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    सबसे खतरनाक दमदार विलेन से लेकर सबसे पॉपुलर पिता, जिनकी आंखों से ही थर्रा जाते थे दर्शक

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    अमरीश पुरी फिल्म इंडस्ट्री के उन कलाकारों में हैं, जिन्होंने खलनायक बनकर भी दर्शकों का खूब दिल जीता है। इन्होंने क्रूर से क्रूर किरदार निभाए हैं, जो आज भी लोगों को याद हैं। फिल्म नगीना का बाबा भैरौनाथ हो या मिस्टर इंडिया का मोगैंबो.. अमरीश पुरी ने अपने किरदारों से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी है।

    बॉलीवुड के सबसे खतरनाक और सबसे पॉपुलर खलनायकों का नाम यदि लिया जाए तो शायद हर किसी की लिस्ट में अमरीश पुरी का नाम जरूर शामिल होगा। लेकिन विलेन बनने के अलावा उन्हें पिता के किरदारों में भी खूब पसंद किया गया है। घातक में सनी देओल के साथ निभाए उनके रोल ने कईयों को इमोशनल किया था।

    आज अभिनेता की जन्मतिथि पर हम उनके यादगार फिल्मी सफर पर नजर डाल रहे हैं। 35 साल के अपने करियर में उन्होंने लगभग 400 फिल्में दी थीं। अमरीश पुरी की पहली फिल्म थी प्रेम पुजारी (1970), जबकि आखिरी फिल्म रही सुभाष घई निर्देशित किसना (2005)।

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    22 जून 1932 को पंजाब में अमरीश पुरी का जन्म हुआ था। शुरुआत में जब उन्होंने बॉलीवुड की ओर रुख किया तो कई निर्माताओं ने रिजेक्ट कर दिया। लिहाजा, फिर वो थियेटर की ओर चल दिये। 60 के दशक में अमरीश पुरी ने रंगमंच में अभिनय कर खूब नाम कमाया।

    मुंबई में शुरुआत

    मुंबई में शुरुआत

    मुंबई में शुरुआती दिनों में वे बैंक में नौकरी करते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात उर्मिला दिवेकर से हुई जो बाद में जाकर उनकी पत्नी बनीं।

    लगातार थियेटर करने के बाद अमरीश पुरी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 1971 की प्रेम पुजारी से की। इस फिल्म में उनका छोटा सा रोल था।

    80 का यादगार दशक

    80 का यादगार दशक

    उनका सफर 1980 के दशक में काफी यादगार साबित हुआ था। इस पूरे दशक में उन्होंने बतौर खलनायक कई बड़ी फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी.. जैसे कि नसीब, विधाता, कुली, हीरो, मेरी जंग, नगीना, मिस्टर इंडिया..

    मोगैंबो खुश हुआ

    मोगैंबो खुश हुआ

    1987 में शेखर कपूर की फिल्म मिस्टर इंडिया में मोगैंबो की भूमिका कितनी पॉपुलर रही, यह शायद बच्चा बच्चा जानता है। इस फिल्म में अमरीश पुरी का यह डॉयलॉग 'मोगैंबो खुश हुआ' इतना लोकप्रिय हुआ कि इस डॉयलॉग ने उन्हें रातों रात स्टार बना दिया।

    कुछ पॉजिटिव, कुछ निगेटिव

    कुछ पॉजिटिव, कुछ निगेटिव

    1990 के दशक में उन्होंने एक ओर दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, घायल और विरासत में अपनी भूमिका के जरिए सभी का दिल जीता था। वहीं, कोयला में राजा साहब की भूमिका में एक बार फिर विलेन बनकर तहलका मचाया।

    कई भाषाओं में किया है काम

    कई भाषाओं में किया है काम

    अमरीश पुरी ने हिंदी के अलावा कन्नड़, पंजाबी, मलयालम, तेलुगू और तमिल फिल्मों में भी काम किया है। उन्होंने हॉलीवुड फिल्म में भी काम किया।

    सबसे मंहगे विलेन

    सबसे मंहगे विलेन

    अमरीश पुरी की हिंदी सिनेमा में मांग इतनी थी कि एक समय ऐसा आया जब वहहिंदी फिल्मों के सबसे महंगे विलेन बन गए।कहा जाता है कि एक फिल्म के लिए वह एक करोड़ रुपये तक फीस ले लेते थे।

    लोग मुझे देखने थियेटर आते हैं

    लोग मुझे देखने थियेटर आते हैं

    अपनी फीस को लेकर अभिनेता ने एक इंटरव्यू में कहा था- जब मैं अपने अभिनय से समझौता नहीं करता तो मुझे फीस कम क्यों लेनी चाहिए। निर्माता को अपने वितरकों से पैसा मिल रहा है क्योंकि मैं फिल्म में हूं। लोग मुझे एक्टिंग करते हुए देखने के लिए थियेटर में आते हैं। फिर क्या मैं ज्यादा फीस का हकदार नहीं हूं?

    निजी जीवन में थे शराब से दूर

    निजी जीवन में थे शराब से दूर

    खास बात है कि फिल्मों में अमरीश पुरी को कई बार शराब और नशे में डूबा हुआ दिखाया गया लेकिन असल जिंदगी में वह शराब से बिलकुल दूर रहते थे।

    सुभाष घई के साथ रिश्ता

    सुभाष घई के साथ रिश्ता

    अमरीश पुरी ने सुभाष घई की कई फिल्मों में काम किया है- राम लखन, परदेस, यादें, ताल, मेरी जंग, हीरो.. यहां तक की अभिनेता की अंतिम फिल्म भी सुभाष घई के साथ ही रही- किसना..

    English summary
    Today on Amrish Puri's birth anniversary, lets remember his iconic roles, from most dangerous villain to most adored father.
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