ही कॉलोनी में पड़ोसी थे। उस वक्त अमजद बी.ए. कर रहे थे और शेहला महज 14 साल की स्कूल की छात्रा थीं। शेहला उन्हें 'जयंत अंकल' के बेटे के रूप में जानती थीं। दोनों कभी-कभी बैडमिंटन खेला करते थे। एक दिन अमजद ने मजाकिया अंदाज में कहा- 'मुझे भाई मत कहो!'
कुछ दिनों बाद स्कूल से लौटते समय अमजद ने शेहला से कहा- 'जानती हो, शेहला का मतलब होता है काली आंखों वाली। जल्दी बड़ी हो जाओ, क्योंकि मैं तुमसे शादी करूंगा।' अमजद ने जल्दी ही शादी का प्रपोजल उनके घर भेज दिया, लेकिन मशहूर लेखक-गीतकार अख्तर-उल-ईमान, जो शेहला के पिता थे, उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि उनकी बेटी अभी छोटी है।
दूरी और खतों में पनपा रिश्ता
पिता ने शेहला को पढ़ाई के लिए अलीगढ़ भेज दिया, ताकि वह अमजद से दूर रहें। लेकिन दूरी के बावजूद दोनों का प्यार खतों के जरिए बढ़ता गया। हर दिन एक-दूसरे को चिट्ठियां लिखना उनकी आदत बन गई। कुछ समय बाद शेहला की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें वापस मुंबई बुला लिया गया।
पढ़ाई से मोहब्बत तक
मुंबई लौटने के बाद अमजद ने शेहला की पढ़ाई में मदद करना शुरू कर दिया, खासकर फारसी भाषा में, जो उनकी सेकंड लैंग्वेज थी। इस दौरान उनका रिश्ता और गहरा हो गया। शेहला बताती हैं- 'मैं वेफर्स की दीवानी थी, और अमजद मुझे चिप्स खिलाकर खुश कर देते थे। मैंने अपनी पहली एडल्ट फिल्म उन्हीं के साथ देखी।'
आखिरकार शादी
कई साल एक-दूसरे को जानने के बाद, अमजद के माता-पिता शादी का प्रपोजल लेकर शेहला के घर पहुंचे और इस बार रिश्ता मंजूर हो गया। 1972 में शादी हुई और 1973 में उनके बेटे शादाब का जन्म हुआ। उसी दिन अमजद को शोले में 'गब्बर सिंह' का रोल ऑफर हुआ, एक ऐसा किरदार जिसने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया।
अधूरी मगर यादगार कहानी
अमजद और शेहला का रिश्ता करीब 20 साल चला, लेकिन 1992 में दिल का दौरा पड़ने से अमजद का निधन हो गया। शेहला कहती हैं कि अमजद का आत्मविश्वास ही उन्हें इस कठिन समय में संभाल पाया। उनकी कहानी में मासूमियत, जुदाई, स्ट्रगल, फिर मिलने और अचानक बिछड़ने का दर्द, सब कुछ है, जो इसे एक क्लासिक बॉलीवुड प्रेम कहानी बना देता है।
अमजद खान सिर्फ एक बेहतरीन एक्टर ही नहीं, बल्कि एक सच्चे आशिक, डेडिकेटेड पति और जिम्मेदार इंसान थे। उनकी और शेहला की मोहब्बत आज भी दिलों को छू जाती है।


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