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#FanReview: अरे ओ शाहरूख खान...वाकई तेरा जबरा फैन हो गया!

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Rating:
3.5/5


डायरेक्टर मनीष शर्मा
प्रोड्यूसर यशराज फिल्म्स
स्टारकास्ट शाहरूख खान, वलूशा डीसूज़ा, श्रिया पिलवगांवकर, शाहरूख खान

हक होने में और हक जताने में बहुत पतली सी लकीर होती है। लकीर पार की, कि अब प्यार से ज़बर्दस्ती तक पहुंच जाते हैं। बस फैन भी इसी लकीर के इस पार और उस पार होने की कहानी है।

कहानी सिंपल है - एक सुपरस्टार - आर्यन खन्ना बिल्कुल शाहरूख खान जैसा - लोगों को दीवाना बना देने वाला , जिसकी एक मुस्कुराहट पर लोग बस बिछ जाएं, जिसकी एक झलक के लिए फैन्स घंटों बस पलकें बिछाए इंतज़ार कर लें।


इसी सुपरस्टार के करोड़ों फैन में एक वो भी है जो गलती से, या उसकी किस्मत से थोड़ा बहुत उस सुपरस्टार जैसा दिखता है। गौरव चानना - आर्यन खन्ना का सबसे बड़ा फैन। फैन होना उसका हक है। हर सुपरस्टार के फैन के पास ये हक होता है।


लेकिन कहानी वहां से ट्विस्ट लेती है जब गौरव अपने हक को जताने की कोशिश करने में अपनी लक्ष्मण रेखा यानि कि लिमिट क्रॉस कर लेता है। जब एक फैन अपना हक ज़बर्दस्ती जताए तो सुपरस्टार क्या करता है और क्या कर सकता है, यही फैन का प्लॉट है।


और उस प्लॉट को शाहरूख खान ने इतने बेहतरीन ढंग से निभाया है कि वाकई आप उनके जबरा फैन हो जाएंगे। वो शाहरूख लौटे हैं जिन्हें लोग चक दे इंडिया के बाद से ढूंढ रहे थे!


जानिए फिल्म की पूरी समीक्षा -

कहानी

कहानी

एक फैन अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा अचीवमेंट अपने सुपरस्टार को डेडिकेट करना चाहता है लेकिन अगर सुपरस्टार उसे अपना फैन मानने से इंकार कर दे तो? उसका अचीवमेंट दो कौड़ी का समझ कर उसे धिक्कारे तो? फैन के असली तेवर तब दिखाई देंगे!


अभिनय

अभिनय

शाहरूख खान का इंतज़ार इस फॉर्म में 11 मुल्कों के फैन कर रहे थे लेकिन कभी वो हैप्पी न्यू ईयर लेकर आते थे तो कभी दिलवाले। काफी समय बाद शाहरूख खान वापस लौटे हैं अपने दो अंदाज़ में एक सुपरकूल और दूसरा पागलपन से भरा!


स्टारकास्ट

स्टारकास्ट

फिल्म पूरी तरह से शाहरूख और शाहरूख पर टिकी है। लेकिन फिर भी फिल्म में वलूशा डीसूज़ा और श्रिया पिलगांवकर का डेब्यू नोटिस ना कर पाना आपके बस में नहीं है। दोनों अपने किरदारों के साथ न्याय करती हैं।


डायरेक्शन

डायरेक्शन

मनीष शर्मा ने कभी भी निराश नहीं किया है लेकिन इस बार एक सुपरस्टार का प्रेशर उनके काम में दिखा है। कई जगह कहानी छूटती है लेकिन मनीष शर्मा उसे संभालने की कोशिश करने में और फेल हो जाते हैं।


तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

फैन का तकनीकी पक्ष बेहतरीन है और इसमें कोई दो राय नहीं है। शाहरूख खान के मेकअप से लेकर फाइट सीन तक सब कुछ परफेक्ट है। वहीं रेड चिलीज़ की वीएफएक्स टीम की मेहनत आपको हर फ्रेम में दिखाई नहीं देगी और यही उनकी उपलब्धि है।


संगीत

संगीत

फैन में गाने नहीं है। जबरा आपकी ज़ुबान पर आज तक चढ़ा है और इसके लिए विशाल शेखर और नक्काश अज़ीज़ की जितनी प्रशंसा की जाए कम है।वहीं बैकग्राउंड स्कोर के पर भी काफी मेहनत की गई है।


कमज़ोर पक्ष

कमज़ोर पक्ष

फैन का कमज़ोर पक्ष है ज़रूरत से ज़्यादा खिंच गई कहानी। वहीं गौरव का पागलपन आपको थोड़ी देर तक तो बर्दाश्त होगा लेकिन उसके बाद आपको उस पर खीझ आएगी।


अच्छी बातें

अच्छी बातें

फिल्म की जान हैं शाहरूख खान। उन्होंने फैन्स को वो तोहफा दिया है कि वाकई सब वापस उनके ज़बर्दस्त फैन हो जाएंगे। ये तो आपको चुनना है कि आपको आर्यन पसंद आया या गौरव पर जो भी है सबके फेवरिट बनकर उभरेंगे शाहरूख।


हमारी रेटिंग

हमारी रेटिंग

फिल्म को हमारी तरफ से 3.5 स्टार लेकिन अगर आप शाहरूख फैन हैं तो फिल्म मिस करना पाप है आपके लिए!


English summary
Fan film review - Did Shahrukh Khan made an iconic fan of himself with this Maneesh Sharma film?
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