Raj Kundra On Pornography Case: बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और बिजनेसमैन राज कुंद्रा पर लगे पोर्नोग्राफी के आरोपों ने ना सिर्फ फैंस बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री को शॉक्ड कर दिया था। मामले को पांच साल हो चुके हैं लेकिन राज कुंद्रा आज तक खुद को बेकसूर साबित करने के लिए कोर्ट में लड़ रहे हैं। अब उन्होंने हाल ही में अपनी लाइफ में आए इस तूफान के बारे में बात की है और बताया है कि कैसे उनके परिवार के हंसते खेलते दिन एक दम से ही पलट गए थे।

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63 दिन जेल की सलाखों के पीछे

राज कुंद्रा ने बताया कि उन्हें आनन फानन नें अपने सारे बिजनेस बंद करने पड़ गए थे। लाइफ के उस सबसे बुरे दौर को याद करते हुए राज कुंद्रा ने बताया कि जब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया तो उनके और शिल्पा के पैरों तले जमीन खिसक गई थी। इस मामले में राज कुंद्रा को करीब 63 दिन जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े थे। उन पर मोबाइल एप्लिकेशन्स के जरिए अश्लील कंटेंट बनाने और उसे बांटने के गंभीर आरोप लगे थे।

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सारे बिजनेस करने पड़े बंद

बदनामी और कानूनी पचड़ों के राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी को अपनी सभी रनिंग बिजनेस को बंद करने का फैसला लेना पड़ा। राज कुंद्रा ने कहा यह सोचकर आज भी बहुत दुख होता है कि भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में इतना योगदान देने के बाद मुझे अपने सारे चलते हुए बिजनेस अचानक बंद करने पड़े। मुझे पुलिस ने सिर्फ एक साधारण बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था, लेकिन वहां जाते ही मुझे गिरफ्तार कर लिया गया।

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दोषी पाया गया तो मैं अपनी जान देने को भी तैयार

राज कुंद्रा का कहना है कि वह आज भी कानून का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। राज ने बेबाकी से कहा कि इस मामले में जितने भी आरोपी हैं, उन सब में से सिर्फ मैं ही लगातार यह कह रहा हूं कि अगर मैंने कुछ भी गलत किया है तो मुझे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। इस मामले को खींचने के बजाय एक ही बार में इसका फैसला कर दिया जाए। लेकिन अगर मैंने कुछ गलत नहीं किया है और मैं अच्छी तरह जानता हूं कि मैं बेगुनाह हूं तो मुझे सम्मान के साथ क्लीन चिट दी जानी चाहिए। मैं पिछले पांच सालों से इस केस को लड़ रहा हूं और आज भी अपने इसी बयान पर कायम हूं कि अगर मैं दोषी पाया गया तो मैं अपनी जान देने को भी तैयार हूं।

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कड़वा और सच्चा सबक

राज का मानना है कि उस बेहद बुरे वक्त ने उन्हें जिंदगी का सबसे कड़वा और सच्चा सबक सिखाया। उन्होंने अपनी बात को खत्म करते हुए कहा कि आर्थर रोड जेल के वो 63 दिन मेरे जीवन के सबसे भयानक दिन थे। हालात ऐसे थे कि रात को सोते समय मुझे यह भी नहीं पता होता था कि मैं अगली सुबह देख पाऊंगा या नहीं, लेकिन इसके बावजूद मैं अपने जीवन के उस अध्याय को बदलना नहीं चाहता। अगर मैंने जेल के वो दिन नहीं देखे होते तो आज मैं जो राज कुंद्रा हूं, वो कभी नहीं बन पाता। उस मुश्किल वक्त ने ही मुझे यह पहचानना सिखाया कि इस मतलबी दुनिया में कौन से लोग असल में मेरे अपने हैं और कौन सिर्फ अच्छे वक्त के साथी थे।