दिलीप कुमार फिल्मोग्राफी- 5 दशक में 60 से ज्यादा फिल्में, 'ट्रैजेडी किंग' बनकर जीते इतने अवार्ड, बनाया रिकॉर्ड
भारतीय फिल्मों के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार ने 7 जुलाई को आखिरी सांसे ली हैं। आज भले ही दिलीप कुमार हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन अपने उम्दा अभिनय और शानदार किरदारों के साथ वो हमेशा सिनेप्रेमियों के दिलों में जिंदा रहेंगे। अपने 5 दशक के लंबे करियर में अभिनेता ने 65 से ज्यादा फिल्में की हैं। उन्हें फिल्मों का 'द फर्स्ट खान' और 'द ट्रैजेडी' किंग जैसी उपाधि दी गई थी।
दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर साल 1922 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था। उनका असली नाम यूसुफ सरवर खान था। फिल्मों में आने से पहले वह अपने पिता का कारोबार संभालते थे।

वह ब्रिटिश आर्मी कैंट में लकड़ी से बनी कॉट सप्लाई करने के लिए हर एक दिन मुंबई के दादर जाते थे। एक दिन वह चर्चगेट स्टेशन पर लोकल ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान उनकी पहचान के एक साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मसानी मिल। मसानी 'बॉम्बे टॉकीज' की मालकिन देविका रानी से मिलने जा रहे थे और वो दिलीप कुमार को भी अपने साथ ले गए। दिलीप कुमार को इस बात की बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि यह मुलाकात उनकी जिंदगी बदलने वाली थी।

युसुफ खान से बने दिलीप कुमार
बॉम्बे टॉकीज की मालिक, देविका रानी ने दिलीप कुमार को 1250 रूपए की सैलेरी पर कंपनी के साथ साइन कर लिया। उन्होंने ही युसुफ खान को नाम बदलकर दिलीप कुमार करने की सलाह दी थी। और बाद में उन्हें फिल्म 'ज्वार भाटा' में बतौर लीड हीरो साइन किया।
इसी दौरान दिलीप कुमार की पहचान अशोक कुमार से भी हुई। ये दोनों शुरुआती दिनों में दिलीप कुमार के सबसे करीब रहे थे।

जुगनु से मिली पहचान
शुरुआती कुछ फिल्मों के ना चलने के बाद, दिलीप कुमार को पहली बड़ी पहचान मिली फिल्म 'जुगनु' से। 1947 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस हिट रही थी।
इसके बाद 1948 में उनकी दो बड़ी हिट फिल्में रही थीं- शहीद और मेला।

1950 का शानदार दशक
साल 1949 में मेहबूब खान की फिल्म 'अंदाज' में दिलीप कुमार की अगली बड़ी हिट फिल्म थी। जिसमें वो राज कपूर और नरगिस के साथ दिखे थे।
1950 के दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी थीं- जोगन, बाबुल, हलचल, दीदार, देवदास, नया दौर, मधुमती..

मिली 'द ट्रैजेडी किंग' का टैग
इसी दौरान उन्हें 'द ट्रैजेडी किंग' का टैग भी मिला। लगातार कई इमोशनल फिल्में करने की वजह से दिलीप कुमार डिप्रेशन का शिकार भी हो गए थे। फिर अपनेpsychiatrist की सलाह पर उन्होंने कुछ हल्की फुल्की फिल्में कीं।

बेस्ट एक्टर अवार्ड का रिकॉर्ड
दिलीप कुमार फिल्मफेयर का बेस्ट एक्टर अवार्ड जीतने वाले पहले अभिनेता बने। यह उन्हें फिल्म दाग के लिए मिला था। उन्होंने अपने करियर में 8 बार बेस्ट एक्टर का अवार्ड जीता, जो कि अब तक का रिकॉर्ड है। फिलहाल, इस लिस्ट में उनकी बराबरी में सिर्फ शाहरुख खान हैं।

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार
1980 में उन्हें सम्मानित करने के लिए मुंबई का शेरिफ घोषित किया गया। 1995 में उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1998 में उन्हे पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज़ भी प्रदान किया गया।

मुगल-ए-आज़म
के आसिफ की फिल्म में दिलीप कुमार ने राजकुमार सलीम की भूमिका निभाई थी, जो भारतीय फिल्म इतिहास की सबसे बड़ी फिल्मों में मानी जाती है। लगातार 11 सालों तक यह सबसे ज्यादा कमाने वाली हिंदी फिल्म बनी रही। बाद में यह रिकॉर्ड हाथी मेरे साथी.. और फिर शोले ने तोड़ा।

एक लाख की फीस
दिलीप कुमार उस जमाने में पहले अभिनेता बने, जिन्हें एक लाख की फीस दी जाती थी।
1970, 1980 और 1990 के दशक में उन्होने कम फ़िल्मो में काम किया। इस समय की उनकी प्रमुख फ़िल्मे थी- विधाता (1982), दुनिया (1984), कर्मा (1986), इज्जतदार (1990) और सौदागर (1991)।

आखिरी फिल्म
1998 में बनी फ़िल्म किला उनकी आखरी फ़िल्म थी। हालांकि 1991 में आई फिल्म 'सौदागर' उनकी आखिरी बॉक्स ऑफिस हिट रही थी।

सायरा बानो से शादी
दिलीप कुमार ने अभिनेत्री सायरा बानो से 1966 में विवाह किया। विवाह के समय दिलीप कुमार 44 वर्ष और सायरा बानो 22 वर्ष की थीं। शादी के बाद सायरा बानो ने फिल्मों से दूरी बना ली थी।


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