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#Review: धनक, शाहरूख - सलमान की जंग में जीत गए दो नन्हें सुपरस्टार

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4.0/5

फिल्म समीक्षा - धनक
निर्देशक - नागेश कुकुनूर
कास्ट - हेतल गाड़ा, कृष छाबरिया

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप सारे दिन बाहर घूमते रहें पर कहीं कोई दुर्घटना ना हुई हो? आप सारे दिन लोगों से मिलते रहें और कोई भी कहीं भी आपको अपमानित ना करे? एक दिन यूं ही आप सारे दिन सच बोलते रहें और किसी को आपकी बात का बुरा ना लगे? एक पूरा दिन आप सब का यकीन कीजिए पर किसी से भी धोखा ना मिले?

शायद आप उस दिन को अजीब दिन कह देंगे। बचपन में शायद सबने कुंवर नारायण की ये कविता, एक अजीब दिन ज़रूर पढ़ी होगी, लेकिन अमल किसी ने नहीं किया होगा, सिवाय नागेश कुकुनूर के। धनक एक सपना है, जिस पर यकीन कर पाना उतना ही मुश्किल है, लेकिन यही इस सपने की खासियत है कि ये सच है।

फिल्म इतनी सादा और मासूम है कि आप ना चाहते हुए भी इस पर विश्वास करेंगे। लेकिन उस विश्वास में आपको थोड़ा समय लगेगा क्योंकि इस फिल्म पर विश्वास वही कर सकता है जो दुनियादारी, धोखेबाज़ी, झूठ, फरेब से कोसों दूर है। 

बचपन कितना सीधा हो सकता है और कितना ज़िद्दी हो सकता है ये आपको छोटू और परी की कहानी बताती है। दो नन्हें फैन्स - एक शाहरूख और एक सलमान लेकिन दो खान के होने के बावजूद फिल्म में जीतते दिखाई देंगे ये नन्हें सुपरस्टार्स।

पढ़िए धनक की पूरी समीक्षा -

कहानी

कहानी

फिल्म की कहानी है एक भाई बहन की - छोटू और परी। एक शाहरूख की फैन है तो दूसरा सलमान का। दोनों अपने चाचा - चाची के साथ राजस्थान के एक गांव में रहते हैं। छोटू के पास आंखे नहीं हैं और उसे बर्थडे गिफ्ट में आंखे देने के लिए परी खत लिखती है अपने हीरो शाहरूख खान को। बस क्या ये खत शाहरूख तक पहुंचता है या दोनों बच्चे शाहरूख तक पहुंचते है यही ट्विस्ट फिल्म को बांधता है।

अभिनय

अभिनय

दोनों बच्चे - हेतल गाड़ा और कृष छाबरिया स्क्रीन पर जादू बिखेर सकते हैं। उनके स्क्रीन पर आते ही आप धीरे धीरे उनकी हर नोक झोंक के साथ खुद को खुद का बचपन याद करते हुए पाएंगे। वहीं हर शरारत के साथ एक हल्की सी मुस्कान पूरी फिल्म में आपके चेहरे पर रहेगी।

निर्देशन

निर्देशन

नागेश कुकुनूर एक बेहतरीन डायरेक्टर हैं लेकिन इस बात वो कुछ अलग और बिल्कुल फ्रेश लेकर आए हैं। इस भरोसे के साथ कि हर कोई फिल्म से खुश होगा और अपने इस भरोसे पर वो पूरा खरा उतरते हैं एक उम्दा कोशिश के साथ।

स्टारकास्ट

स्टारकास्ट

फिल्म की स्टार कास्ट बेहतरीन है चाहे विपिन मिश्रा का टिपिकल गांव का अंदाज़ हो या राजीव लक्ष्मण का रंगीला सा किरदार। वहीं विभा छिब्बर और फ्लोरा सैनी जैसे किरदार कहानी को बांधते हुए नज़र आएंगे।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

राजस्थान को इतनी खूबसूरती से दिखाना नागेश कुकुनूर के लिए कोई नई बात नहीं है। ये राजस्थान में उनकी सबसे बेहतरीन कोशिश है। वहीं फिल्म का म्यूज़िक, बैकग्राउंड स्कोर बेहतरीन है।

डायलॉग्स

डायलॉग्स

फिल्म की कहानी इतनी सिंपल है कि आप अपने आप इससे बंधते चले जाएंगे और शायद यही कारण है कि डायलॉग्स में भी आपको वही मिट्टी की खुश्बू मिलेगी।

अच्छी बातें

अच्छी बातें

फिल्म में छोटे छोटे दृश्य हैं जो आप पर जादू करेंगे। चाहे वो परी का चिट्ठी लिखना हो या फिर छोटू की नोकझोंक। दो स्टारडम से जकड़े बच्चे लेकिन फिर भी चमक दमक से पूरी तरह दूर, सच से दूर होकर भी उसे पूरा करने के लिए उतनी ही ज़िद। शायद यही इस फिल्म की जादूगरी है।

निगेटिव बातें

निगेटिव बातें

वैसे तो हमें इस फिल्म में कोई निगेटिव बात नहीं मिली। काफी समय और शायद 2016 में पहली बार कोई हैप्पी फिल्म है। जिसे देखकर आप खुश होंगे और थोड़ा सा सुकून मिलेगा कि चलो कुछ तो अच्छा हो रहा है।

हिट या मिस

हिट या मिस

हमारा यकीन मानिए, धनक मिस करने वाली फिल्म नहीं है। कम से कम अपने बच्चों के साथ तो कतई नहीं। हमारी तरफ से फिल्म को 4 स्टार।

 
English summary
Dhanak film review - Amazing film by Nagesh Kukunoor. Hetal Gada and Krrish Chhabaria weave magic on screen.
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