झुग्गियों में ये काम करने पर मजबूर हुई बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस, 7 साल में बदल चुकी हैं जिंदगी

Anu Aggarwal,

फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर देखने को मिलता है कि सितारे अपनी पहली ही फिल्म से काफी ज्यादा चर्चा बटोर रहते हैं और बाद में गुमनाम हो जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही अभिनेत्री के बारे में बताने वाले हैं जिन्होंने अपने शुरुआती करियर में काफी लोकप्रियता हासिल की।लेकिन एक हाथ से ने उनके करियर को तबाह करके रख दिया और आज वह फिल्म इंडस्ट्री से दूर है। दरअसल हम बात कर रहे हैं अनु अग्रवाल की।

अनु अग्रवाल ने साल 1988 में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और साल 1990 में रिलीज हुई फिल्म आशिकी से वह रातों-रात छा गई थी। अनु अग्रवाल को आशिकी गर्ल के नाम से जाना जाने लगा था। बाद में उन्होंने कुछ और फिल्मों में काम किया। लेकिन साल 1997 में अनु अग्रवाल ने बिहार स्कूल आफ योगा ज्वाइन किया और वहां पर कर्म योगी की तरह रहने लग गई थी। उन्होंने फिल्में छोड़कर कर्मयोगी बनकर रहना सही समझा।

अनु अग्रवाल इसी के चलते अपना सामान लेकर आने के लिए मुंबई जा रही थी। इसी दौरान वह भयानक एक्सीडेंट का शिकार हुई और बाद में वह कोमा में चली गई। उनकी याददाश्त भी चली गई थी। तकरीबन डेढ़ महीने कमा में रहने के बाद डॉक्टर भी उनके बचने की उम्मीद खो चुके थे। एक इंटरव्यू के दौरान एक्ट्रेस ने बताया था कि जब उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था तो उनके माता-पिता को डॉक्टर ने साफ कह दिया था कि यह मुश्किल से 2 से 3 साल ही जीवित रह पाएंगी।

दरअसल एक ऐसा वक्त आया था जब अनु अग्रवाल की हालत ऐसी हो चुकी थी कि उनका दिमाग भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। उन्हें कुछ भी याद नहीं रहता था। उन्होंने अल्फाबेट तक को दोबारा याद किया। लेकिन जब वह एक्सीडेंट से उभर कर आई तो उन्होंने योग और अध्यात्म की तरफ रुख किया। उन्होंने खुद को भी योग से ही ठीक किया। ठीक होने के बाद अनु अग्रवाल संन्यासनी बन गई और अपना सिर मुंडवा दिया। अनु अग्रवाल ने तो अपना घर और बाकी सामान भी बेच दिया था।

अनु अग्रवाल ने कुछ साल तक संन्यासनी की तरह बीते और फिर AAF यानी कि अनु अग्रवाल फाउंडेशन की शुरुआत की। इस फेडरेशन के तहत अनु अग्रवाल डिप्रेशन के शिकार और मेंटल हेल्थ की समस्या वाले लोगों को आर्थिक मदद देने लगी। इस फेडरेशन के जरिए उन्होंने ढाई लाख से ज्यादा लोगों की जिंदगी बदली। उन्होंने फाउंडेशन से जुड़ने के लिए कुछ ऐसे लोगों की तलाश की जो की काफी कमजोर थे। पहले बच्चे और फिर महिलाओं को जोड़ा गया। एक्ट्रेस ने पहले खुद को योग से ठीक किया और बाद में बाकी लोगों की जिंदगी बदली। उनकी खुद की याददाश्त आने में 3 साल लगे।

एक इंटरव्यू के दौरान अनु अग्रवाल ने बताया था कि मुंबई की योगियों में भी वह योग सीखने जाती हैं। साल 2014 में एक कांफ्रेंस के दौरान वह बताती है कि वह एक एनजीओ के संपर्क में आ गई थी जो कि मुंबई की झोपड़िया में रहने वाले बच्चों के लिए कार्य किया करता था। उन्हें वहां के बच्चों का हाल देखकर काफी दुख हुआ। झुग्गियों में रहने वाले बच्चे जिंदा लाश की तरह रह रहे थे। उनमें कोई तो एनर्जी नहीं थी और ना ही किसी चीज पर वह रिस्पांस देते थे। इसी के चलते उन्होंने अपने फाउंडेशन के जरिए योग सिखाने का फैसला लिया और उनकी मदद की।

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