अनिरुद्धाचार्य की लव लाइफ, शादी के 13 सालों बाद भी बीवी को दी ऐसा काम करने की खुली आजादी
Anirudhacharya Maharaj Love Story: अनिरुद्धाचार्य महाराज आज देश के सबसे चर्चित कथावाचकों में गिने जाते हैं। सोशल मीडिया पर उनके मजेदार जवाब, देसी अंदाज और धार्मिक कथाओं के क्लिप्स आए दिन वायरल होते रहते हैं। करोड़ों लोग उन्हें सिर्फ एक कथावाचक नहीं बल्कि आध्यात्मिक गुरु के तौर पर भी मानते हैं।

यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। लेकिन जितनी चर्चा उनकी कथाओं की होती है, उतना ही लोग उनकी निजी जिंदगी के बारे में जानना चाहते हैं। खासतौर पर उनकी पत्नी और परिवार को लेकर लोगों में काफी दिलचस्पी रहती है।
मध्य प्रदेश में हुआ था जन्म
अनिरुद्धाचार्य महाराज का जन्म 27 सितंबर 1989 को मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका असली नाम अनिरुद्ध तिवारी बताया जाता है। महाराज जी अपनी कथाओं में कई बार बता चुके हैं कि उनके पिता उनके पहले गुरु थे। उनके पिता राम नरेश तिवारी मंदिर में पूजा-पाठ किया करते थे और धार्मिक स्वभाव के थे। बचपन से ही उन्होंने अनिरुद्धाचार्य को धर्म और अध्यात्म की शिक्षा दी। वहीं उनकी मां छाया बाई ने उन्हें संस्कार और जीवन जीने का तरीका सिखाया। यही वजह है कि बचपन से ही उनका मन आध्यात्मिकता की तरफ झुक गया।
वृंदावन आने के बाद बदली जिंदगी
बताया जाता है कि किशोरावस्था में ही अनिरुद्धाचार्य घंटों मंदिरों में भक्ति और ध्यान में लीन रहते थे। लेकिन उनकी जिंदगी का असली मोड़ तब आया जब वह मध्य प्रदेश छोड़कर वृंदावन आ गए। वृंदावन में रहकर उन्होंने धर्म और आध्यात्मिक विषयों की गहराई से पढ़ाई की। घंटों ध्यान, चिंतन और साधना में समय बिताने लगे। धीरे-धीरे उनकी कथाएं लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगीं और आज हालात ये हैं कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उन्हें सुनना पसंद करते हैं।
पत्नी आरती तिवारी के साथ जीते हैं खुशहाल जिंदगी
अनिरुद्धाचार्य महाराज की पत्नी का नाम आरती तिवारी है। वह लाइमलाइट से दूर रहती हैं, लेकिन महाराज जी की जिंदगी में उनका बहुत बड़ा योगदान माना जाता है।दोनों के दो बेटे हैं और सोशल मीडिया पर कई बार परिवार की तस्वीरें भी सामने आ चुकी हैं। महाराज जी अपनी कथाओं में अक्सर शादी और अच्छे जीवनसाथी की अहमियत के बारे में बात करते हैं।
उनका मानना है कि किसी भी इंसान की सफलता के पीछे परिवार और पत्नी का साथ बहुत जरूरी होता है। वह कहते हैं कि सही जीवनसाथी इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकता है।
शादी के बाद पत्नी की पढ़ाई पर दिया जोर
अनिरुद्धाचार्य महाराज की जिंदगी का सबसे खास पहलू यह माना जाता है कि उन्होंने शादी के बाद अपनी पत्नी की पढ़ाई रुकने नहीं दी। एक कथा के दौरान उन्होंने खुद बताया था कि उन्होंने अपनी पत्नी को आगे पढ़ने के लिए कहा और कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए कहा। इतना ही नहीं, उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च भी खुद उठाया।
महाराज जी का कहना है कि शिक्षा ही महिलाओं को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाती है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि उनकी पत्नी ने साइकोलॉजी में PhD तक की पढ़ाई की है।
पत्नी की परीक्षा के समय संभाला घर और बच्चे
अपनी एक कथा में अनिरुद्धाचार्य ने यह भी बताया था कि जब उनकी पत्नी पढ़ाई और एग्जाम की तैयारी में बिजी रहती थीं, तब वह घर और बच्चों की जिम्मेदारी खुद संभालते थे। उनकी यह सोच लोगों को काफी पसंद आती है, क्योंकि वह सिर्फ मंच से उपदेश नहीं देते बल्कि अपनी निजी जिंदगी में भी उन बातों को निभाने की कोशिश करते हैं।


Click it and Unblock the Notifications




