संघर्षों से शुरू हुआ बिग बी अमिताभ बच्चन का सफर पहुंचा मेगा स्टार के मुकाम तक
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन यूं ही मेगास्टार अमिताभ बच्चन नहीं बन गये। जीवन के 80 दशक पार कर चुके अमिताभ को सफलता के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी है। उम्र के इस पड़ाव पर आकर भी अमिताभ आज पूरी तरह से फिट हैं। फिल्मों में अभी भी सक्रिय अमिताभ बच्चन अपने हर एक किरदार को पूरी शिद्दत के साथ निभाते हैं। सिर्फ फिल्म ही नहीं अमिताभ अपने निजी जीवन में भी हर एक चरित्र, बेटा, पति, पिता, नाना और दादा को अच्छी तरह निभाते हैं। 11 अक्टूबर को अमिताभ बच्चन अपने भरे पूरे परिवार और देश-विदेश में फैले लाखों-करोड़ों फैंस के साथ अपना 80वां बर्थडे सेलिब्रेट करेंगे। मूल रूप से इलाहाबाद के रहने वाले अमिताभ बच्चन का शुरुआती कॅरियर काफी संघर्षों से भरा था। फिल्मों में शुरुआती असफलता के बाद उन्हें कई लोगों ने घर वापस लौटने की सलाह भी दे डाली थी।
आइए आपको बताते हैं अमिताभ बच्चन का जीरो से सुपरस्टार बनने तक के सफर की कहानी

एक्टर नहीं बन पाए टैक्सी चलाकर गुजारा करने का सोचा था :
अमिताभ बच्चन को फिल्मों में एंग्री यंग मैन का टैग उनके दमदार आवाज की बदौलत मिला था। फिल्मों में काम करने से पहले अमिताभ ने ऑल इंडिया रेडियो में काम करने की इच्छा जताई थी। लेकिन उनकी आवाज की वजह से ही उन्हें वहां रिजेक्शन झेलना पड़ा था। एक इंटरव्यू के दौरान अमिताभ ने बताया था कि वह जब मुंबई आए थे, तब वह अपने साथ ड्राइविंग लाइसेंस लेकर आए थे। अमिताभ ने सोचा था कि अगर वह फिल्मों में सफल नहीं हो पाए तो टैक्सी चलाकर ही वह अपना गुजारा करेंगे। आर्थिक तंगी की वजह से शुरुआती दौर में अमिताभ को कई बार मरीन ड्राइव पर बेंच पर सोकर ही रात बितानी पड़ी थी।

पहले स्क्रीन टेस्ट में मिला रिजेक्शन :
अमिताभ बच्चन जब दिल्ली से मुंबई में आने के बारे में सोचा तो उनकी मां तेजी बच्चन भी उनके कॅरियर को लेकर काफी परेशान थी। तेजी बच्चन ने नरगिस से अमिताभ के स्क्रीन टेस्ट के लिए कहा था। इसके बाद ही नरगिस ने मोहन सहगल से अमिताभ के स्क्रीन टेस्ट की बात की और सहगल ने भी अमिताभ के स्क्रीन टेस्ट के लिए हां कह दिया था। इतना कुछ करने के बावजूद अमिताभ स्क्रीन टेस्ट पास नहीं कर पाए और वह वापस दिल्ली अपनी नौकरी पर लौट गये थे।

नौकरी को चुनकर स्क्रीन टेस्ट के लिए कहा था ना :
अमिताभ बच्चन का शुरुआती कॅरियर काफी उतार-चढ़ाव से भरा था। विख्यात कवि हरिवंश राय बच्चन के बेटे होने के बावजूद अमिताभ को काफी संघर्ष करना पड़ा था। उनके कॅरियर में एक समय ऐसा भी आया था जब उन्हें अपनी नौकरी और फिल्म की स्क्रीन टेस्ट में से किसी एक को चुनना था और अमिताभ ने अपनी नौकरी को चुना था। दरअसल उस समय अमिताभ एक नौकरी करते थे, जिसमें उनको 1600 रुपये सैलरी मिलती थी जो उस समय काफी ज्यादा था। उसी समय अमिताभ को मनोज कुमार की एक फिल्म के लिए स्क्रीन टेस्ट का ऑफर आया था लेकिन अमिताभ ने अपनी नौकरी को चुनना सही समझा। बाद में अमिताभ को फिल्म 'सात हिन्दुस्तानी' में काम करने का मौका मिला जो फ्लॉप हुई।

अपनी पहली फिल्म 'सात
12 फ्लॉप फिल्मों के बाद मिला एंग्री यंग मैन का टैग :हिन्दुस्तानी' के फ्लॉप होने के बाद अमिताभ बच्चन की लगातार 12 फिल्में फ्लॉप होती रही। यहीं वह दौर था जब लोगों ने अमिताभ को वापस लौट जाने या फिर अपने पिता की तरह कवि बन जाने की सलाह दी थी। लेकिन अमिताभ ने हार नहीं मानने का फैसला लिया था। इस बीच उन्हें प्रकाश मेहरा की फिल्म 'जंजीर' में काम करने का मौका मिला जो सुपरहिट साबित हुई और इस फिल्म के बाद अमिताभ को एंग्री यंग मैन का टैग मिल गया।

पिता ने कहा शादी करने के बाद ही जाओ विदेश :
फिल्म 'जंजीर' में काम करने के दौरान अमिताभ ने जया से वादा किया था कि अगर यह फिल्म हिट हुई तो वे विदेश में छुट्टियां मनाने जाएंगे। लेकिन अमिताभ के पिता हरिवंश राय बच्चन ने अमिताभ से कहा कि अगर उन्हें जया के साथ विदेश जाना है तो शादी करने के बाद जाना होगा। इसलिए बेहद शॉर्ट नोटिस पर अमिताभ ने जया संग सात फेरे लिये और इसके बाद दोनों तीन सप्ताह की छुट्टियां मनाने लंदन चले गये।


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