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Review - न्याय की कमजोर कोशिश लेकिन 'सुपरस्टार' की तरह चमकीं रवीना टंडन

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2.5/5

फिल्म - मातृ
स्टारकास्ट - रवीना टंडन, अलीशा खान, मधुर मित्तल
डायरेक्टर - अश्तर सैय्यद
प्रोड्यूसर - माइकल पेलिको
लेखक - माइकल पेलिको
शानदार पॉइंट - रवीना टंडन
निगेटिव पॉइंट - फिल्म में रवीना टंडन 'दूसरे' रास्ते पर चलकर बड़ी आसानी से बदला ले लेती हैं जो आपको कन्विंस नहीं कर पाएगी। फिल्म का लेखन कमजोर है।

प्लॉट

प्लॉट

एक रात कुछ ऐसा होता है कि सबकुछ बिल्कुल बदल जाता है। विद्या चौहान (रवीना टंडन) और उनकी बेटी टीया (अलीशा खान) स्कूल के वार्षिकोत्सव से रात में लौट रहे होते हैं। ट्रैफिक से बचने के लिए विद्या अपना रास्ता बदल लेती है लेकिन उनका सामना कुछ बदमाश गुंडो से होता है।दोनों मां और बेटी की नींद खुलती है तो एक वीरान फार्महाउस में खुद को पाती हैं जहां उन्हें गैंगरेप के लिए लाया जाता है। इस हादसे में टीया की मौत हो जाती है लेकिन विद्या बच जाती है। वो उनमें से एक अपराधी अपूर्व मलिक (मधुर मित्तल) को पहचान लेती है जो एक बहुत बड़े नेता
का बेटा है।

प्लॉट

प्लॉट

एक टूट रही होती शादी और असंवेदनशील पति जो इस सब के लिए अपनी पत्नी विद्या को दोषी ठहराता है। विद्या की सबसे अच्छी दोस्त (दिव्या जागदले) सबसे ज्यादा मदद करती है। न्याय नहीं मिल पाने पर विद्या बदला लेना चाहती है और लेती भी है। क्या आखिर में एक मां को न्याय मिल पाएगा ?

डायरेक्शन

डायरेक्शन

अश्तर सैय्यद ने आज के समय से जुड़ा एक मुद्दा उठाने की और कहानी दिखाने की कोशिश की है । भारत में बलात्कार के आंकड़े दिखाते हैं कि कई परिवार इस तरह की घटना से दो चार हो चुके हैं। मातृ एक मजबूत इरादे से बनाई गई फिल्म है लेकिन इसे परदे पर अच्छे से नहीं उतारा गया। फिल्म के प्लॉट में कुछ खामियां हैं और कहीं कहीं फिल्म थोड़ी मेलोड्रामेटिक हो जाती है। कुछ को फिल्म में रंजिश की कहानी हो सकती है कहीं कहीं पच भी ना पाए। फिल्म के डायलोग भी इतने दमदार नहीं हैं कि आप पर उनका असर हो। आगे जाकर रवीना चुन चुन कर बदला लेती हैं जहां लॉजिक की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है। फिल्म के अंत में न्याय को कुछ इस तरह से दिखाया गया है कि 'आखिर ये खत्म हुआ'।

परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

रवीना टंडन ने फिल्म से एक शानदार कमबैक किया है। एक बलात्कार पीड़ित मां जो बदला लेने के लिए किसी भी हद तक जाती है । रवीना टंडन ने अपनी एक्टिंग पावर को दिखाया है जो आपके अंदर इमोशन लेकर आएगी। वो बिल्कुल शानदार फॉर्म में नजर आई हैं जहां चुप्पी भी बहुत कुछ कह जाती है।

मधुर मित्तल जो स्लमडॉग मिलेनियर जैसी फिल्म में नजर आ चुके हैं वो भी अपने इस रोल में बिल्कुल परफेक्ट लगे हैं। आपको अंत तक इस अपूर्वा मलिक कैरेक्टर से नफरत हो जाएगी।

फिल्म के बाकी के कलाकार अलीशा खान, दिव्या जगदले, रौशाद राना और अनुराग अरोड़ा ने भी अपना काम बखूबी किया है।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

फिल्म दूसरे हाफ में बिल्कुल सीधी पटरी पर चलने लगती हैं जहां लेखन में भी दम नहीं है और बेतरतीब लॉजिक दिखाए गए हैं जैसे डायरेक्टर को न्याय दिलाने की कितनी जल्दी हो। एडिटिंग मे भीकहीं कहीं कमियां हैं लेकिन सिनेमैटोग्राफी फिल्म के साथ बिल्कुल सही है।

म्युजिक

म्युजिक

म्युजिक के मामले में फिल्म पीछे रह जाती है।राहत फतेह अली खान की जिंदगी ए जिंदगी ही एक ऐसा ट्रैक हो जो सुनने में अच्छा लगता है। फिल्म का बैकग्राउंड म्युजिक भी कहीं कहीं फिल्म की कहानी के फ्लो को तोड़ देता है।

Verdict

Verdict

मातृ सिर्फ और सिर्फ रवीना टंडन के लिए देखा जा सकता है। रवीना टंडन का किरदार एक गलत रास्ते को अपनाने की कहानी है जो एक भयावह हादसे के बाद अपने हाथ रंगने से भी परहेज नहीं करती है। फिल्म बहुत मजबूत इरादों के साथ बनाई गई है लेकिन एक शानदार फिल्म बन पाने से बच जाती है।

English summary
Maatr movie review story plot and rating, know how the movie is.
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