अमिताभ बच्चन की डॉन के 44 साल: बॉक्स ऑफिस पर कमाया था 900% प्रॉफिट, 40 पान खाकर की एक गाने की शूटिंग

अमिताभ बच्चन की आईकॉनिक फिल्म डॉन की रिलीज़ को आज 44 साल पूरे हो चुके हैं। फिल्म 12 मई 1978 को रिलीज़ हुई थी और ये अमिताभ बच्चन के करियर की सबसे सफल फिल्मों में से एक है। डॉन ना सिर्फ हिंदी सिनेमा के इतिहास की एक यादगार फिल्म है बल्कि इस फिल्म के बॉक्स ऑफिस आंकड़े भी जादुई थे।

गौरतलब है कि डॉन ने 70 के दशक में बॉक्स ऑफिस पर लगभग 900 प्रतिशत का मुनाफा कमाया था। फिल्म केवल 70 लाख के बजट पर बनी थी और इसने बॉक्स ऑफिस पर कुल 7 करोड़ की कमाई की थी। इसके बावजूद, डॉन 1978 की तीसरी सबसे ज़्यादा कमाने वाली फिल्म थी।

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उस साल, अमिताभ बच्चन की दो फिल्मों ने डॉन से ज़्यादा कमाई की थी। सबसे ज़्यादा कमाई की थी अमिताभ बच्चन - रेखा - विनोद मेहरा स्टारर मुकद्दर का सिकंदर ने। और इसके बाद दूसरे नंबर पर थी त्रिशूल। दिलचस्प ये है कि डॉन और त्रिशूल की रिलीज़ में केवल एक हफ्ते का अंतर था।

डॉन हिंदी सिनेमा के इतिहास की यादगार फिल्मों में से एक है। यहां पढ़िए फिल्म से जुड़े कुछ बेहद रोचक किस्से।

किसी को नहीं खरीदनी थी फिल्म

किसी को नहीं खरीदनी थी फिल्म

सलीम जावेद ने डॉन की स्क्रिप्ट काफी पहले लिखी थी लेकिन ये फिल्म कोई खरीदना नहीं चाहता था। फिल्म के प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी, अपनी पिछली फिल्म के कारण 12 लाख रूपये कर्ज़ में थे। कर्ज़ से निकलने के लिए उन्होंने अमिताभ बच्चन - ज़ीनत अमान और मनोज कुमार को लेकर फिल्म बनाना चाहते थे। इस फिल्म को चंद्रा बरौत डायरेक्ट करने वाले थे। चंद्रा मनोज कुमार की कई फिल्मों में असिस्टेंट थे। सलीम जावेद की ये फिल्म कोई नहीं खरीद रहा था और इसलिए नरीमन ने इसे कम पैसों में तुरंत खरीद ली और डॉन बनना शुरू हुई।

तीन एक्टर्स ने किया रिजेक्ट

तीन एक्टर्स ने किया रिजेक्ट

सलीम जावेद ने एक डॉन की कहानी पर पूरी फिल्म लिखी थी और फिल्म का कोई नाम नहीं था। बस फिल्म के मुख्य किरदार को सब डॉन बुलाते थे। मनोज कुमार ने सुझाव दिया कि फिल्म का नाम मिस्टर डॉन कर दिया जाए लेकिन उनका सुझाव किसी को पसंद नहीं आया। हालांकि, डॉन के लिए सबसे ब्लॉकबस्टर सुझाव भी मनोज कुमार ने ही दिया था। उन्होंने पूरी फिल्म बनने के बाद फिल्म के सेकंड हाफ में एक डांस नंबर डालने की सलाह दी और ये गाना था खईके पान बनारस वाला। सलीम जावेद ने इस फिल्म को नरीमन ईरानी को बेचने से पहले, देव आनंद, विनोद मेहरा और जीतेंद्र को इस फिल्म के लिए अप्रोच किया था।

गाने से शुरू हुई फिल्म की शूटिंग

गाने से शुरू हुई फिल्म की शूटिंग

फिल्म की शूटिंग शुरू हुई थी हेलेन के यादगार गाने ये मेरा दिल प्यार का दीवाना के साथ। इस दौरान, फिल्म के डायरेक्टर चंद्रा बरौत और गाने के कोरियोग्राफर पीएल राज के बीच काफी मतभेद हुए। राज चाहते थे कि हेलेन गाने में शराब की एक बोतल लेकर डांस करें और डायरेक्टर इस आईडिया के खिलाफ थे। मतभेद सुलझाने के लिए गाने को दोनों तरह से शूट किया गया। लेकिन शूट के बाद पीएल राज ने चंद्रा बरौत का ही आईडिया माना।

किसी को नहीं मिली थी फीस

किसी को नहीं मिली थी फीस

हालांकि, गाने के बीच में हेलेन कुछ जगह हाथ में शराब की बोतल लेकर थिरकती दिखाई दीं। अगर रिपोर्ट्स की मानें तो इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन, ज़ीनत अमान, हेलेन, प्राण किसी को भी पैसे नहीं दिए गए थे। सबको पैसे फिल्म के रिलीज़ होने और फिल्म के हिट होने के बाद दिए गए। वहीं फिल्म के लिए प्राण को अमिताभ बच्चन से ज़्यादा फीस मिली थी।

प्रोड्यूसर का निधन

प्रोड्यूसर का निधन

इस फिल्म की शूटिंग के दौरान, एक दिन सेट पर बिजली गिरी जिससे एक लाईट नीचे गिर पड़ी और इस दुर्घटना में फिल्म के प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी का निधन हो गया। उनकी मौत के बाद फिल्म के लिए कहीं से पैसे नहीं मांगे गए और जो भी था, उसी में फिल्म को पूरा किया गया। फिल्म के लिए जब अमिताभ बच्चन को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला तो उन्होंने ये अवार्ड लेने के लिए नरीमन ईरानी की पत्नी को स्टेज पर बुलाया और उनके साथ ये अवार्ड कुबूल किया था।

सबसे आईकॉनिक गाना

सबसे आईकॉनिक गाना

अब बात करते हैं फिल्म के सबसे आईकॉनिक गाने - खईके पान बनारस वाला की। ये गाना, पूरी फिल्म बनने के बाद अलग से जोड़ा गया था और बाद में शूट हुआ था। इस गाने का लुक, संजीव कुमार की फिल्म नया दिन नई रात के एक किरदार से लिया गया था। इस फिल्म में संजीव कुमार ने 9 किरदार निभाए थे जिनमें से एक किरदार यूं ही बालों में तेल लगाकर हमेशा पान चबाता रहता था।

खाने पड़े 40 पान

खाने पड़े 40 पान

इस गाने को शूट करने के लिए अमिताभ बच्चन को 40 पान खाने पड़े थे। वहीं गाने को गाने से पहले, किशोर कुमार भी पान खाकर एक प्लास्टिक पर थूकते थे जिससे कि उन्हें गाने का फील मिलता रहे। इस गाने के कुछ स्टेप्स, अमिताभ बच्चन ने अपने छोटे से बेटे अभिषेक के शरारत भरे डांस से कॉपी किए थे। वहीं गाने की शूटिंग के दौरान, अमिताभ बच्चन को चोट लगी थी और उन्होंने नंगे पैर, किसी तरह, लंगड़ाते हुए इस गाने की शूटिंग पूरी की थी।

बार बार देखने जाती थीं सरोज खान

बार बार देखने जाती थीं सरोज खान

जब डॉन रिलीज़ हुई, उस दौरान, बॉलीवुड की सबसे बड़ी कोरियोग्राफर सरोज खान केवल एक बैक डांसर हुआ करती थीं। उन्हें खईके पान बनारस वाला इतना पसंद आया था कि वो हर रोज़ केवल ये गाना देखने के लिए फिल्म देखने जाती थीं और रोज़ टिकट खरीदती थीं। जब थिएटर के मालिक ने देखा कि सरोज खान, रोज़ ये गाना देखने आती हैं तो उन्होंने सरोज खान के टिकट माफ कर दिए और थिएटर में एक सीट उनके लिए बुक कर दी।

कट गया था फरीदा जलाल का रोल

कट गया था फरीदा जलाल का रोल

डॉन का हिस्सा फरीदा जलाल भी थीं। उन्होंने फिल्म के लिए 5 मिनट का एक सीन शूट किया था। लेकिन जब फाईनल एडिट में इस सीन को देखा गया तो ऐसा लगा कि इसकी ज़रूरत फिल्म में नहीं है। फरीदा जलाल का सीन केवल फिल्म की लंबाई बढ़ा रहा था और यही कारण था कि उनके सीन को फिल्म से काट दिया गया।

ज़ीनत अमान के साथ पहली फिल्म

ज़ीनत अमान के साथ पहली फिल्म

गौरतलब है कि ये अमिताभ बच्चन और ज़ीनत अमान की जोड़ी के तौर पर पहली फिल्म थी। इससे पहले, दोनों ने साथ में रोटी, कपड़ा और मकान में काम किया था लेकिन उस फिल्म में दोनों एक दूसरे के अपोज़िट नहीं थे। फिल्म से अमिताभ बच्चन का डायलॉग - मुझे जंगली बिल्लियां बहुत पसंद है, आज तक दर्शकों की ज़ुबान पर रहता है।

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