पहली ही फ़िल्म में आधी शूटिंग के बाद किया बाहर, 11 रुपए मिली फीस, एक मूवी ने बदली किस्मत

आशा पारेख अपने दौर की सबसे मशहूर हसीना मानी जाती थी। बता दें कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में की। स्क्रीन पर बेबी आशा पारेख के नाम से जाना जाता था। बता दें कि सबसे पहले आशा पारेख को डायरेक्टर बिमल रॉय ने एक फंक्शन में स्टेज डांस करते हुए देख लिया था। उस वक्त उन्होंने फिल्म 'मां' के लिए एक्ट्रेस को साइन कर लिया। यह बात साल 1952 की है और उसी समय एक्ट्रेस महल 10 तारीख की थी। आशा ने फिल्मों में चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में काम करना शुरू किया। लेकिन बाद में स्कूल की पढ़ाई की वजह से एक्टिंग से दूरी बना ली। एक बार फिर से उन्होंने 16 साल की उम्र में दोबारा फिल्मों में आने का सोचा। लेकिन उनके साथ कुछ ऐसा हुआ कि वह काफी दादा हैरान हो गई थी।
₹11 की साइनिंग अमाउंट देकर एक्ट्रेस को फिल्म के लिए किया था साइन
आशा पारेख ने एक इंटरव्यू के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि उन्हें बतौर एक्ट्रेस उनकी पहली फिल्म से ही बाहर कर दिया गया। दरअसल डायरेक्टर विजय भट्ट ने आशा पारेख को फिल्म 'गूंज उठी शहनाई' के लिए साइन किया। इसके लिए एक्ट्रेस को ₹11 की साइनिंग अमाउंट भी दे दी थी। पहले वह चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर कई सारी फिल्मों में काम कर चुकी थी। लेकिन अब फाइनली हीरोइन के तौर पर उनका सपना पूरा हो रहा था और इसी वजह से वह काफी खुश थी।
डायरेक्टर ने शूटिंग के कुछ दिन बाद एक्ट्रेस को किया बाहर
आशा पारेख का यह सपना चकनाचूर तब हो गया जब कुछ ही दिन की शूटिंग के बाद में डायरेक्टर ने उन्हें फिल्म से बाहर कर दिया। यहां तक कि एक्ट्रेस को डायरेक्टर ने यह तक कह दिया था कि वह स्टार मटेरियल नहीं है। आशा पारेख की जगह डायरेक्टर ने उस समय की जानी-मानी अभिनेत्री अमीता को उस फिल्म के लिए साइन कर लिया था।
रिजेक्शन के 8 दिन बाद की नासिर हुसैन ने स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाया
आशा पारेख की किस्मत उन्हें कहीं और ही लेकर जाना चाहती थी। फिल्म से निकाल देने के बाद तकरीबन 8 दिन के बाद में आशा पारेख को नासिर हुसैन ने अपनी फिल्म 'दिल देके देखो' में स्क्रीन टेस्ट के लिए इनवाइट किया। लेकिन आशा पारेख कौन की पहली ही फिल्म से रिजेक्ट कर दिया गया था और वह इसी लिए काफी ज्यादा डरी हुई थी। लेकिन उन्होंने फिर भी ऑडिशन दिया और इसमें वह पास हो गई। नासिर हुसैन ने आशा पारेख को 'दिल देके देखो' फिल्म में शम्मी कपूर के ऑपोजिट में साइन किया था।
1996 में फिल्मों को किया अलविदा
इसी के साथ आपको बता दें कि आशा पारेख की यह फिल्म साल 1959 में रिलीज हुई और ब्लॉकबस्टर रही। इस फिल्म के जरिए वह रातों-रात स्टार बन गई थी। उनके पास में फिल्मों की लाइन लगने लगी। बता दें कि उन्होंने कभी भी इसके बाद में पीछे मुड़कर नहीं देखा। लेकिन साल 1996 में उन्होंने फिल्मों को अलविदा कहा और अपनी एक डांस एकेडमी खोली। बता दें कि मुंबई के सांताक्रूज में आशा पारेख नाम पर एक हॉस्पिटल भी है।


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