बैलून से लेकर पेड़ों के सप्लायर तक, इन फिल्मों में दिये गये अनोखे क्रेडिट

कोई भी फिल्म भले ही वह हिट हो या फ्लॉप लेकिन उसे बनाने में किसी एक नहीं बल्कि सैंकड़ों लोगों का हाथ होता है। फिर चाहे वह फिल्म का डायरेक्टर, एक्टर या फिर प्रोड्यूसर हो या कैमरामैन हो, या फिर ड्रेस और प्रॉप सप्लायर हो, हर किसी के साथ मिलकर काम करने के बाद ही एक फिल्म पूरी बन पाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक फिल्म के अंत में कितने लोगों को उनके काम का क्रेडिट दिया जाता है ? फिल्म में अगर किसी घर, आंगन या फिर बराम्दा की सजावट के लिए पेड़ लगे दिखायी देते हैं तो उसे भी बतौर प्रॉप मंगवाना पड़ता है। एक फिल्म में किसी एक्टर या डायरेक्टर का जितना योगदान होता है, उतना ही योगदान सामानों के सप्लायर का भी होता है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कुछ ऐसी फिल्में बनी हैं, जिनमें इन सामानों जैसे पेड़, बलून इनके सप्लायर से लेकर दोस्तों तक को क्रेडिट दिया गया है।

दोस्त को दिया क्रेडिट :
1977 में आयी फिल्म 'धर्म-वीर' में दोस्तों को क्रेडिट दी गयी थी। इस फिल्म का निर्देशन मनमोहन देसाई ने किया था। फिल्म में जितेंद्र और धर्मेंद्र मुख्य किरदार में नजर आए थे।

बैलून मैन्युफैक्चरर :
मनमोहन देसाई के निर्देशन में बनी फिल्म 'किस्मत' में एक बैलून मैन्युफैक्चरर को क्रेडिट दिया गया था। यह फिल्म 1968 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में विश्वजीत चटर्जी और बबीता लीड रोल में नजर आए थे।

शूटिंग स्पॉट के गांव वाले :
श्याम बेनेगल के फिल्मी करियर की दूसरी फिल्म 'निशांत' की शूटिंग एक गांव में हुई थी। इस गांव का नाम पोचमपली था जिसके लोगों को बतौर कास्ट उन्होंने अपनी फिल्म में क्रेडिट दिया था। यह फिल्म 1975 में रिलीज हुई थी।

पेड़ों के सप्लायर :
फिल्म निर्देशक शेखर कपूर के निर्देशन में बनी फिल्म 'मासूम' में प्लांट सप्लायर को क्रेडिट दिया गया था। यह फिल्म 1983 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में जुगल हंसराज, नसीरुद्दीन शाह मुख्य किरदार में नजर आए थे।

एक्शन इंट्रोड्यूसिंग क्रेडिट :
साल 2001 में आयी फिल्म 'नायक' में एक्शन इंट्रोड्यूसिंग क्रेडिट दिया गया था। इस फिल्म का निर्देशन एस. शंकर ने किया था। फिल्म में मुख्य किरदार अनिल कपूर ने निभाया था।


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