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Review - हुमा-शाकिब हैं शानदार..लेकिन डराने में नाकाम रही दोबारा

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2.0/5

कास्ट- साकिब सलीम, हुमा कुरैशी, आदिल हुसैन, लीजा रे
प्रोड्यूसर -प्रवाल रमन, इशान सक्सेना, विक्रम खाखर, सुनील शाह
लेखक -माइक फ्लांगन की Oculus पर बेस्ड, प्रवाल रमन (स्क्रीनप्ले)
शानदार पॉइंट - आदिल हुसैन, नैरेशन के लिए जिस फ्लैशबैक
निगेटिव पॉइंट - कमजोर पहला हाफ, बिल्कुल डरावनी नहीं
शानदार मोमेंट - हुमार कुरैशी जब एक बल्ब की बाइट उसे सेव समझकर लेती हैं, आदिल हुसैन का मास्क में डांस

प्लॉट

प्लॉट

फिल्म की कहानी लंदन की है जहां नताशा मर्चेंट (हुमा कुरैशी) और उसका भाई कबीर (साकिब सलीम) सुधार गृह से रिलीज होते हैं। कबीर के ऊपर बचपन में अपने पैरेंट्स के मर्डर का आरोप है। लेकिन
दोनों भाई बहन का विश्वास है कि ये सब उस भुतहा आइने की वजह से है जो उनके पिता एलेक्स (आदिल हुसैन) ने एक दुकान से लाई थी। उन्हें पता भी नहीं था कि ये एक विदेशी आत्मा अना (Madalina Bellariu) से पोजेस्ड है।

धीरे धीरे एना एलेक्स को रिझाने की कोशिश करती है और उसके दिमाग पर

धीरे धीरे एना एलेक्स को रिझाने की कोशिश करती है और उसके दिमाग पर "कुछ दाग छुटाने में सदियां बीत जाती है" जैसे डायलोग के साथ अपना नियंत्रण कर लेती है। वो उसे उलझाकर उससे क्राइम करवाती है और इसका अंत बहुत ही खतरनाक होता है। अब बदला लेने का समय आ गया है और नताशा हर हाल में ये साबित करना चाहती है कि ये सब उस आइने की वजह से हुआ है। कबीर पहले अपनी बहन के साथ आइने को हमेशा के लिए खत्म करना चाहता है लेकिन उसे बाद में एहसास होता है कि इतिहास दोबारा खुद को दोहराएगा।

धीरे धीरे एना एलेक्स को रिझाने की कोशिश करती है और उसके दिमाग पर "कुछ दाग छुटाने में सदियां बीत जाती है" जैसे डायलोग के साथ अपना नियंत्रण कर लेती है। वो उसे उलझाकर उससे क्राइम करवाती है और इसका अंत बहुत ही खतरनाक होता है। अब बदला लेने का समय आ गया है और नताशा हर हाल में ये साबित करना चाहती है कि ये सब उस आइने की वजह से हुआ है। कबीर पहले अपनी बहन के साथ आइने को हमेशा के लिए खत्म
करना चाहता है लेकिन उसे बाद में एहसास होता है कि इतिहास दोबारा खुद को दोहराएगा।

 डायरेक्शन

डायरेक्शन

वो दिन अब चले गए हैं जब भूत सफेद साड़ियों में होती है और एक भूतहा हवेली फिल्म में जरूर होती है। प्रवल रमन की ये फिल्म इन सबसे हटकर है और थोड़ी रिफ्रेशिंग भी है। उन्होंने फिल्म में नैरेशन के लिए फ्लैशबैक का इस्तेमाल किया है।
फिल्म में असामान्य घटनाओं को और खून खराबे की लड़ाई दिखाई है। फिल्म में जब भी आप उस आइने को देखगें को तो कुछ पल के लिए डर जाएंगे। लेकिन फिल्म कहीं भी आपको शॉकिंग नहीं लगेगी। फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी धीमा है। वो प्लॉट बनाने के लिए काफी अधिक समय लेते हैं। अगर आप ये सोचकर फिल्म देखने जा रहे कि आप डरकर अपनी सीट पर उछलकर बैठेंगे तो आपको
काफी निराशा हाथ लगने वाली है।

परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

हुमा कुरैशी इस फिल्म में इंप्रेस कर पाने में नाकाम रही हैं।फिल्म की शुरूआत में वो अपने किरदार में बहुत ही अच्छी लगी हैं लेकिन बाद में उनके डायलोग बार बार दोहराए गए हैं। हालांकि कहीं कहीं
उनके कुछ बहुत ही अच्छे मोमेंट्स हैं। साकिब सलीम ने अपना काम बहुत ही ईमानदारी के साथ निभाया है लेकिन फिल्म में उनका इस्तेमाल नहीं किया गया। लीजा रे भी फिल्म में अच्छी लगी हैं तो वहीं Madalina Bellariu की हिंदी उनकेकिरदार से ज्यादा डराती है और हां मैं अभी तक रिया चक्रवर्ती के रोल को समझने की कोशिश कर रही हूं।
अब बात करते हैं फिल्म के असल नायक आदिल हुसैन की जो हर कास्ट से बेहतर लगे हैं। उनका एक बहुत ही अच्छे पिता से हिंसात्मक इंसान के रूप ट्रांसफॉर्मेशन गजब का दिखाया गया है। उन्हें कई बार देखना काफी डिस्टर्ब करता है और डराता भी है।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

दोबारा पूरी तरह से अपना असली प्रेरणा पर बनी लेकिन फिल्म अंत कर अपना वजूद खो देती है।

म्यूजिक

म्यूजिक

फिल्म का म्यूजिक आपके कानों में गुंजते रहेगी लेकिन गाना ज्यादा समय तक आप याद नहीं ऱखेंगे।

Verdict

Verdict

कम शब्दों में बोलें तो दोबारा एक बार देखी जा सकती है।

English summary
Dobaara movie Review story plot and rating, Know how the movie is,
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