आशिकी को UPSC परीक्षा बताने वाली रांझणा के 8 साल: पढ़िए सोनम - धनुष की फिल्म के बेस्ट डायलॉग्स
अब प्यार ना हुआ तुम्हारा, UPSC की परीक्षा हो गया है, 10 साल से क्लियर ही नहीं हो रहा है। आनंद एल राय की रांझणा में जब कुंदन का दोस्त मुरारी उससे ये डायलॉग कहता है तो हर कोई इस एक डायलॉग से मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब का फैन हो गया था। धनुष, सोनम कपूर, अभय देओल, मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब, स्वरा भास्कर स्टारर रांझणा की रिलीज़ को 8 साल पूरे हो चुके हैं।
और फैन्स आज भी इस फिल्म के मुरीद हैं। फिल्म में सब कुछ परफेक्ट मात्रा में था - ड्रामा, डायलॉगबाज़ी, आशिकी, डांस और म्यूज़िक। वो सब जो एक बॉलीवुड मसाला फिल्म बनाने के लिए चाहिए होता है।

हालांकि फिल्म में दिक्कतें भरपूर थीं। लेकिन फिर भी फिल्म उस वक्त लोगों को पसंद आई थी। आनंद एल राय की इस फिल्म में वो एक टिपिकल देसी आशिक बने थे। फिल्म से कुंदन का एक एक डायलॉग फैन्स को ज़ुबानी रट चुका है।
हालांकि इसमें हिमांशु शर्मा के लिखने का अंदाज़ भी था लेकिन धनुष की तमिल अंदाज़ में हिंदी बोलने की सच्ची कोशिश ने ही फैन्स का दिल जीता। आपको याद दिलाते हैं रांझणा के बेस्ट कुंदन डायलॉग्स

रांझणा का कुंदन
मेरे सीने की आग या तो मुझे ज़िंदा कर सकती थी या फिर मुझे मार सकती थी, पर साला अब कौन उठे, कौन फिर से मेहनत करे दिल लगाने को, तुड़वाने को, अबे कोई तो आवाज़ देके रोक लो, ये जो लड़की मुर्दा सी आंखें लिए बैठी है बगल में , आज भी हां बोल दे तो महादेव की कसम वापस आ जाएंगे, पर नहीं अब साला मूड नहीं है, आंखें मूंद लेने में ही सुख है, सो जाने में ही भलाई है, पर उठेंगे किसी दिन, उसी गंगा किनारे डमरू बजाने को, उन्हीं बनारस की गलियों में दौड़ जाने को, किसी ज़ोया के इश्क में फिर से पड़ जाने को।

कुंदन की आशिकी
तुमने भी बहुत आखिरी तक बेवकूफ बनाया ज़ोया, तुम्हें क्या लगता है ज़ोया तुम बहुत हूर की परी हो? तुमसे प्यार करना मेरा टैलेंट है ज़ोया। इसमें तुम्हारा कोई हाथ नहीं है। तुम्हारी जगह कोई भी होती ना, तो मैं उससे भी इतना ही टूट के प्यार करता। तुम्हें क्या लगता है ज़ोया, कुंदन के लिए पूरे बनारस में एक तुम्हीं हो? तुम्हारी शादी वाले दिन शादी करेंगे हम, चाहे काली कुतिया से कर लें पर करेंगे, और जहां तक रही तुम्हारी शादी, उसमें भी सब कुछ करेंगे, मर जाएंगे लेकिन आज के बाद तुम्हारा नाम भी लिया तो मैं एक बाप की औलाद नहीं।

कुंदन की डायलॉगबाज़ी
नमाज़ में वो थी लेकिन ऐसा लगा कि दुआ हमारी कुबूल हो गई।

कुंदन का अल्हड़पन
मेरे पीछे स्कूटर में बैठना पड़ेगा, मैं ब्रेक मारूंगा तो मुझपे गिरना पड़ेगा, मेरे साथ नाचना गाना पड़ेगा, गर्लफ्रेंड ना सही, फील ही दे दे।

कुंदन का एटीट्यूड
ये बनारस है और लौंडा साला यहां भी हार गया तो जीतेगा कहां?

कुंदन की समझदारी
हम खून बहाएं, तुम आंसू बहाओ, साला आशिकी ना हो गया, लाठीचार्ज हो गया।

कुंदन का बेबाकपन
हमें अपने गाल पर थप्पड़ से ज़्यादा उसके गाल पर पप्पी का सुख था।

कुंदन का मसखरीपन
ऐ रिक्शावाले, पैसे मत लेना मैडम से - भाभी हैं तुम्हारी।

कुंदन का अक्खड़पन
सॉरी तो मैंने अपने बाप तक को नहीं बोला जब मेरी गलती थी। अब तो ना मेरी गलती है और ना आप मेरे बाप हो।

कुंदन का रांझणापन
पहले तो अपने दिल की रज़ा जान जाईए, फिर जो निगाह - ए - यार कहे मान जाईए, कुछ कह रही हैं आपकी धड़कनें, मेरी सुनिए तो दिल का कहा मान जाईए, एक धूप सी जमी है निगाहों के आसपास, कि आप हैं तो आप पे कुर्बान जाईए।


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