Comedian Rajiv Thakur Struggling Days: जब भी टीवी से लेकर फिल्मों और कॉमेडी शोज में कॉमेडियंस जोक्स मारते हैं तो उन पर हंसना तो काफी अच्छा लगता है। लोगों को ऐसा भी लगता है कि वह अपने काम में खूब खुश रहते हैं तो उनकी असर जिंदगी भी ऐसी ही होती होगी। लेकिन कपिल शर्मा शो के कॉमेडियन राजीव ठाकुर ने हाल ही में अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा दुख जाहिर किया है। उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी का एक हिस्सा गरीबों में बीत गया और इस पर वह इमोशनल हो गए।
वैभव मुंजाल के पॉडकास्ट के दौरान राजीव ठाकुर ने अपने अतीत के मुश्किल वक्त को याद किया और बताया कि "मेरा सफर ऐसे हालातो में शुरू हुआ जिनको मैं याद भी नहीं करना चाहता हूं। अगर मैं आज के वक्त में लोगों को इसके बारे में बताता हूं तो यह बनावटी लग सकता है। क्योंकि इस कंफर्म करने के लिए कोई नहीं है।" राजीव ठाकुर ने इस पर आगे बात करते हुए कहा कि "लोग कई बार कहते हैं कि आपको अपने दर्द को स्टैंड अप कॉमेडी में बदल देना चाहिए। मैं कई बार ऐसा करता भी हूं लेकिन उन जोक्स को परफॉर्म करते वक्त भी दर्द इतना ज्यादा असली हो जाता है कि मैं बैक स्टेज रोने लग जाता हूं। इसी वजह से मैं अपनी जिंदगी के उस वक्त के बारे में बहुत कम बात करता हूं।" गरीबों के दोनों को लेकर बात करते हुए राजीव ठाकुर की आंखें नम हो गई। उन्होंने बताया कि हमारी कहानी पुरानी हिंदी फिल्मों जैसी थी। "मेरे पापा को शादी के बाद घर से निकाल दिया गया और फिर हम एक कमरे वाले घर में रहने लगे। वही एक कमरा हमारा बैडरूम से लेकर लिविंग रूम, किचन और बाथरूम बन गया था। इस कमरे में तीन बच्चे पैदा हो गए। अगर एक शख्स नहाता था तो बाकी चार लोगों को बाहर इंतजार करना पड़ता था। मुझे तो हमारा घर एक पब्लिक टॉयलेट लगता था।" राजीव ने आगे बात करते हुए बताया कि उनके पिता की अमृतसर में एक धागे की फैक्ट्री हुआ करती थी जो 1984 में दंगों के बाद बंद हो गई थी। उन्होंने बताया कि "मेरे पिता बेरोजगार थे और हम किराया भी नहीं दे पाया करते थे। हमारे कमरे में सिर्फ एक 40 वाट का बल्ब लगा हुआ था और मुझे बल्ब की पीली रोशनी बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती थी। इसी वजह से जब मैं किसी के घर ट्यूबलाइट देखा था तो बस सोचता था कि हमारे घर में ऐसी रोशनी क्यों नहीं है और कब आएगी।" राजीव ठाकुर ने इस पर आगे बात करते हुए बताया कि परिवार चलाने के लिए उनकी मां सिलाई किया करती थी और तब वह बिना लिफ्ट वाले घर में रहा करते थे। कॉमेडियन ने बताया कि पुराने दिनों को देखकर लगता है कि आज उन्होंने उम्मीद से दोगुना ही प्राप्त कर लिया है।राजीव ठाकुर ने बताया अपनी गरीबी के दिनों की कहानी
पिता की बंद हो गई थी फैक्ट्री
घर चलाने के लिए मां करती थी सिलाई
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