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जय गंगाजल रिव्यू: हर गंगाजल में अजय नहीं होते...हर खाकी सिंघम नहीं!

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1.5/5

डायरेक्टर - प्रकाश झा
कास्ट - प्रियंका चोपड़ा, प्रकाझ झा, मानव कौल, मुरली शर्मा, निनाद कामत 

प्रियंका चोपड़ा स्टारर जय गंगाजल रिलीज़ हो चुकी है और ये फिल्म आपको गंगाजल - सिंघम के बीच फंसी एक एंग्री यंग वूमन की कहानी लगेगी।


आभा माथुर, जिले की पहली महिला एसपी है और वो कुर्सी पर बैठने नहीं आई है। प्रियंका चोपड़ा खाकी अवतार में अच्छी लग रही हैं। फिल्म में उन्हें हीरो की तरह इंट्रोड्यूस नहीं किया गया है और यही आभा माथुर की सबसे बड़ी खासियत है।


फिल्म के हीरो हैं - प्रकाश झा। जो फिल्म में आपको प्रियंका चोपड़ा से ज़्यादा दिखेंगे और नाना पाटेकर की एक्टिंग और डायलॉग डिलीवरी के साथ दिखेंगे।


जय गंगाजल शुरू होती है भ्रष्टाचार से और धीरे धीरे पॉलिटिक्स, किसान, भू माफिया जैसे यूपी बिहार के सारे परेशानी भरे मुद्दे इसमें जुड़ते चले जाते हैं। थोड़ी देर बाद कहानी ऐसी खो जाती है कि अंत तक आप उसे ढूंढने की कोशिश करते हैं पर असफल रहेंगे।


फिल्म में एक नया कॉन्सेप्ट निकाला गया है - मर्डर सुसाइड का। और फिल्म में कुल 8 - 10 लोगों का मर्डर सुसाइड होता है जो शायद वर्तमान कानून व्यवस्था पर चोट करने की विफल कोशिश करता है। हास्यास्पद ये कि कानून भी इसका सहभागी होता है।


फिल्म में प्रियंका चोपड़ा की एंट्री बिल्कुल गंगाजल में अजय देवगन की स्टाइल में होती है। पर इस फिल्म में उस गंगाजल जैसा कुछ नहीं है। कहने का मतलब ये है कि एक बार जब वो सब पवित्तर कर चुके थे तो दोबारा बिना कहानी या प्लॉट के उसी लाइन पर फिल्म बनाने की कोई आवश्यकता नहीं थी।


 जानिए फिल्म की पूरी समीक्षा -

कहानी

फिल्म की कहानी है आभा माथुर की जो बांकीपुर की पहली महिला एसपी बन कर आती हैं। लेकिन यूपी, बिहार जैसे जिलों में अफसर कितने कड़क हों, उनकी मुश्किलें बढ़ाने के लिए नेता ज़रूर होते हैं। और साथ ही एक भ्रष्ट पुलिस फोर्स उन मुश्किलों से आभा कैसे जूझेगी यही फिल्म की कहानी है।


अभिनय

प्रियंका चोपड़ा इस लचर पटकथा को उठाने और संभालने की पूरी कोशिश करती दिखती हैं। हालांकि कई जगह वो सफल हुई हैं, कई जगह बुरी तरह असफल। वहीं प्रकाश झा का अभिनय बोलता है पर नाना पाटेकर स्टाइल सिंघम बनने की उनकी कोशिश असफल साबित होती है।


स्टारकास्ट

फिल्म के सह कलाकार ज़बर्दस्त है। लेकिन किसी फिल्म में जब दो सिंघम हों - प्रियंका और प्रकाश हों तो बाकी सब के पास करने को कुछ नहीं था। कुल मिलाकर मानव कौल और मुरली शर्मा वेस्ट गए हैं। वहीं राहुल भट्ट फिल्म में कभी भी आते हैं और जाते हैं। निनाद कामत की कोशिश अच्छी रही है।


डायरेक्शन

फिल्म एक ज़बर्दस्त शुरूआत करती है मानव कौल - प्रकाश झा के साथ। धीरे धीरे फिल्म आगे बढ़ती है और एक के बाद एक समस्याओं से उलझती जाती है। फिल्म में मुद्दे इतने हो जाते हैं कि फिल्म का पता ही नहीं लगता। और प्रकाश झा कहीं से भी कहानी को संभाल नहीं पाते। 


तकनीकी पक्ष

फिल्म के एक्शन सीन काफी अच्छे हैं। लेकिन डायलॉग्स में कोई नयापन नहीं है। वो वही हीरोगिरी की बातें करते हैं जो आज के दर्शक नहीं पचा पाएंगे। वहीं फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और एडिटिंग इतनी लचर है कि आप चाहकर भी फिल्म से जुड़ नहीं पाएंगे।


संगीत

फिल्म के गाने काफी सिचुएशनल हैं। और पिछली गंगाजल की बजाय इस बार इन पर ज़्यादा फोकस किया गया है। लेकिन कहीं कहीं ये कहानी को तोड़ते हैं और जुड़ने नहीं देते। इनकी ज़रूरत इस फिल्म में नहीं थी।


कमज़ोर पक्ष

फिल्म आज के समय से काफी पीछे है और वास्तविकता से थोड़ा दूर। फिल्म में अन्याय से निपटने का कॉन्सेप्ट है मर्डर सुसाइड। ना कहानी में दम है, ना ही दृश्यों में इतनी संवेदना। फिल्म में 8 मौतें होती हैं पर आपको किसी पर भी दुख नहीं होगा।


अच्छी बातें

फिल्म की जान हैं प्रियंका चोपड़ा। उन्होंने पूरी कोशिश की है कि फिल्म से कोई एक बात दर्शक तक पहुंच जाए। यही कारण है कि उन्हें जब भी मौका मिला है उन्होंने स्क्रीन को कब्ज़े में करने की पूरी कोशिश की है। वहीं फिल्म का एक्शन काफी पावरफुल है।


हमारी रेटिंग

फिल्म को 1.5 स्टार। प्रकाश झा ने बॉलीवुड को बेहतरीन सिनेमा दिया है लेकिन फिर जय गंगाजल जैसी फिल्म बुरी तरह से निराश करती है।


 
English summary
Jai Gangaajal Review - Read whether Priyanka Chopra hit hard in this Prakah Jha drama.
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