वेटर की नौकरी से कमाए पैसे, नमकीन भी बेची, 45 की उम्र तक नहीं था घर लेकिन एक सलाह ने बदल डाली पूरी जिंदगी

Boman Irani Struggle: बोमन ईरानी, जो इंडस्ट्री के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं, उन्होंने हमेशा अपनी जर्नी से हमें प्रेरित किया है। खैर, हम सभी जानते हैं कि कड़ी मेहनत का फल मिलता है और बोमन ईरानी का स्ट्रगल इस बात का जीता-जागता नमूना है। आइए आज एक नजर डालते हैं कि कभी वेटर का काम करने वाले वह भारत के पसंदीदा अभिनेता कैसे बन गए।
बोमन ईरानी का जन्म 2 दिसंबर 1959 को मुंबई के एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके जन्म से छह महीने पहले ही उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी तीन बड़ी बहनों का नाम शिरीन, शेनाज और रोशन है। बोमन को बचपन में डिस्लेक्सिया की बीमाीर हो गई थी, लेकिन वो बाद में ठीक हो गए थे।
उन्होंने अपनी हाई स्कूल की शिक्षा सेंट मैरी स्कूल से पूरी की और फिर मुंबई के मीठीबाई कॉलेज में 2 साल का वेटर कोर्स किया। बोमन ने अपनी मां के साथ मुंबई में बेकरी और स्नैक्स की दुकान चलाने में भी मदद की। दुर्भाग्य से, उनकी मां जेरबानू ईरानी का जून 2021 में 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
कम कॉन्फिडेंस होने की वजह से, अपनी स्पीच को सुधारने के लिए सिंगिंग की ओर रुख किया और उन्हें बतौर सिंगर काफी पसंद किया गया। बोमन की मां ने ग्रांट रोड पर अपनी फरसाण और नमकीन की दुकान संभालते हुए परिवार की जिम्मेदारी संभाली। बोमन ने कॉलेज खत्म करने के बाद परिवार में योगदान देने का फैसला किया।
ताज महल पैलेस होटल में काम करते हुए बोमन ईरानी स्कूल क्रिकेट और फुटबॉल मैचों की तस्वीरें 20 से 30 रुपये में बेचते थे। जब बोमन की मां का एक्सीडेंट हो गया तो उन्होंने परिवार की फरसाण दुकान की देखभाल के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी। अगले 14 सालों में, उन्होंने बिजनेस संभाला, शादी की और उनके बच्चे हुए। इतनी जिम्मेदारियों के बावजूद बोमन को लगा कि कुछ कमी है। अपनी पत्नी से प्रोत्साहित होकर, उन्होंने बाहर निकलने और नए अवसर तलाशने का फैसला किया।
फोटोग्राफी के शौक को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने भारतीय मुक्केबाजी एसोसिएशन के अध्यक्ष एस्पी अदजानिया को मुंबई में विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप को कवर करने की परमिशन देने के लिए मना लिया। बोमन ने इस सुनहरे मौके के बदले अदजानिया के ऑफिस में काम किया। इससे उनके लिए भारतीय बॉक्सिंग एसोसिएशन और बाद में नॉर्वेजियन बॉक्सिंग टीम के लिए ऑफिशियल फोटोग्राफर बनने का रास्ता आगे बढ़ा, जहां उन्होंने अपने पेंटाक्स K1000 कैमरे से नॉर्वेजियन बॉक्सर ओले क्लेमेत्सेन की तस्वीरें खींचीं। एक इंटरव्यू में बोमन ने कबूल किया था कि 47 साल की उम्र तक उनके पास घर नहीं था।
एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब एक दोस्त ने उन्हें एक एडवरटाइजमेंट के लिए ऑडिशन देने का सुझाव दिया और सेलेक्शन होने पर बोमन ने 180 से ज्यादा एडवरटाइजमेंट में काम किया। इससे उन्हें कम बजट की शॉर्ट फिल्म में एक्ट करने का मौका मिला, जहां एक क्लिप ने प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा का ध्यान खींचा।
विधु विनोद चोपड़ा का ध्यान आकर्षित करने के बाद, उन्होंने बोमन ईरानी को 2 लाख रुपये की फीस पर मुन्ना भाई एमबीबीएस में प्रोफेसर जे. अस्थाना के रोल की पेशकश की। शुरू में फिल्म को लेकर झिझक रहे बोमन ने राजकुमार हिरानी की सोच पर भरोसा किया और यह भूमिका निभाई। दिलचस्प बात यह है कि बोमन से पहले इसी भूमिका के लिए अमरीश पुरी पर विचार किया गया था लेकिन उन्होंने मना कर दिया था।
अपने एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा, '47 साल की उम्र तक मेरे पास अपने नाम पर कोई घर नहीं था। एक समय था जब मेरी इमारत की मरम्मत करनी पड़ी थी क्योंकि मैं अपने बेड से आसमान देख सकता था। जीवन कठिन हो सकता है, बचपन कठिन हो सकता है लेकिन कुछ लोगों को यह आसानी से मिल जाता है। लेकिन जिंदगी का असली मजा तब ही आता है, जब वह कठिन होता है।'


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