मदर्स डे- अपनी मां के साथ देंखे बॉलीवुड की ये 6 फिल्में, श्रीदेवी से लेकर स्वरा भास्कर ने निभाए यादगार किरदार

यूं तो हर बच्चे का हर दिन, हर पल मां के नाम होता है, लेकिन दुनियाभर में मांओं के नाम एक खास दिन भी रखा गया है। हर साल 9 मई को मदर्स डे मनाया जाता है। बॉलीवुड में कई फिल्में ऐसी बनी हैं, जहां मां के किरदार को बहुत खूबसूरती और मजबूती के साथ पेश किया गया है। मां और बच्चों के बीच के रिश्ते को बॉलीवुड ने कई फिल्मों में उतारा है और दिल जीता है।

80 या 90 के दशक में ज्यादातर फिल्मों में मां के किरदार को जहां बच्चों या पति के इर्द- गिर्द घूमते ही दिखाया जाता है। अब निर्माता- निर्देशकों ने एक सकारात्मक बदलाव लाया है और मां के किरदारों को भी एक मुख्य भूमिका के तहत लाने की शुरुआत है। बधाई हो में नीना गुप्ता हो या इंग्लिश विंग्लिश में श्रीदेवी.. ये किरदार दिलों दिमाग में खास छाप छोड़ते हैं।

mothers day

लॉकडाउन के इन दिनों में यदि आप अपने मां के साथ वक्त गुज़ार रहे हैं, तो इस दिन को खास बनाने के लिए आप अपनी मां के साथ घर में बैठकर इन बॉलीवुड फिल्मों को एन्जॉय कर सकते हैं।

इंग्लिश विंग्लिश

इंग्लिश विंग्लिश

गौरी शिंदे के निर्देशन में बनी यह फिल्म हर बच्चे को अपनी मां के साथ बैठकर देखनी चाहिए। एक घर में मां का क्या किरदार होता है, उनकी क्या महत्ता होती है, उनके क्या सपने होते हैं और इच्छाएं होती हैं.. यह सब इस फिल्म में खूबसूरती से परोसा गया है। फिल्म में मुख्य किरदार दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी ने निभाया है।

सीक्रेट सुपरस्टार

सीक्रेट सुपरस्टार

अद्वेत चंदन के निर्देशन में बनी यह एक बेटी के सपने पूरे होने की कहानी है.. लेकिन उसी के साथ जुड़ी है एक मां की ख्वाहिशें और उसकी जिंदगी के आज़ाद होने की कहानी। फिल्म में जायरा वसीम और मेहर विज़ मां- बेटी के किरदार में दिखीं थीं।

निल बट्टे सन्नाटा

निल बट्टे सन्नाटा

अश्विनी अय्यर तिवारी के निर्देशन में बनी यह फिल्म मां- बेटी की कहानी है। छोटे शहर में हर दिन की आजीविका चलाने के मशक्कत के बीच मां अपनी बेटी को कुछ बड़ा बनाने का सपना देखती है.. इस कहानी को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है।

थप्पड़

थप्पड़

अनुभव सिन्हा की यह फिल्म एक अति महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल है..और इसे मां के बैठकर इसीलिए जरूर देखें और समझाएं कि शादी में compromise जरूरी नहीं। घरेलू हिंसा चाहे किसी भी स्तर का हो.. वह बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए और अपने आत्म सम्मान के शादी से अलग होना हमेशा एक विकल्प होता है।

बधाई हो

बधाई हो

बधाई हो आज के जमाने में बनी एक दिलचस्प पारिवारिक फिल्म है। इस फिल्म की पूरी कहानी कहीं ना कहीं मां के कंधों पर है। पति, बच्चों और ससुराल के साथ एक औरत के रिश्तों को बखूबी दिखाया गया है।

नीरजा

नीरजा

इस फिल्म में शबाना आज़मी के सोनम कपूर की मां का किरदार निभाया है.. और क्या खूब निभाया है। फिल्म में एक ऐसी मां का किरदार है, जो हर फैसले में अपने बेटी के साथ खड़ी दिखती है। उसके फैसलों पर विचार करती है, मशवरा देती है.. और गर्व करती है।

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