ऑर्डर..ऑर्डर..कोर्ट..केस..कचहरी..मतलब फिल्म हिट..ऊपर से डायलॉग का बोनस!
असल जिंदगी में कोई नहीं चाहता कि किसी का कोर्ट, केस कचहरी से पाला भी पड़े। लेकिन मजेदर बात ये है कि ये सब फिल्मों में देखना हर किसी को अच्छा लगता है। जी हां बॉलीवुड में ये किसी हिट फॉर्मूला से कम नहीं है। डायरेक्टर्स को ये पता है कि कोर्ट के अंदर चलने वाली बहस, वकीलों के तर्क, गवाहों की चालाकी और जज की पैनी नजर दर्शकों में दिलचस्पी पैदा कर देती है।
[एक तो 'चोरी' ऊपर से 'हीरोगिरी'...वो भी सलमान से लेकर अजय देवगन तक!]
ऐसा नहीं है कि पहले कोर्ट रूम ड्रामा को फिल्मों में नहीं दिखाया गया है। सप्ताह ही अमिताभ बच्चन की फिल्म पिंक रिलीज होने वाली है। इसमें भी कहानी तीन लड़कियों की और एक वकील की है। फिल्म का ट्रेलर लोगों को काफी पसंद आया।
पिंक में अमिताभ बच्चन के अलावा तापसी पन्नू भी हैं। अब फिल्म कैसी है ये तो फिल्म रिलीज के बाद पता चलेगा लेकिन उम्मीद यही की जा रही है कि फिल्म अच्छी होगी।

हाल में रिलीज हुई अक्षय कुमार की रूस्तम भी एक ऐसी नौसेना अधिकारी की कहानी है जिसे खुद को कोर्ट के सामने बेगुनाह पेश करना होता है। फिल्म अब तक 150 करोड़ की कमाई कर चुकी है।
अदालत की गंभीर कार्यवाही को को इस फिल्म में हल्के फुल्के तरीके से दिखाने की कोशिश की गई। 'जौली एलएलबी' में। भारत की एक निचली अदालत में कानून को तोड मरोड कर पेश करने की वकीलों की कलाओं को बखूबी दिखाया गया।
ओह माई गॉड 2011 में आई थी जिसमें अक्षय कुमार भगवान कृष्ण बने थे फिल्म में परेश रावल ने भगवान को ही कठघरे में खड़ा कर दिया था। ये फिल्म काफी अच्छा संदेश भी समाज को देने में कामयाब रही।
2004 में अक्षय कुमार, करीना कपूर और प्रियंका चोपड़ा की ऐतराज आई थी। कोर्ट में अमरीश पुरी और परेश रावल के बीच चली नोंक-झोंक के बाद अक्षय कुमार को बचाने के लिए एक पत्नी का वकील के किरदार में आना दर्शकों को पसंद आया।
तारीख पे तारीख..तारीख पे तारीख..सनी देओल का ये डायलोग तो आपको याद होगा। फिल्म में सनी देओल वकील थे और लोग आज तक इस फिल्म को भूल नहीं पाए हैं और ना सनी देओल के डायलोग को।
1985 में सुभाष घई के निर्देशन में बनी अनिल कपूर, मीनाक्षी शेषाद्री स्टारर फिल्म 'मेरी जंग' भी अदालत के सीन से दर्शकों को अपनी ओर खीचने में कामयाब रही।
अंधा कानून को लोगों ने खूब पसंद किया था। फिल्म में हेमा मालिनी, अमिताभ बच्चन और रजनीकांत थे। इस फिल्म की कामयाबी के बाद कानून, फिल्मी सीन से आगे बढकर फिल्मों के नाम में भी शामिल हो गया और ऐसे नाम वाली फिल्मों की बाढ आ गई।
1960 मे ंभी एक फिल्म आई थी कानून। तब से लेकर आज तक कई फिल्में आई जिसे लोगों ने खूब पसंद किया और इससे पता चलता है कि इस तरह विषय पर बनी फिल्म पसंद आती है।


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