»   » Review: वज़ीर, 3.5 स्टार, इस फिल्म का हीरो और विलेन एक ही!

Review: वज़ीर, 3.5 स्टार, इस फिल्म का हीरो और विलेन एक ही!

Posted by:
Subscribe to Filmibeat Hindi
Rating:
3.5/5

[ फिल्म रिव्यू] साल की पहली फिल्म आ चुकी है और अमिताभ बच्चन, फरहान अख्तर की बिजॉय नाम्बियार फिल्म वज़ीर आपको एक धमाकेदार शुरूआत देने का वादा करती है और धोखा देकर निकल जाती है।

फिल्म में सब कुछ परफेक्ट है कहानी से लेकर एक एक किरदार तक लेकिन पौने दो घंटे की इस फिल्म का क्लाईमैक्स इतना कॉमन है कि आप 1 घंटे बाद ही बता सकते हैं कि फिल्म का अंत क्या है। फिर भी फिल्म शानदार है इसमें कोई शक नहीं है।

वज़ीर के हीरो तीन हैं - अमिताभ बच्चन, फरहान अख्तर और फिल्म की कहानी। विधु विनोद चोपड़ा ने इस कहानी को लिखने में काफी साल लगाए और उनकी मेहनत हर सीन में दिखाई देती है।


लेकिन फिल्म की कहानी ही क्लाईमैक्स तक पहुंचते पहुंचते फिल्म की विलेन बन जाएगी। निर्देशक बिजॉय नाम्बियार ने फिल्म को बेहतरीन तरीके से उतारा है लेकिन पूरी फिल्म केवल शतरंज की चालों के इर्द गिर्द घूमती है और अगर आपके पास थोड़ा भी दिमाग है तो धीरे धीरे आप खुद हर चाल पहले ही भांप लेंगे। क्योंकि फिल्म सीधा सीधा शतरंज का खेल है।


जानिए वज़ीर की पूरी समीक्षा किरदार, कहानी, कमियां और मज़बूत पक्ष -

कहानी

कहानी

वज़ीर की कहानी काफी साधारण है - एक एटीएस ऑफिसर और उसकी पत्नी जो अपनी बच्ची एक एक्सीडेंट में खो देते हैं। लेकिन क्या वोे एक्सीडेंट था या फिर एक शतरंज की चाल...इस खेल को फरहान के साथ खेलते हैं अमिताभ बच्चन, नील नितिन मुकेश के विरूद्ध


अभिनय

अभिनय

अमिताभ बच्चन इस फिल्म में शानदार हैं और मान सकते हैं कि उन्होंने शायद तीसरी पारी शुरू कर दी है। वहीं फरहान अख्तर ने पूरी तरह से उनका साथ निभाया है और फिल्म के दो हाफ में आपको दो फरहान दिखेंगे। अदिति राव हैदरी के पास करने के लिए कुछ ज़्यादा है नहीं और ये उनकी फिल्म नहीं है।


निर्देशन

निर्देशन

बिजॉय नाम्बियार ने फिल्म को बेहतरीन ढंग से फिल्माया है। लेकिन फिल्म उतनी ही डार्क और उलझी हुई है और उन्होंने इसे सुलझाने की कोशिश भी नहीं की है। पूरी फिल्म में अगर कुछ रोशनी है तो अदिति के मुस्कुराते चेहरे में।


म्यूज़िक

म्यूज़िक

फिल्म के गाने गैर ज़रूरती है लेकिन एक बार शुरू हो जाते हैं तो आपको खींचते हैं। पूरा एल्बम काफी अच्छा है पर फिल्म की गति जगह जगह पर तोड़ता है और आपको ये बिल्कुल पसंद नहीं आएगा।


सह कलाकार

सह कलाकार

फिल्म में मानव कौल ने इतना बेहतरीन काम किया है कि आप उन्हें और देखना चाहेंगे लेकिन वो दिखते नहीं है। उनका किरदार काफी छोटा लिखा गया है जबकि उनके किरदार में काफी स्कोप था और इसे दमदार तरीके से उतारा जा सकता था।


तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

फिल्म के कुछ दृश्य ज़बर्दस्त हैं और पूरी फिल्म को एक डल मोड पर रखा गया है। ये नीरसपन आपको धीरे धीरे पसंद आएगा। वहीं फिल्म के एक्शन सीक्वंस भी अच्छे हैं।


बेहतरीन डायलॉग्स

बेहतरीन डायलॉग्स

फिल्म का सबसे अच्छा पक्ष है इसके डायलॉग्स जिस पर अभिजीत देशपांडे और ग़ज़ल धालीवाल ने बेहतरीन काम किया है। फिल्म का एक एक डायलॉग शतरंज के खेल से शुरू होकर उसी पर खत्म होता है।


प्लस पॉइंट

प्लस पॉइंट

फिल्म की स्क्रिप्ट ज़बर्दस्त है। शतरंज के खेल को 2 घंटे की फिल्म में उतार दिया गया है। किस तरह से एक प्यादा, आखिरी घर में जाकर वज़ीर बन जाता है, कैसे हाथी अपने सामने वाले सैनिक के धराशायी होते ही पागल हो जाता है, और घोड़े के साथ साथ ऊँट की चालें कितनी अहम होती हैं ये सब इंसान के पक्ष में बताया गया है।


निगेटिव पॉइंट

निगेटिव पॉइंट

वज़ीर का निगेटिव पॉइंट है इसका क्लाईमैक्स। जब आप फिल्म की एक एक चाल समझने लग जाते हैं तो आप फिल्म के साथ शतरंज खेलने लग जाते हैं और इसलिए सारा खेल आप दो घंटे की जगह एक ही घंटे में समझ जाएंगे।


English summary
Wazir film review in hindi - Amitabh Bachchan and Farhan Akhtar's Bejoy Nambiar film has released. Read the film review.
Please Wait while comments are loading...

Bollywood Photos

Go to : More Photos