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Review - एक कभी ना खत्म होने वाली बारात जो पूरी तरह रास्ता भटक जाती है

मनीष हरिशंकर की फिल्म लाली की शादी में लड्डू दीवाना रिलीज हो चुकी है। जानिए कैसी है फिल्म और हमने फिल्म को दिए कितने स्टार्स।

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1.5/5

फिल्म - लाली की शादी में लड्डू दीवाना
स्टारकास्ट -गुरमीत चौधरी, अक्षरा हासन, विवान शाह, कविता वर्मा
डायरेक्टर - मनीष हरिशंकर
प्रोड्यूसर - टीपी अग्रवाल, राहुल अग्रवाल
लेखक - मनीष हरिशंकर
शानदार पॉइंट - फिल्म के लोकेशन 
निगेटिव पॉइंट - स्क्रीनप्ले,परफॉर्मेंस

शानदार मोमेंट - लाली की शादी में लड्डू दीवाना आपको कई कारण देता है कि आप हंसे लेकिन सभी गलत कारणों से

प्लाॉट

लड्डू (विवान शाह) एक मीडिल क्लास लड़का है जो टाटा बिड़ला की तरह बनने के सपने देखता है। अपने पापा को मनाने के बाद वो एक वड़ोदरा आ जाता है जहां अपने पापा के दोस्त के कबीर कैफेटेरिया में वेटर का काम करता है। एक दिन वो वो लाली (अक्षरा हासन) से मिलता है और उसे उसी दिन उससे प्यार हो जाता है। लाली कबीर के कैफे की रेग्यूलर कस्टमर है। दोनों को एक दूसरे से प्यार हो जाता है। फिल्म में इनके रोमांस, गाने को इतनी तेजी से दिखाया गया है कि आप उनके रोमांस को पचा ही नहीं पाएंगे। लाली को पता चलता है वो लड्डू के बच्चे की मां बनने वाली है। इसे जानने के बाद लड्डू उसे एक सबसे आसान तरीका बताता है क्योंकि वो पापा नहीं बनना चाहता।

प्लॉट

लड्डू की बातें सुनकर लाली उसे जोरदार थप्पड़ मारती है और कहती है कि "मैं थप्पड़ खाने वाली लड़की नहीं हूं।" यहां दिल टूटता है लेकिन आपको पता है कि आगे क्या होने वाला है। फिल्म इसके
बाद लव ट्राएंगल बन जाती है। रामनगर के प्रिंस वीर (गुरमीत चौधरी) की एंट्री होती है जो लाली से शादी करना चाहता है लेकिन इसका कारण बहुत ही बेवकूफी भरा है। दरअसल वीर के पैरेंट्स और मंगेतर की एक दुर्घटना में मौत हो जाती है और पंडित उसे एक प्रेग्नेंट औरत शादी करने कहते हैं जो उसके परिवार के लिए अच्छा है। इसके बाद लवर ब्वॉय लड्डू लाली से शादी करना चाहता है। अब देखना ये है कि लाली किसे चुनती है लड्डू या एक अमीर राजकुमार को।

डायरेक्शन

लाला की शादी में लड्डू दीवाना की शुरूआत काफी अच्छी होती है लेकिन बीच में फिल्म अपना प्लॉट खो देती है। डायरेक्टर मनीष हरीशंकर फिल्म को भावनात्मक तरीके नहीं कनेक्ट नहीं करवा पाते और ना तो फिल्म देखकर थोड़ी भी हंसी आ पाती है। 134 मिनट की फिल्म आपको बहुत ज्यादा खिंची हुई लगेगी।फिल्म के लोकेशन देखकर आपको शायद थोड़ा अच्छा लगे।

परफॉर्मेंस

विवान शाह आपको टीनएजर के तौर पर कुछ सीन छोड़कर इंप्रेस करने में नाकाम रहते हैं। अक्षरा हासन अपनी खराब एक्सप्रेशन और चीखती आवाज में आपको निराश ही करेंगी। दोनों की केमेस्ट्री भी किसी बर्फीले पहाड़ की तरह ठंढी है। गुरमीत चौधरी का फिल्म में ज्यादा रोल नहीं है और वो पूरी तरह बुझे बुझे लगते हैं। कुछ शानदार एक्टर जैसे सौरभ शुक्ला संजय मिश्रा, दर्शन जड़ीवाला ने अपना काम बखूबी किया है लेकिन हंसाने में नाकाम रहते हैं। और हां हम कविता वर्मा को कैसे भूल सकते हैं (जो राखी सावंत जैसी दिखती हैं) जिन्हें आखिरी में देखना और भी मुश्किल हो जाता है।

तकनीकी पक्ष

इस फिल्म को देखकर पता चलता है कि शानदार बैकड्रॉप होना फिल्म के हिट होने की गारंटी नहीं है। फिल्म में इसके साथ साथ अच्छे स्क्रिप्ट और कैरेक्टर की भी जरूरत होती है। लाली की शादी में लड्डू दीवाना क्लाइमैक्स तक जैसे तैसे पहुंच पाती है। आप खुद भी फिल्म में इसकी चिंता छोड़ देंगे कि इन दो लव बर्ड्स के साथ क्या हो रहा है। आप सिर्फ चाहेंगी की बेबी बाहर आ जाए ताकि फिल्म खत्म हो। फिल्म की एडिटिंग और भी की जा सकती थी।

म्यूजिक

फिल्म के रॉयल ग्रैंड वेडिंग और बैकड्रॉप के अलावा एक गाना नहीं है जो आपको आखिर तक याद रहे। बल्कि आप गाने के बीच में आपको कुछ पल मिल जाएंगे कि आप अपना फोन चेक कर लें।

Verdict

लाली की शादी में लड्डू दीवाना देखकर आप इंज्वॉय या अच्छा टाइमपास तो नहीं कर पाएंगे। बल्कि आप किसी रियल शादी में चले जाएं क्योंकि वहां से आप ज्यादा हंसी खुशी आएंगे। फिल्म के अंत में फैमिली तस्वीर क्लिक करवाते समय ऑल इज वेल बोलते हैं लेकिन अफसोस ये फिल्म देखने के बाद कहीं से भी फिट नहीं बैठता।

English summary
Laali ki shaadi mein laaddoo Deewana movie review story plot and rating.
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