सनातन धर्म में कंवर्ट हुई उर्फी जावेद? इस्लाम छोड़ने पर जानिए क्या बोली हसीना
Urfi Javed Converted To Hindu: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर उर्फी जावेद को लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की अफवाहें उड़ती रहती हैं। अब सोशल मीडिया पर एक दावा सामने आया है जिसमें कहा गया है कि उर्फी ने इस्लाम धर्म छोड़कर मुस्लिम धर्म अपना लिया है। अब उनका नया नाम 'रीता भारद्वाज' है। जैसे ही उर्फी जावेद को इस बारे में पता चला तो उन्होंने अपना रिएक्शन भी दे दिया है।

उर्फी जावेद ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए इस मामले की सच्चाई खुद बता दी है। उर्फी ने साफ किया कि उन्होंने न तो अपना धर्म बदला है और न ही अपना नाम। उन्होंने वायरल पोस्ट्स का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा कि यह पूरी तरह फर्जी खबर है और लोग बिना किसी सच्चाई के ऐसी बातें फैला रहे हैं। उर्फी ने लोगों से अपील की कि किसी भी खबर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें।
उर्फी जावेद अपने अनोखे फैशन सेंस और बेबाक बयानों की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है और उनसे जुड़ी खबरें तेजी से वायरल हो जाती हैं। हालांकि, कई बार उनके नाम पर फर्जी दावे और एडिटेड पोस्ट्स भी वायरल होते रहते हैं, जिनका उन्हें खुद सामने आकर जवाब देना पड़ता है।
जानकारी के लिए आपको बता दें कि कुछ समय पहले उर्फी जावेद ने साफ तौर पर कहा था कि वह इस्लाम को नहीं मानती हैं और शादी किसी भी मुस्लिम से नहीं करेंगी। उर्फी जावेद ने यह भी कहा कि वो इस्लाम में यकीन नहीं रखती हैं।
उर्फी जावेद ने कहा है कि धर्म को मानने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उर्फी जावेद ने एक वेबसाइट को दिए गए इंटरव्यू पर कहा कि मुझे जितनी भी नफरत भरे कमेंट्स मिलते हैं वो अधिकतर मुस्लिम लोगों के ही होते हैं। मैं एक मुस्लिम लड़की हूं। मैं इस्लाम की छवि खराब कर रही हूं। वे सभी मुझसे नफरत करते हैं।
उर्फी जावेद ने बोला कि एक मुस्लिम पुरुष ये चाहते हैं कि उनकी जो महिलाएं हैं वह एक खास तरीके से बर्ताव करेंगे। सभी महिलाओं को नियंत्रित करना चाहते हैं। इस वजह से मैं इस्लाम को नहीं मानती हूं। उर्फी जावेद ने यह भी बताया कि मुझे इस वजह से ट्रोल किया जाता है कि मैं मुस्लिम की तरह बर्ताव नहीं करती हूं। रहा सवाल शादी का तो मैं कभी किसी मुस्लिम लड़के से शादी नहीं करूंगी।
मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि मैं किससे प्यार करती हूं। उर्फी ने यह भी कहा कि किसी को भी धर्म को मानने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। हर किसी को धर्म चुनने और उसके हिसाब से चलने की आजादी भी है और अधिकार भी है। अपने बचपन को याद कर उर्फी जावेद ने बोला कि मेरे पिता छोटी सोच के थे। मैं जब 17 साल की थी, तब मेरे भाई-बहनों और मां को छोड़ दिया।


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